malay_28

wandering with words.

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  • malay_28 1d

    26/10/2021

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    मेरे ग़मों की शाम कुछ हसीन होने दो
    तन्हाइयों की महफ़िल रंगीन होने दो !

    जो जलते हैं मेरी लाज़वाब बेख़ुदी से
    उन्हें आज भी ज़रा ग़मगीन होने दो !

    मेरे अश्क़ मुआवजा हैं इश्क़ का मेरे
    तरबतर मेरे चेहरे को नमकीन होने दो !

    इश्क़ खेल नहीं इसके भी अदब होते हैं
    बेअदब जो हैं उनको ज़हीन होने दो !

    देख उतरकर मेरे इश्क़ की गहराई ख़ुदा
    आसमाँ को मलय आज ज़मीन होने दो !

    ©malay_28

  • malay_28 3d

    24/10/2021

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    दिल की जानिब चला था ये कहाँ आ गया
    कब छूटी क़दमों से ज़मीं आसमाँ आ गया !

    मुकम्मल नहीं होना ही ख़ूबसूरती-ए-इश्क़
    अब साथ रोने देखो ये सारा जहाँ आ गया !

    सिल लिए थे लब ख़ामोशियों के धागे से
    अँधेरे में दर्द का रोशन कहकशाँ आ गया !

    दिल की आरज़ू थी यादों को भूल जाऊँ मैं
    दिल के चेहरे पर फिर एक निशाँ आ गया !

    था दिल के तहखाने में दर्द का ख़ज़ाना
    जाने कैसे मलय आँखों में ज़ुबाँ आ गया !

    ©malay_28

  • malay_28 1w

    15/10/2021

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    हाइकू


    घर तिनका
    देहरी धूल सनी
    स्वागत आँधी


    चेहरे कई
    लुभाते भरमाते
    साँप की जीभ


    बादशाहत
    राजधर्म विलीन
    आत्मविभोर


    प्यार क्या है
    हवा पे चलना है
    हँसता दर्द


    तुम और मैं
    नदी के पत्थर हैं
    सूखी है नदी.

    ©malay_28

  • malay_28 2w

    11/10/2021

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    दूरियों को निचोड़कर वस्ल का आग़ाज़ तो करो
    पलों में ज़िन्दगी मुकम्मल करने का अंदाज़ तो करो !

    मुश्किल नहीं हवा पर चलना चलके तो देखो कभी
    आसमाँ भी झुक जाये हौसलों को परवाज़ तो करो !

    कब किसी का हुआ है ज़माना ये इस ज़माने में
    अपनी लक़ीर तुम लिखो ख़ुद को जांबाज़ तो करो !

    घुटते हैं कुछ ख़याल अज़ीज़ बनकर दिल में कहीं
    गुफ़्तगू दिल हल्का करे किसी को हमराज़ तो करो !

    कुछ पलों का गुस्सा प्यार और बढ़ाता है मलय
    कभी कभी अपने चाहनेवालों को नाराज़ तो करो !

    ©malay_28

  • malay_28 3w

    05/10/2021

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    क़ाफ़िया--- "आज" की बंदिश
    रदीफ़----कर दिया

    इक ख़ामोश जंग का उसने आग़ाज़ कर दिया
    दिल की तल्ख़ियों को उसने परवाज़ कर दिया !

    कब तक भला कोई सहे सितम बिन कुछ कहे
    अपनी ख़ामोशी को उसने आवाज़ कर दिया !

    बेवफ़ा लफ़्ज़ न जाने कब कहाँ दग़ा दे जाए
    निग़ाहों से बयानी को उसने अंदाज़ कर दिया !

    ज़र्रा था ज़मीं का मैं जिसकी कोई हस्ती नहीं
    मुहब्बत मुझसे करके उसने सरताज़ कर दिया !

    टूटे हुए दिल की सदा कभी सुनो तो मलय
    अश्क़ सने हर्फ़ों को उसने अल्फ़ाज़ कर दिया !


    ©malay_28

  • malay_28 3w

    03/10/2021

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    क़ाफ़िया--किया (इया की बंदिश)
    रदीफ़--मैंने सोच समझकर

    आग़ाज़-ए-मुहब्बत है किया मैंने सोच समझकर
    दिल इक रक़ीब को है दिया मैंने सोच समझकर !

    थी कमी कोई नहीं ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर
    दिन मुफ़लिसी में है जिया मैंने सोच समझकर !

    वो हँसाये या रुलाये अब है छोड़ दिया उसी पर
    अश्कों को ही तक़दीर किया मैंने सोच समझकर !

    सच है गवारा नहीं मुझे रहना तुमसे होकर जुदा
    ज़हर जुदाई का है पिया मैंने सोच समझकर !

    ख़ामोशी मेरी कर रही है सरे आम रुसवा मलय
    सनम होठों को है सिया मैंने सोच समझकर !

    ©malay_28

  • malay_28 3w

    ख़ामोशियों का फैला एक समंदर था
    उसकी आहटों के दरमियाँ
    झिलमिलाए थे कुछ क़तरे अश्क़ भी
    उसकी मुस्कुराहटों के दरमियाँ.

    ©malay_28

  • malay_28 4w

    29/09/2021

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    बारिश बहुत है
    धुल न जाये तेरी यादें
    तुम मेरी साँसों की डोर थाम लो
    मैं तुम्हारी आँखों की रोशनी में चलूँगा
    गर कभी बादल बेचैन होकर चीख पड़े
    तुम मेरी क़समों से लिपट जाना वहीं
    झूठे नहीं थे जो किया था मैंने
    तुम्हारे और मेरे बीच की
    हवा थी साक्षी.....

    ©malay_28

  • malay_28 4w

    29/09/2021

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    अपने अहसासों को परवाज़ दो
    हर सृजन में बुलंद आवाज़ दो
    मेरे क़लम तुम हो तो मैं भी हूँ
    हर बार लिखने का नया अंदाज़ दो.

    ©malay_28

  • malay_28 4w

    25/09/2021

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    हुस्न-ए-चाँद सबका है दिल लुभा रहा
    ऐसे में ऐ दिल तराने मुहब्बत के सुना !

    ढल रहा है आँचल साँझ का देख लो
    रात की महफ़िल में कुछ तो गुनगुना !

    ख़ामोशी तेरी दिल को तोड़ने लगी
    जल रही शमा का दिल है बुझा बुझा !

    अश्क़ों से लबरेज़ तेरी आँखें कह रही
    दिल का शरारा हो गया धुआँ धुआँ !

    थाम कर दामन तू इश्क का मलय
    आरज़ू ऐ दिल तराने मुहब्बत के सुना !

    ©malay_28