maakinidhi

august5�� spread love....u will get it doubled in the end❣️

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  • maakinidhi 1w

    परिवर्तन

    कुछ शूल-पंथ, कुछ पुष्प गुच्छ!
    जीवन परिवर्तनशाला है!!
    यह गौरवगाथा उन जन की!
    अमृत सम जिनको हाला है!!

    कभी मन भावों का सागर है!
    कभी मौन रिक्तता पसरी है!!
    सम्पूर्ण सृष्टि की चाह कभी!
    कभी जीवन से भी विरक्ति है!!

    है शिलालेख पर स्वर्णाक्षर से!
    अंकित उनके नाम यहां!!
    नि: स्वार्थ भाव परहित अर्पित!
    करते जो प्रतिक्षण काम यहां!!

    सुख में या दु:ख की वेला में!
    खुद को जिसने संभाला है!!
    यह गौरवगाथा उन जन की!
    अमृत सम जिनको हाला है!!

    जीवन की अनुभवशाला से!
    कुछ मोती हमको चुनने हैं!!
    दैदीप्यमान व्यक्तित्व लिए!
    सपने स्वर्णिम ही बुनने हैं!!

    रखता स्मरण जगत उसको!
    जो हृदयांचल की माला है!!

    यह गौरवगाथा उन जन की!
    अमृत सम जिनको हाला है!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 2w

    #इश्क��❤️��

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    इश्क

    भीड़ से कुछ यूं जुदा था!
    था वो इंसा या खुदा था!

    थी इबादत सी मुहब्बत!
    फूल सा चेहरा खिला था!!

    है मुकम्मल इश्क उसका!
    ना जिसे शिकवा गिला है!!

    इश्क बहुतों ने किया है!
    जो निभाए वो भला है!!

    है वफादारी रिवायत!
    इश्क का ये कायदा है!!

    कुछ को यूं पत्थर मिले हैं!
    उनको फूलों से गिला है!!

    कुछ हैं कहते जलजला है!
    जिनको ना हासिल मिला है!!

    कुछ हैं कहते ये बला है!
    जिनके पल्ले ना पड़ा है!!

    क्यूं शिकायत इश्क से है?
    खूबसूरत सिलसिला है!!

    डूबा जो वो पार उतरा!
    हारा वो जो तैरता है!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 3w

    आप सभी को गांधी व शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ��❤️

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    सत्य!

    जीवन पथ के मध्यांतर में!
    जब घोर अंधेरा छाता है!!
    सत्य राह दिखलाता है!

    जो डरा नहीं पथ शूलों से!
    साहस का दामन थामा है!!
    उस हेतु समस्त कटे बंधन!
    जीवन-प्रतीति अभिरामा है!!

    यद्यपि कलियुग का रूप विकट!
    कतिपय संशय भर जाता है!!
    पर रखना दृढ़ विश्वास यही!
    सच स्वयं प्रकट हो जाता है!!

    हों कितने भी आडम्बर पर!
    निश्छल प्रेम रंग दिखलाता है!!
    आवरण झूठ का स्वतः, स्वयं!
    क्षणभंगुर सा बिसराता है!!

    जीवन पथ के मध्यांतर में!
    जब घना अंधेरा छाता है!!
    सत्य राह दिखलाता है!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 4w

    आप सभी को बेटी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ��❤️

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    बेटियां

    सच कहूं प्यार की हैं डगर बेटियां!
    खुशनसीबी का कोई शजर बेटियां!!

    आंसू पीकर हमेशा हंसीं मायके!
    मां पिता की उतारें नजर बेटियां!!

    क्या लगाएगी दुनिया भला मोल ये!
    मीठे संगीत का कोई स्वर बेटियां!!

    ठीकहो या गलत सब यही झेलतीं!
    रख रहींकौन सा ये जिगर बेटियां!!

    शुक्र तेरा खुदा,मेरी झोली में दी!
    लाख रातों की कोई सहर बेटियां!!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 5w

    आप सभी को पितृ पक्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ��❤️

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    तर्पण

    तर्पण, किन्तु किसका?
    पूर्वजों का? नहीं नहीं!
    दूषित मानसिकता का!
    स्वार्थपूरित सोच का!
    तर्पण हर उस कार्य का!
    जो कर दे हमें विलग!
    उन संस्कारों से!
    जो कभी पूर्वजों से मिले!
    तर्पण आवश्यक है!
    इस पितृपक्ष में!
    कर दीजिए तर्पण!
    मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ है!
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 5w

    शुभकामना

    लेखन कला और स्वरों का अनोखा संगम!
    विलक्षण प्रतिभा स्वामिनी रचनाएं विहंगम!!
    आपके मधुर व्यक्तित्व में है ऐसा सम्मोहन!
    लेखनी परिवार है आपके ही प्रेम से रौशन!!

    जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं डियर❤️
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 6w

    क्या?(P-4)

    और फिर मैं भी मुस्कुराते हुए ईश्वर से कहती हूं कि आपकी ही बेटी हूं....हार कैसे मानूंगी? शिक्षा के हर प्रश्न-पत्र की तरह ही जीवन के इस प्रश्न-पत्र में भी ससम्मान उत्तीर्ण होकर ही दिखाऊंगी आपको और आपको भी गर्व होगा एक दिन कि कैसे कांटों में खिला था एक गुलाब जिसने अपनी खुशबू से सब जग को सम्मोहित कर रखा था और फिर इसी निश्छल मन और उन्नत भाल के साथ आऊंगी एक दिन उस दुनिया में जहां आप मिलेगें,मां मिलेंगी और क्या ही मिलना शेष रह जाएगा फिर तो! तो अभी के लिए मुझे आशीर्वाद और शक्ति दीजिए कि इस जीवन लक्ष्य में सफल हो सकूं और सच्चे अर्थों में आपकी संतान कहला सकूं

  • maakinidhi 6w

    क्या?(P-3)

    और फिर एक दिन ऐसा भी आएगा कि यकायक उन संबंधों का स्वरूप ही परिवर्तित हो जाएगा! एकाएक आप पर इतने प्रेम की वर्षा होने लगेगी कि अन्ततः आपकी मानसिक सेहत को जुकाम होकर ही रहेगा ...आप हतप्रभ रह जाएंगे कि यह स्वप्न है या अब तक स्वप्न में थे! फिर जब बात की तह तक जाएंगे तो पता लगेगा कि कोई स्वार्थ ही अचानक इतना परिवर्तन ले आया उन संबंधों में...वही स्वार्थ जो आपसे सिद्ध होना है खैर संक्षेप में आशय केवल यह है कि जीवन के कुछ रिश्ते ऐसे भी मिलेंगे कि संपूर्ण सृष्टि की कलाकारियों के दर्शन मात्र एक ही स्थान पर हो जाएंगे आपको! मैं जिस प्रकृति की इंसान हूं उस नाते ईश्वर से विनम्र प्रार्थना करती हूं कि ऐसे रिश्तों से दूरी रहे...अकेले ही भले हम!.... लेकिन ईश्वर शायद ऊपर बैठे-बैठे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि बेटा! जन्म तो जब मैंने भी मानव योनि में लिया तब पूरा जीवन संघर्षों और प्रश्नों में निकला और तुम चाहती हो कि परीक्षा लिए बिना ही तुम्हें जीवन रूपी प्रश्न-पत्र में उत्तीर्ण कर दूं?....to be continued
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 6w

    क्या(p-2)

    फिर एक दिन आता है जब आपको ये एहसास होता है कि सारी दुनियादारी के दर्शन आपको एक ही परिवार में हो गए हैं! दुनिया में तो फिर भी मुंह पर कड़वी से कड़वी बात बोलने वाले निष्पक्ष लोग मिल जाएंगे किंतु परिवार के दुग्ध की परत से ढके हुए विषकुंभों से निजात पाने का मंत्र ढूंढते हुए तो आपका पूरा जीवन भी व्यतीत हो सकता है....पहले पहल तो आप विश्वास ही नहीं कर पाएंगे संबंधों के दोहरेपन पर क्योंकि विश्वास में शंका का स्थान ही कहां होता है! बात यदि रक्तसंबंधों की की जाए तो फिर भी यह कहा जा सकता है कि वे लौटकर अपनों तक आएगें किंतु अपने रक्त संबंधों से जुड़े हुए उन अन्य संबंधों का क्या जो किसी पूर्णतया भिन्न परिवेश में ही पले-बढ़े हैं और जिनके लिए उनकी खुद की सोच ही सर्वोपरि है....आप अपना कलेजा भी निकाल कर रख दीजिए....वो पांव रखकर आपका कलेजा चीरते हुए निकल जाएंगे!.....to be continued
    ©maakinidhi

  • maakinidhi 6w

    # the harsh realities of life....when I speak my heart out...no filter at all!��

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    क्या?(P-1)

    क्या आप जानते हैं?....सुनने में तो किसी बिकाऊ प्रोडक्ट की टैगलाइन सी लगती है पर आज कुछ बताउंगी तो आपको लगेगा कि जैसे जिंदगी की ही टैगलाइन है। जिंदगी में सबसे पहले हम उन घरवालों से मिलते हैं जिनके घर में जन्म लिया होता है! हम बड़े होते हैं और सोचते हैं कि हमारा घर हमारे लिए दुनिया की सबसे महफूज जगह है! हम सोचते हैं कि दुनिया चाहे हमारे साथ कितना भी बुरा व्यवहार क्यों न कर ले... हमारा परिवार हमेशा हमारे साथ होगा! पर क्या सच में ऐसा होता है? हम जब भी कोई भी निर्णय लेते हैं ना तो उस निर्णय के पीछे के हमारे कारण, हमारी सोच को जानने की कोशिश भी करने वाले शायद एक या दो लोग होते हैं...बाकी सब होते हैं बिना तथ्यों को जाने अपना निर्णय देने वाले लोग और ये लोग आपके परिवार में भी होते हैं ....to be continued