my_sky_is_falling

** Et tu, Brute ?**

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  • my_sky_is_falling 1d

    ग़ज़ल

    इस बरस मौसमों में अच्छी फसल होगी
    यही उम्मीद दहकान की मुसल्सल होगी

    हम भी हो जाएंगे सुर्ख-रु तब खियाबां में
    जब मेरी ख्वाहिशें कलियों सी क़त्ल होगी

    महज़ स्याही से कहाँ कागज़ पे उतरती है
    लहू दिल का हो तो ग़ज़ल सी ग़ज़ल होगी

    जिनको बेचैनियों ने रात भर सोने ना दिया
    सोचिए उनके सीने में कितनी हलचल होगी
    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 2d

    राब्ता

    मेरे जख्मों से कुछ यूँ ज़माने ने राब्ता बना लिया
    घर की दीवार गिरी तो लोगों ने रास्ता बना लिया

    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 3d

    ग़ज़ल

    नई उम्मीदों का उगता सवेरा हो जाए
    तू अग़र मेरे सफ़र का रास्ता हो जाए

    यूँ रूठने मनाने में वक्त रायगां ना कर
    किसे ख़बर कब क्या हादसा हो जाए

    मैं तुझको ढूंढ ही लूँगा ये यकीन रखो
    जो किसी मोड़ पे रास्ता जुदा हो जाए

    काट लेंगे उम्र हाथों में हाथ थामें यूँ ही
    भले ही वक़्त अपना बे-वफ़ा हो जाए
    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 4d

    कसम से चारो को सच्चे दिल से प्यार करता हूँ��������

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    ग़म

    क्या बताएं किस क़दर ग़म-ए-आशिक़ी ने तोड़ा है
    एक कि बात क्या करें चार-चार गर्लफ्रैंड ने छोड़ा है
    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 4d

    ग़ज़ल

    मैं गया तो था लौटकर ना आने को
    पर वो आ गया ख़्वाब में मनाने को

    बहुत मुश्किल से लबों पे हँसी लाए
    वक़्त तैयार खड़ा है फिर रुलाने को

    उसकी हर याद मिटा दी मेरे दिल से
    बस कुछ खत रह गए है जलाने को

    इतने ना-समझ तो नही थे तुम कभी
    दवा समझ के ज़हर लाए पिलाने को

    अभी-अभी तो हमनें दरिया में उतारी
    औऱ तुम आ गए कश्तियाँ डुबाने को
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  • my_sky_is_falling 5d

    दुआ

    होके मायूस यूँ हर किसी से ख़फ़ा ना हो
    दुआ करो अब औऱ कोई बे-वफ़ा ना हो

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  • my_sky_is_falling 1w

    ज़ख्म

    तू इब्तिदा-ए-इश्क़ का यूँ मुझ से इल्तज़ा ना कर
    कुछ ज़ख्म सूख चुके है उसे फिर से हरा ना कर

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  • my_sky_is_falling 1w

    किस्मत

    पलकों पे एक दरिया छुपा कर रख लिया
    दुनिया भर का ग़म मुस्करा कर रख लिया
    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 1w

    शिक़वा

    ऐसा नही कि औऱ कोई बेवफ़ा ना था
    हाँ ..मग़र तेरी तरह कोई दूसरा ना था
    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 1w

    ग़ज़ल

    अब तेरे शहर की रानाइयाँ अच्छी नही लगती
    दर्द में लिपटी हुई तन्हाईयाँ अच्छी नही लगती

    कहीं सेजों पर बिखरी है कहीं कब्रों पर रखी है
    मुझे गुलशन की ये कलियाँ अच्छी नही लगती

    करो आज़ाद परियों को फिर रफ़्तार देख लेना
    थिरकते कदमों पे यूँ बेड़ियाँ अच्छी नही लगती

    मुझे बन्द दरवाजों से कोई शिक़वा नही लेकिन
    खुलती बंद होती खिड़कियाँ अच्छी नही लगती
    ©my_sky_is_falling