Grid View
List View
Reposts
  • monadeep 4w

    मुस्कराना आदत है हमारी
    वरना ज़िन्दगी तो हमारी भी नाराज़ है....
    ©monadeep

  • monadeep 4w

    देना है तो रूह दीजिए तोंहफे में
    जिस्म तो तेरा भी खाक, मेरा भी खाक....
    ©monadeep

  • monadeep 6w

    अजीब अदा है उनकी....
    नजरें भी हम पर हैं और
    नाराज भी हमसे ही है....
    ©monadeep

  • monadeep 10w

    "माँ आ गई बाद में बात करते है"
    से लेकर....
    "माँ वो आ गए बाद में बात करते हैं"
    तक का सफर ही इश्क़ हैं
    ©monadeep

  • monadeep 14w

    लिहाज के चादर में,सच को छुपा कर
    वो कुछ यूं गुम हो गई
    बेजुबान सी,वो अपनी आवाज को
    दबाकर फिर सो गई
    भोर हुई, सूर्य के आते ही फिर वो
    पंछियों सी चहकने लगी
    फलक पर चांद के इंतजार में मगन,
    सांझ होते ही फिर बहकने लगी
    ©monadeep

  • monadeep 15w

    सुनो
    प्यार रहे ना रहे,पर प्यार का एहसास रहने दो
    होठों पे मेरी खातिर एक मीठी मुस्कान रहने दो
    तेरी जिंदगी में भले ही ना हो कोई जगह मेरी
    पर दिल का कोई कोना मेरे नाम रहने दो
    मैं खुद को कह सकूं तुम्हारी
    खुद पर तुम बस,
    मेरा इतना अधिकार रहने दो
    सुनो ना.....plzzz
    होंठों पे मेरी ख़ातिर एक मीठी मुस्कान रहने दो....
    ©monadeep

  • monadeep 15w

    लौट आओ तुम कि
    आदतन बना लाती हूं
    दो प्याली अदरक वाली चाय
    सुबह सवेरे
    रख जाती हूं अखबार के ऊपर
    ताजे गुलाब
    आदतन
    कि जज्ब करती हूं देहगंध तुम्हारी
    अपनी सांसों में
    तुम्हारे उतारे हुए कुरते से
    कि आदतन पुकार लेती हूँ तुम्हें
    ढलती हुई शामों में
    लौट आओं कि लिखती रहती हूं तुम्हें
    खत कभी न खत्म होने वाले
    ©monadeep

  • monadeep 16w

    प्रेम का धागा लपेट दिया है
    मैने तुम्हारे चारों ओर
    तुम्हारा नाम पढ़ते हुए
    तुमसे ही छुपा कर
    और बांध दी है
    अपनी सांसे मजबूती से
    सभी गाठों में
    अब मन्नत पूरी होने के पहले
    तुम चाहो तो भी
    उसे खोल नही पाओगे
    बिना मेरी सांसों को काटे !!
    ©monadeep

  • monadeep 17w

    दिल में एक चाह सी मुद्दत से दबी लगती है
    जिंदगी आस में जिसकी ही कटी लगती है
    आरजू चंद थी मुझको मेरे कुछ अपनों से
    मेरी अपनों से भी बेगानी सी लगती है
    रेशमी रिश्तो के भरम में मैं जिए जाती थी
    सांस रिश्तो के कफन में ये घुटी लगती है
    कोई शिकवा भी करे तो आखिर किससे
    जंग किस्मत से ही जब अपनी ठनी लगती है।। ©monadeep

  • monadeep 23w

    मन के कोने सजे प्यार को
    कब तक पढ़ पाओगे तुम
    प्रेम संवेदनाओ को समझोगे
    या मन में घुटते रह जाओगे तुम
    दर्द की नदियां बहती अंदर
    कब तलक बांध बनाओगे तुम
    याद के खंडहर बिखरे मन में
    उन से कब बाहर आओगे तुम
    इंतजार में युग बीत चुका है
    कब मन से अपनाओगे तुम
    ©monadeep