lovetowrite990

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kahe jaanna hain humare bare mein �� kouno our kaam dhandha nahi hain ka

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  • lovetowrite990 10w

    मिरे भीतर से तुम जान जाओ
    ये तो मुमकिन नहीं
    मैं गैरो में मयस्सर जो रहा तुम्हारे लिए
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 41w

    नाराजगी ,शिकायतें कितने छोटा लफ्ज़ हैं ना
    मगर फिर किसी अपने के सामने जिक्र करते हैं तब दिल और आवाज इतने भारी क्यूँ हो जातें हैं गला रुंध क्यों जाता है।
    सामने वाला भी इतना शर्मिंदा महसूस नहीं करता होगा जितना
    हम बताते वक्त तिल तिल होते हैं
    और दिल बैठ तो तब जाता है जब सामने वाले को तुम्हे ये तक जताना पङे कि तुम नाराज़ भी हो किसी बात से ।
    फिर ये कैसे रिश्ते हैं महज नाम के जो अपने होने का दावा तो करते हैं मगर बस दिखावे में।
    कहने और करने में जमी आसमां का फर्क होता हैं।
    बातें मन बहलाने के लिए होती हैं, बातों से पेट नहीं भरता ।
    किसी को हिस्सा बताने में और हिस्सा बनाने में फर्क होता है
    बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी को पल भर चाहना या पल पल ।
    बात ना अहमियत की होती हैं अहमियत नहीं दोगे तो इज्जत घटेगी
    अपनी इज्जत दांव पर रखकर दिलो के खेल तो चलते नहीं
    हाँ बकायदा अहसास जरूर हो जाता है कि मोहब्बत हो या नफरत किसे करनी है और किसे नजरअंदाज।।।।।

    कि अपनी खुदगर्ज़ी में ही रहूँ तो बेहतर हैं
    खुदा के शिकायतों की अर्जी में रहूँ तो बेहतर हैं
    सबसे दिल लगाना भी मेरी ही ज़िद थीं और
    उनसे दूर जाना भी
    कवायद कायदे की छोङो मैं अपनी मर्जी में रहूँ तो बेहतर हैं। ।।
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 41w

    Friendship day

    एक छोटा राही स्कूल को चला
    शाम को बंदरों के झुंड में मिला
    राही बोला बंदर देखो दोस्त हैं मेरे
    बंदर मेरे दोस्त हमें फल तो दिला
    कूदा बंदर पेङ पर दुम को हिला
    आम लायें बंदर ने पर हमें ना मिला
    मज़े ले लेकर आम खायें बंदर
    राही उसका मुँह देखे और चिढाये बंदर
    रोया छोटा राही, घर दिया चल
    बंदर मेरे दोस्त नहीं
    नहीं दिया फल
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 42w

    गीत

    गुनगुन करती आई कोको
    कलम और स्याही लाई कोको
    लेख भी आया, निबंध भी आया
    गजल भी आई चुन चुन चुन
    गुनगुन करती आई कोको
    कलम और स्याही लाई कोको
    खूब लगी तो कोको रानी
    कविता लिखने आयेगी
    खूब लगी तो कोको रानी
    कविता लिखने आयेगी
    लिख जायेगी, लिख जायेगी
    ताली भी आयी, खाली भी आयी
    गाली भी आयी सुन सुन
    गुनगुन करती आई कोको
    कलम और स्याही लाई कोको
    चलते चलते हमको यूँ ही
    मिल गयें देखो श्रोता भाई
    श्रोता फिर पाठक बन बैठे
    बोले अब कुछ गा लो भाई
    गम जो गाओ , हमें बुलाओ
    महफ़िल भी आई , शायर भी
    आया, मदिरा नाची झुन झुन
    गुनगुन करती आई कोको
    कलम और स्याही लाई कोको
    लेख भी आया, निबंध भी आया
    गजल भी आई चुन चुन चुन
    गुनगुन करती आई कोको
    कलम और स्याही लाई कोको
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 42w

