nikhilincredible

www.instagram.com/nikhilincredible

'The broken soul which chose to survive' writing is the best way of expressing!!

Grid View
List View
Reposts
  • nikhilincredible 3d

    विश्वास

    है बहुत कठिन समय मगर टल जाएगा
    सावधानियां सारी बरतो संभल जाएगा
    उदासियों की कड़ियाँ है चहुंओर मगर
    तुम देखना ये दौर भी निकल जाएगा!

    रख हौसला ये काल भी कल जाएगा
    सतर्कता हो तो दुश्मन जल जाएगा
    आसुंओं की श्रृंखला जो बह रही यहाँ
    थोड़े प्रयासों से अमन में बदल जाएगा!

    कुछ दिनों तक दूरियों में जो पल जाएगा
    कल वही साथ उल्लासों के महल जाएगा
    जो ज़रूरी नही हो निकलना तो घर रहो
    अदृश्य है शत्रु निकले तो मचल जाएगा !

    ये डर नही समझदारी से ही ढल जाएगा
    अपनों का हाल पूछो मन बहल जाएगा
    उदासियों की कड़ियाँ है चहुंओर मगर
    तुम देखना ये दौर भी निकल जाएगा!
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 21w

    सिहरन

    हैं काले से जो ये सारे बादल
    इस आसमान में यूँ सिमटे हुए
    सिहरन बटोरे रहते आजकल
    थोड़ी सर्दियों में लिपटे हुए!

    हैं नही ऐसे ये सारे दरअसल
    अंदर तो उजाले सिमटे हुए
    बाहर में रहते हैं चेहरा बदल
    भीतर से धूप में लिपटे हुए !

    हैं बितायीं गर्मियां गिनते हुए पल
    मोहब्बत के इरादों में सिमटे हुए
    इन दिनों रहते हैं ये थोड़ा मचल
    सूरज की बाहों में यूँ लिपटे हुए !

    हैं रहते साल भर अगल-बगल
    मगर दूरियों की टीस में सिमटे हुए
    मिलन की है जो ये मौसमी पहल
    बेचैन सी मोहब्बत में लिपटे हुए

    हैं ये स्याह से रंगे हुए सारे महल
    भावनाओं की ईंट में सिमटे हुए
    बादल जानते हुए कि ढहना है कल
    सदियों से हैं चाहत में लिपटे हुए !
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 31w

    हिंदी सरल भी है और क्लिष्ट भी। पर इसकी विशेषता भी तो यही है कि हर स्वरूप में यह संवाद का मनोहर साधन बन जाती है। हिंदी के कई सारे प्रकारों में से एक है, 'बोलचाल वाली हिंदी'। यह सबसे अधिक चलन में है। इसमें व्याकरण की अशुद्धियों पर ध्यान नहीं देकर इस बात पर अधिक बल दिया जाता है कि सामने वाला हमारी बातों को स्पष्टता से समझ ले। विभिन्न प्रांतों से संबंध रखने वाले लोगों की हिंदी में प्रायः क्षेत्रीय स्वभाव देखने व सुनने को मिल जाता है । पर यदि आप भाव को प्रधानता देतें हों तो हिंदी आपको अपने हर स्वभाव में मिठास से परिपूर्ण लगेगी। पर निश्चित रूप से इस 'बोलचाल वाली हिंदी' से इतर एक और हिंदी भी होती है, 'शुद्ध हिंदी' । यह प्रायः हिंदी साहित्यिक जगत से संबंध रखने वाले लेखकों अथवा कवियों के मध्य विद्यमान् रहती है इसमें त्रुटियों का कोई स्थान नहीं होता है तथा व्याकरण की जटिलताओं को भी तिरस्कृत नही किया जाता है ।

    हिंदी चाहे जिस रूप में हो ,अपनी ममता के छाँव में हमें मिठास ही प्रदान करती है । वैसे तो कोई भी भाषा छोटी या बड़ी नहीं होती पर यदि किसी एक भाषा विशेष को प्रतिभा का प्रतिबिंब मान लिया जाता हो तब यह आवश्यक हो जाता है कि हम इस धारणा को तर्कसंगत होकर चुनौती दें। हर भाषा की अपनी विशिष्टता है और इसलिए संवाद का हर प्रकार ना केवल मान्य बल्कि समान पटल पर स्वीकार्य होना चाहिए। निश्चित रूप से कुछ विशेष परिस्थितियों में कोई एक भाषा उस स्थान या प्रारूप में अधिक महत्ता रख सकती है पर इसे अन्य भाषाओं को अल्पतर मान लेने का माध्यम नही बनने देना चाहिए।

