Grid View
List View
Reposts
  • naajnaaj 47w

    काश! ख्वाबों के मरने से, ख्वाब ही मरते महज़

    Read More

    ख्वाब जो कछ सरेआम कत्ल हुए
    हकीकत झूल गयी थी बंद कमरे में
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 48w

    शिकायतें.....
    तुम से करे , खुद से या खुदा से

    उफ्फ! ये बे-पते की शिकायतें
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 48w

    रह- रह के आसमाँ में उठते रहे उजाले
    एक एक करके जलाये हमने ख्वाब सारे
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 48w

    अनकहे ढेरो शब्द जो कहे नहीं गये कभी
    कभी डर से , कभी हिचक से
    कभी दूरियों, परिस्थितियों की वजह से
    उन्हीं शब्दों की सजी हुई लाश है `कविताʼ
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 108w

    कुछ इस तरह उसने
    इश्क़ का काईदा बदल दिया
    शिकायतें वही रही
    और लहज़ा बदल दिया
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 117w

    ©Roshan Singh

  • naajnaaj 121w

    मेरे इश्क़ की बुलंदियाँ
    उसके प्यार की जमीं देखी है मैंने

    रुलाती है जिंदगी जब जब मुझे
    उसकी आँखों में नमी देखी है मैंने
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 123w

    कुछ और भी है अब हासिल करने को?
    इक तू, और 'तेरी' मैं
    काफी है इश्क़ मुकम्मिल करने को
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 123w

    रोज छूता है वो नये आयाम
    आखिर क्यूँ ना करूँ, मैं अपने इश्क़ पर गुमान

    Read More

    खुद को गिरवी रख दिया उन्होंने
    मेरी नीलामी की खबर जो मिली
    ©naajnaaj

  • naajnaaj 129w

    रात ओढ़ती रही कालिमा
    कि चाँद का वजूद खिले
    चाँद मिटाता रहा खुद को
    कि रात का असर दिखे

    आखिर
    पूरनमासी के रोज
    रात का ख्वाब पूरा हुआ
    और अमावस को चाँद का
    ©naajnaaj