my_sky_is_falling

** Et tu, Brute ?**

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  • my_sky_is_falling 13h

    दरिया

    ऐ खुदा मुझ से भी तो पूछ लेते क्या चाहिए मुझे
    तेरी मर्जी के मुताबिक़ अब और नहीं चला जाता
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    रूखसत

    अक्सर तुझको ढूंढते हुए आ जाती है हवाएं
    मैं उन्हें तेरी तस्वीर पे चढ़े फ़ूल दिखा देता हूं
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    भंवर

    मेरी ज़िन्दगी इक डूबती हुई कश्ती सी है
    हाथ ना छोड़ोगे तो मेरे साथ डूब जाओगे

    ©my_sky_is_falling

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    हक़ीक़त

    टूट ना जाए कहीं इसलिए आँखों में नही पाला जाता
    ख़्वाब तो दूर मुझसे तो आईना भी नही संभाला जाता
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    छांव

    तुम्हारे जिस्म से लिपट कर पिघल जाएंगे
    हम पत्थर से यकीनन मोम में ढल जाएंगे
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    बे-करार

    धड़कता रहता है बेसाख्ता सीने में रात-दिन
    दिल को हर आहट में तेरी आहट सुनाई देती है
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    इश्क़

    रेशमी धागे में मोतियों को पिरोने जैसा
    तुम्हारा इश्क है ख्वाबों को संजोने जैसा
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  • my_sky_is_falling 5w

    ग़ज़ल

    किसी काफ़िर सा रंग बदलता मिलता है
    एक ही गम मुझे कितनी दफा मिलता है

    किसी को ढांढस बंधाने जाते तो क्यूंकर
    यहां तो हर आदमी रोता हुआ मिलता है

    मेरी मौत पे रोने वालों से पूछिए तो जरा
    यूं सुकूं में खलल डाल के क्या मिलता है

    मैंने इसलिए उससे दूरियां बढ़ाई क्योंकि
    प्यार गहरा हो तो ज़ख्म गहरा मिलता है
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  • my_sky_is_falling 6w

    इस उम्मीद में जी रहे है दर-ओ-दीवार मेरे
    कभी तो लौट के आएगी घर को बहार मेरे

    शाम-ए-ग़म है तनहाइयाँ है और शराब भी
    अब अजीयतों को ज़रा आराम दो यार मेरे

    यूं देखती है दुनिया मेरी तरफ़ कि जैसे मैंने
    खुली क़िताब में छुपाए रखे हों असरार मेरे

    बस यही इक ख़्वाब आज तक मैनें देखा है
    शहर-दर-शहर ही लगे हुए हों इश्तिहार मेरे
    ©my_sky_is_falling

  • my_sky_is_falling 6w

    ना पूछ जिंदगी से क्या-क्या मिला है
    जैसे धूप और छांव का सिलसिला है

    क्या रंज अपने सीने से लगाए बैठें है
    क्या बात है यूँ चेहरा खिला-खिला है

    ऐसा नहीं कि वो भूल गया है मुझको
    बेशक़ हमारे दरमियाँ थोड़ा मसला है

    तुम ही नही गुजरते इस राह से कभी
    कुछ तुझे मिज़ाज़ बहारों का मिला है

    यूं ही तो कभी कोई समंदर नही होता
    पूछिए दरिया से कभी कितना चला है
    ©my_sky_is_falling