    आप सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं ।

    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 32w

    To be a teacher someday, was never in my thoughts.
    What started as a hobby & probably on a whim, later
    turned into my passion.I still remember my naive days, when I first entered into a classroom,with a diary in my hand,in which there were some notes prepared my me,to be used if & when I stuck to a particular topic or a question.Since then,I have evolved much both as a teacher & a person.I may at times, not have been an ideal one but at least I try to get a little better everyday,when I teach.
    I haven't earned huge out of this, in terms of bank balance, but surely I have earned tonnes of love & respect from numerous students,many of which are now a part of my extended family.With the recent covid outbreak & the subsequent closing of educational institutions,I have been severely hit on economical front but I am still here because of the incredible affection from my students.Today I want to thank all my students for believing in me.Moreover I certainly bow my head for all my teachers,who guided me in finding the right path of life.
    Happy Teacher's Day !

    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 36w

    "आजकल"

    'उलझनों पर डालकर सवाल आजकल
    लोग मोहब्बत करते है कमाल आजकल
    करते नही इंकार और इज़हार से डरते है
    आशिक़ी बनती कहाँ मिसाल आजकल!
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 37w

    "असलियत"

    'थोड़ी मोहब्बत उनको भी है
    इश्क़ से गिला जिनको भी है!'
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 39w

    कशमकश

    कुछ शायद नमकीन सा है
    कुछ मगर ग़मगीन सा है
    है ये आँखों का जो पानी
    कुछ लग रहा हसीन सा है!

    कुछ नासमझ था दिल
    कुछ अब ज़हीन सा है
    हो गए ख़्वाब सारे सादे
    कुछ नींद पर रंगीन सा है!

    कुछ ठीक तो हुआ है घाव
    कुछ दर्द मगर महीन सा है
    इरादों में यूँ तो है आसमाँ
    कुछ मगर ज़मीन सा है!

    कुछ यादों के दूरबीन सा है
    कुछ टूटे हुए यक़ीन सा है
    है ये आँखों का जो पानी
    कुछ लग रहा हसीन सा है!
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 40w

    "इश्क़"

    तो चलो फिर एक शाम और सही
    जो तू नही तो जाम का प्याला सही
    इश्क़ में कैसे करे कोई भला फ़ैसला
    है ग़लत क्या काम और क्या सही!
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 44w

    "ADVICE"

    never let the constant hullabaloo
    of distressed emotions dominate,
    for the gloomy night around you
    turns morning when you wait !
    ©nikhilincredible

  • nikhilincredible 47w

    मंथन

    आज एलईडी बल्ब के नीचे बैठकर कुछ पढ़ना वो मज़ा नही देता जो कभी लालटेन के सहारे पढ़ने में आता था। लालटेन की रोशनी थोड़ी मध्यम ज़रूर थी पर तब हमें कोई फ़र्क नही पड़ता था। बिजली नही हो और गर्मी ज़्यादा पड़ती थी तो हाथ वाले पंखे हमारे एयर कंडीशनर हुआ करते थे।वक़्त बढ़ता गया,और तरीक़े भी। अमूमन तो बिजली अब ज़्यादा जाती नही फिर भी कभी चली जाए तो अब इन्वर्टर और दूसरे साधन हमें उसकी कमी महसूस नही होने देते। पर कुछ है जो अब भी अधूरा है। एक साधन आता है तो दूसरे की कमी लगती है। बदलते समय के साथ हमारे साधन तो बढ़ते गए पर साथ में बढ़ने लगी हमारी आकांक्षाएं। मैं और आप,हम सब अपनी आकांक्षाओं के बोझ तले दबते चले गए।साधनों का होना बेशक़ अच्छी बात है पर संतोष का होना शायद उससे भी ज़्यादा मायने रखता है!
    ©nikhilincredible