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  • mai_shayar_to_nahi_ 1h

    अब तुम्हें पाने का मुझमे जुनून कहाँ है?
    जो तेरी बाहों में मिलता था वो सुकून कहाँ है?
    चलो माना की जिस्म मेरा जिंदा है मगर
    पर आंखो में पानी और रगों में खून कहाँ है?
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 2d

    बूढ़ा बाप

    सहे थे उसने, तेरे नखरे हजार कभी
    आज उसका खाँसना, तुम्हे उबाऊ लगता है?
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 2d

    गैरों सा तुझसे, अब सुलुक किया जायेगा
    काँटो के बदले में, अब काँटा ही दिया जायेगा
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 2d

    आज तेरे जेहन मे ,नही किसी का भय है
    मजबूत तुम नही , ब्लकि तेरा समय है!
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 4d

    गिरना ही तकदीर मे हो तो संभलकर क्या होगा?
    जब हर दाव उल्टे हो जाये तो मचलकर क्या होगा?
    मिलना होता तो मिल ही जाता अब तक हमसफर हमको
    यूँ हर रोज नये-नये दोस्त बदलकर क्या होगा?
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 4d

    अतीत के साए में जी कर के क्या होगा?
    गमों का घूंट पी कर के क्या होगा?
    इरादा तो हर बार घायल करने का है
    यूं जख्मों को सी सी कर के क्या होगा?
    @ अभिषेक
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 5d

    अपनेपन का फर्ज हमें निभाना पड़ता है!
    मन न चाहे फिर भी एक हो जाना पड़ता है
    छिड़ती है जब जंग यथार्थ के उठते प्रश्नों पर
    जीत कर भी अक्सर हार जाना पड़ता है
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 1w

    सारी जिम्मेदारियों का बोझ अपने सर लेती है
    औरत है न साहेब! हालत से समझौता कर लेती है
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 1w

    लोग लगते है तुम्हें अनजाने से
    मगर सब वाकिफ है तेरे कारनामे से
    पाप और व्याधि छुपाये नही छुपती
    धुआँ उठ जाता है आग लग जाने से
    ©mai_shayar_to_nahi_

  • mai_shayar_to_nahi_ 1w

    छत पे आकर जो तुमने जुल्फें लहराई है
    ऐसा लगा चांद आज जमीं पे उतर आई है
    ©mai_shayar_to_nahi_