naman_khandelwal

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  • naman_khandelwal 27w

    ● खोया ●

    खोया ही क्या जिसे कभी पाया ही नहीं,
    वो पाकर भी कुछ खो कर चले गए।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 27w

    ● इंतज़ार ●

    एक रात और गुज़ार दी देखो
    इंतज़ार में मैने,

    इंतज़ार नींद का था,
    वजह तुम थी।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 31w

    ● ज़िन्दगी ●

    हर एक मोड़ पर मुझे गिराती गयी,
    मैं उठता गया, ज़िन्दगी समझ आती गयी ।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 52w

    ● सबर ●

    बरसो हुए बिछड़े, उनकी कोई खबर नहीं है,
    मिलना नहीं अब उनसे, फिर भी सबर नहीं है।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 60w

    ● न जाने ●

    न जाने कैसा मन है, सोने का मन नहीं करता,
    आजकल इन रातों में रोने का मन नहीं करता,
    अकेलापन हर पल ही सताता रहता है,
    फिर भी न जाने किसी का होने का मन नहीं करता।

    रिश्ते कुछ धागों से, ज़िन्दगी एक सुई है,
    इन धागों को उसमें पिरोने का मन नहीं करता,
    डर सताता है कहीं मुझसे टूट न जाएं ये धागे,
    अधूरे न रह जाए सपने, संजोने का मन नहीं करता।

    न जाने कैसा मन है, सोने का मन नहीं करता,
    आजकल इन रातों में रोने का मन नहीं करत।

    कुछ अपने रूठे से हैं, मनाने की एक कोशिश जायज़ लगती है,
    किस्मत ने मुँह मोड़ लिया पहले ही, आज़माने का मन नहीं करता,
    चोट खायी है अक्सर रिश्तों को एकतरफा संभालने में,
    कुछ गलतियां मेरी फिरसे दोहराने का मन नहीं करता।

    न जाने कैसा मन है, सोने का मन नहीं करता,
    आजकल इन रातों में रोने का मन नहीं करता।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 95w

    • मोहब्बत •

    जाने दो अब हम और नहीं मोहब्बत के लिए
    वो गैर हमें कर गए मोहब्बत के लिए

    सीखा है मैंने आज ठुकराई जो मेरी वफ़ा
    सिर्फ वफ़ा ही काफ़ि न रही मोहब्बत के लिए

    चाहे जान दो, या जान लो मोहब्बत के लिए
    "ये जान लो" है सब सही मोहब्बत के लिए

    जाने दो अब हम और नहीं मोहब्बत के लिए
    वो गैर हमें कर गए मोहब्बत के लिए

    मोहब्बत में सपने देखे जो करने थे पूरे हमें
    वो मोहब्बत ही सपना कर गए मोहब्बत के लिए

    क्या बहाउं मैं भी आंसू उस मोहब्बत के लिए
    जो मोहब्बत को बुरा कर गए मोहब्बत के लिए

    जाने दो अब हम और नहीं मोहब्बत के लिए
    वो गैर हमें कर गए मोहब्बत के लिए

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 116w

    ● ज़ख्म ●

    होठों पे आती है हंसी कभी टहलने,
    बवंडर ज़ख्मों का देख भाग जाती है।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 130w

    ● ये दिल ●

    आँखों में नींद भरी पड़ी है,
    एक बोझ रखा है सीने पे,
    ये धक - धक जो कर रहा है,
    ये दिल किसका है सीने में ?

    मेरा न अब मैं भी हूँ रहा,
    किसको पाने की आस में हूँ,
    रहा न कोई लक्ष्य अब तो,
    न जाने किस प्रयास में हूँ ।

    मन हल्का सा विचलित है,
    एक कमी खलती है जीने में,
    ये धक-धक जो कर रहा है,
    ये दिल किसका है सीने में ?

    नज़रों के आगे सब धुंधला सा रहा,
    किसी से इश्क़ के नशे में चूर सा हूँ,
    न जाने किन यादों के पास खड़ा,
    मैं एक असलियत से दूर सा हूँ।

    चैन की आती क्यूँ स्वास नहीं,
    एक बोझ रखा है सीने पे,
    मैंने किसी का कुछ उधार रखा,
    ये दिल जिसका है सीने में ।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 177w

    ● गज़ल ●

    किस्मत में अपनी उनका दीदार ही नहीं,
    किया है सिर्फ इंतज़ार, है इंतज़ार ही सही ।

    रिश्ता है मेरा उनसे क्या पता मुझे नहीं,
    वो आए थे बनके अंजान, है अंजान ही सही ।

    टिकते नहीं हैं वो मेरे ख्वाबों में कभी,
    आते हैं बनके मेहमान, है मेहमान ही सही ।

    यादों में आकर रोज़-रोज़ तडपाओ तो नहीं,
    लेनी है मेरी जान , ले लो जान ही सही ।

    ©naman_khandelwal

  • naman_khandelwal 181w

    ● यादें ●

    वो फिर आएंगी आज,
    एक और कल खराब कर जाएंगी,

    इन यादों की आदत बड़ी खराब है,
    यह रोज़-रोज़ एक ही चीज़ दोहराएगी ।

    ©naman_khandelwal