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राही का हमराही

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    वजन

    वजन तो आज़ भी हमारा वो ही है....
    वो तो लोगों ने हमे थोड़ा हल्के में ले लिया।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    सूई - कैंची

    सूई बनने की चेष्टा रखें, कैंची बनने की नही....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    चाणक्य नीति

    निस्पृहो नाधिकारी स्यान्न कामी भण्डनप्रिया। नो विदग्धः प्रियं ब्रूयात् स्पष्ट वक्ता न वञ्चकः॥

    अर्थात् (Meaning)

    विरक्त व्यक्ति किसी विषय का अधिकारी नहीं होता, जो व्यक्ति कामी नहीं होता, उसे बनाव - शृंगार की आवश्यकता नहीं होती । विद्वान व्यक्ति प्रिय नहीं बोलता तथा स्पष्ट बोलनेवाला ठग नहीं होता ।

    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    हिन्दी

    एक दीन् - हि - न्दी को अपनाकर तो देखिए।
    बड़ा गर्व महसूस होगा।।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    जय हिन्दी

    मैं जय हिन्दी के, जय हिन्दी के उद्घोष लगाता हूं....
    मैं इस हिन्द, उस भारत मां का लाल कहलाता हूं....
    मैं उद्बोधन, उस संबोधन अपने को प्रकाश में लाता हूं....
    और जय हिन्द, जय भारत का मै नारा लगाता हूं....

    मैं केसरी, भगवा ध्वज को देख कर यूं इतराता हूं....
    मैं हिन्द का, है हिन्द मेरा, गर्व से कह पाता हूं,
    क्योंकि मेरे मुख पर हिन्दी भाषा का साथ जो पाता हूं....
    मैं मातृभाषा, इस राष्ट्रभाषा में देश समेट पाता हूं,
    क्योंकि हिन्दी के इस माधुर्य को हर देशवासी के,
    हर भारतवासी के, मुख पर पाता हूं....

    मैं हिन्दी को, महसूस करके मंद मंद मुस्काता हूं....
    क्योंकि हिन्दी हैं हम, हिन्दू हैं हम,
    यही विचार फिर मन में लाकर, संतुष्टि पाता हूं....
    और हिन्द, इस राष्ट्र को नतमस्तक हो जाता हूं....

    मैं जय हिन्दी के, जय हिन्दी के उद्घोष लगाता हूं।
    मैं इस हिन्द, उस भारत मां का लाल कहलाता हूं।।

    जय हिन्द, जय भारत
    मेरे द्वारा मेरी हिन्दी, मेरे हिन्द को समर्पित एक छोटी सी प्रस्तुति....

    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    बयां

    मैं कैसे बयां करूं अपने दिल की बात....
    उस पर कब्ज़ा तो तूने कर रखा है।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    आईना

    क्या ज़रा मैने आईना दिखा दिया,
    कि उन्होंने तो चेहरा ही देखना छोड़ दिया....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    दर्पण

    ख्यालों का दर्पण,
    और आत्मसमर्पण....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    पुस्तक

    कहीं खो सी गई थी पुस्तक मेरी,
    आज़ यादों के झरोखों में मिली....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
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    प्रभु मेरे

    मैने तो यूंही प्रभु को याद किया,
    और वो मेरे संग हो लिए....
    - राघव