manav_9

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परिंदा हू,कैद नही चाहता

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  • manav_9 27w

    पंख तो सब पक्षी के पास होता है
    ऊँचाई पर लेकिन सिर्फ बाज उड़ता है
    -मानवेन्द्र

  • manav_9 27w

    संघर्षों से जीत की इबारत लिखी जाती है
    घुंगरू वालो के बस जेब भारी होते है।।
    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 110w

    इश्क़ का हुनर हम भी कमाल रखते है
    मेहबूब भी हमारे क्या जमाल रखते है

    भले जमाने बदल गए हो,तो क्या हुआ
    आज भी उनके नाम का रुमाल रखते है
    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 111w

    चिड़ियों की चहचहाहट
    उसके कदमो की आहट
    चूड़ियों का खनखानाना
    माथा सहला कर उसका जगाना
    कुछ ऐसी सुबह रही आज मेरी

    गुलाबी स मौसम
    गुनगुनी सी ठंड
    ये कम्बल ये बिस्तर
    और चाय के साथ बन
    कुछ ऐसी सुबह रही आज मेरी
    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 111w

    रंजिश थी ग़र हमसे
    खंजर सीने में उतार देते
    रकीब के साथ तेरा मुस्कुराना
    हमसे देखा नही जाता।।

    तेरे चेहरे पर ये चोट के निशान
    बताते है तेरी कहानी
    फैसला जो लिया था तूने
    उसमे अब तुझसे रहा नही जाता।।

    खड़ा हूँ आज भी उसी मोड़ पर
    करके बग़ावत तू लौट आ वहीं
    तेरा यू दर्द में बेवजह मुस्कुराना
    मुझसे अब सहा नही जाता


    आज भी तेरी मोह्हबत का दिया
    जल रहा मेरे दिल के कोने में कही
    कुछ बाते तू समझ भी लिया कर
    हर बात मुझसे अब कहा नही जाता

    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 112w

    ख्वाहिशें हज़ार है
    किस किस में रंग भरू
    कुछ सुख गए
    कुछ सूखने को तैयार है।।
    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 112w

    बीते जमाने में क्या मोह्हबत होती थी
    दिन बन जाता था उसका दिख जाना

    हाय वो उसका खिड़की पर आना
    हल्के से मुस्कुरा कर नजरें झुकाना

    इशारों इशारों में ही हर बात बताना
    लब न खुलते फिर भी सब कह जाना

    वो आंखों से उसका गुस्सा दिखाना
    कान पकड़ू,फिर हल्के से मुस्कुराना

    फोन नही थे तब,बाते ऐसे ही होती थी
    आंखों से आंखों की मुलाकाते होती थी

    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 112w

    PC:Google

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    जमाने की नजर खराब है
    आ नजर तेरी उतार दू
    हर गम तुझे छोटा लगे
    इतना तुझे मैं प्यार दू।।
    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 112w

    निशब्द

    निशब्द कर देता है मुझे
    तेरा वो मासूम चेहरा
    जब तू मुझे छोटे बच्चे सा तकती है।।

    निशब्द कर देती है मुझे
    वो लटाये तेरी जुल्फों की
    जो तेरे चेहरे पर आकर गिरती है।।

    निशब्द कर देती है मुझे
    वो तेरी छोटी सी लाल बिंदी
    जो तू अपने माथे पर सजाती है।।

    निशब्द कर देता है मुझे
    किसी फरमाइश से पहले
    जब तू हल्के से मुस्कुराती है।।
    ©मानवेन्द्र

  • manav_9 113w

    तकलीफों के साये इस कदर है
    खुशियां दरवाजे पर दम तोड़ देती है

    ठंडी हवाएं बहती है पूरे गाँव मे
    बस मेरे गली के कोने से रुख मोड़ लेती है

    यू तो हमेशा साथ रहती है वो,ख्वाबो में
    बस हकीकत में साथ छोड़ देती है।।
    ©मानवेन्द्र