    #rachanaprati48 @mamtapoet
    Didi
    Mera manna hain bacho ka mann ek bar ko vichlit ho sakta hain magar woh sahi maarg per tabhi jaa sakenge jab unke mann mein bhawna ho.
    Sikhne ki

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    बालपन सो बाल मन
    शरारती सो गोपाल मन
    ताकती हैं सारी दुनियां
    बैठ कर इक कोने में मुनिया
    अजी फोन का जमाना है
    मुना इंटरनेट का दीवाना है
    बाबूजी भी फैशन में आगे
    मुना जी फिर सोशल मीडिया पर भागे
    कबीर सिंह जो देख भये मुना बन गये
    मुना भाई
    ठाठ में चलते मुना भाई, अक्ल को लग गया
    चूना भाई
    पब्जी के खिलाङी निकले
    क्रिकेट में अनाङी निकले
    कुएं के मेंढक को ध्यान ना
    लेकर ये गाङी निकले
    शिक्षा भी दर दर पर हारी
    मोबी भइया सब पर भारी
    बच्चे बूढ़े रहते इसके मौज में
    क्या लिखूं हर इक किस्सा कलम
    पङ गई सोच में
    पर निष्कर्ष भी उतना चाहिएं
    कोको दुरूपयोग रुकना चाहिए
    मनसा को काबू में कर लो
    बालपन चित उर में धर लो
    ऐसा ज्ञान मोबी भइया हमारे देते हैं
    स्वावलंबी हो गर तो जीवन संवारे देते हैं
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 42w

    Kuch bhi ������ jhel lo
    @myownpoetry @mamtapoet @rani_shri @jigna_a @rahat_samrat

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    एक ही शिकायत खुद से
    तुझे फिर मैने याद क्यूँ किया
    तुम तो पहले ही शातिर थे
    नफरत इश्क फिर मैंने बाद क्यूँ किया
    हौसले, मासूमियत काबू में रखते
    तो अच्छा था
    हसरत ए मंजर मैंने आबाद क्यूँ किया
    अशर्फीया भी कोने में बैठ कही रोयी होगी
    कीमत थी ना हमारी, फिर बर्बाद क्यूँ किया
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 42w

    कि तुझको नजर हैं मेरी गजल
    हाँ दरख्त नहीं शजर हैं मेरी गजल
    शायरों का दिल कहाँ होता हैं
    कोको ये घर हैं , मेरी गजल
    झुकता भी हैं तो लफ़्ज़ों अहसासों
    के आगे
    कि ये सर हैं मेरी गजल
    शर्म अदा न करो नजरो को
    यूँ बैचेनी पर डर हैं मेरी गज़ल
    गमजदा भी रहे तो मेरी दुआओं में
    थे तुम
    यानी फरमान ए दर हैं मेरी गजल
    सुबह भी ना हो और चाँद भी ढल जाये
    हैं मुमकिन
    हाय फजर है मेरी गजल
    कि तुझको नजर हैं मेरी गजल
    हाँ दरख्त नहीं शजर हैं मेरी गजल
    शायरों का दिल कहाँ होता हैं
    कोको ये घर हैं , मेरी गजल

    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 42w

    मखदूम तक भी मुकर गए हमारी खिदमत से
    और
    जमाना कहता है लोग खराब हैं
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 42w

    पूछती है दूरी दिल की
    ये सख्त सी जो है , है दीवारें क्या
    दिल तो दिल नजरें भी फिरी हुई
    हैं ये दरारें क्या
    अमूमन दिल तो दे चुके बेशकीमती
    तुम ही बोलो वारे क्या
    क़दर तो घट गई हमारी कोको ""
    जमीर बचा है
    कहो तो इसे भी मारे क्या
    ©lovetowrite990

  • lovetowrite990 43w

    सुनो ना
    चलो किसी दिन को इतवार करते हैं
    हम तुमसे, तुम हम से कह दो प्यार करतें हैं
    ©lovetowrite990