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  • loveneetm 2d

    जीवनसाथी

    बिन बंधन के जगत ना समझे,
    मुझ बैरन की प्रीत,
    हे!गिरधर इस राधा का तू,
    प्राण प्रिय मनमीत।

    माया रूपी इस तन का,
    तुम ही तो हो प्राण,
    जीवनसाथी बना मुरारी,
    चरणो में दो स्थान।

    माँग भरू सिंदूर प्रीत की,
    तुम दो यह वरदान,
    जगत कहें मोहे तेरी राधा,
    गर्वित करके मान।

    बिन बंधन के जगत कन्हाई,
    करे हृदय पर घात,
    हाथ धरो हे!जगत मुरारी,
    मान लो प्रेयसी बात।

    कृष्ण कहे हे!प्राण प्यारी,
    तुम ही जीवनसाथी,
    मेरा जीवन तुम बिन ऐसा,
    जैसे लौ संग बाती।
    @लवनीत

  • loveneetm 3d

    ब्रज गीत

    मेरो राधा रमण बिहारी,
    मेरी श्यामा भानु दुलारी।
    मोहे अपनी शरण लगा लो,
    ओ! राधा रमण बिहारी।

    मै हठ कर बैठी मोहन,
    तोहे छोड़ कही ना जाऊँ,
    तन से निकले जीवन तो,
    फिर लौट जगत ना आऊँ।
    मोहे अपनी शरण लगा लो,
    ओ! राधा रमण बिहारी।

    तू वृंदावन मैं बैठा,
    मैं खोज रही बरसाने,
    तोहे ढूँढ रही है राधा,
    पनिया भरने के बहाने,
    मेरो मन ना लगे मुरारी,
    अब दर्शन नयन करा जा,
    मोहे अपनी शरण लगा लो,
    ओ! केशव कुंज बिहारी।

    तू जाने सब गिरधारी,
    छलिया मोहन बनवारी,
    तुम खूब छिपो मनमोहन,
    तोहे खोजे भक्त मुरारी,
    अब ना खेलो खेल कन्हाई,
    मन मंदिर हृदय समा जा,
    मोहे अपनी शरण लगा लो,
    मेरो राधा रमणीय बिहारी।
    @लवनीत

  • loveneetm 4d

    प्रेरणा

    संत लिखे साधु लिखे,
    लिखे दास कबीर,
    मैं पापी जग क्या लिखूँ,
    विषय बहुत गंभीर।

    मीरा छंद दोहे लिखे,
    लिखे कवि रविदास,
    सूरदास मुक्तक लिखे,
    बिन नयनो के साथ।

    भक्ति रस रसखान लिखे,
    लिखे भट्ट श्रृंगार,
    दास सनातन भाव लिखे,
    रूप लिखे संसार।

    जीव लिखे लीला प्रभु,
    प्रेम लिखे रघुनाथ,
    ऐसी भक्ति जो करे,
    उसके संग गोपीनाथ।

    बिन गिरधर के काव्य नहीं,
    ना रचनात्मक भाव,
    मेरी रचना भीतर भी,
    हरि नाम सुख छाँव।
    @लवनीत

  • loveneetm 4d

    रचना स्रोत

    जिनके कारण कलम चले,
    जिनके कारण मन भाव,
    वो रचना के मूल स्रोत,
    गिरधर नागर सुख छाँव।

    सृजनात्मक हो काव्य तभी,
    जब मन भीतर हो श्याम,
    बिन गोविंद के कलम तो,
    लिख ना पाए नाम।

    अक्षर उपमा अलंकार सब,
    गोविंद पर आश्रित,
    उनकी लीला सुखद सहज,
    जीवन करती शिक्षित।

    प्रेरित करते कर्मो का,
    जगत अधिक सम्मान,
    उसी तरह हर काव्य पर,
    लिखा गोविंद का नाम।
    @लवनीत

  • loveneetm 5d

    वर्तमान

    गीता मे श्री कृष्ण कहे,
    करो कर्म निर्भीक,
    जीवन सफल संभव तभी,
    जब सबक ले मानव सीख।

    वर्तमान में जीवन का,
    सहज करो उपयोग,
    कर्मठ बुद्ध राखियों,
    तब हो सुख संयोग।

    कह गए साधु संत जगत,
    कि करो कर्म सब आज,
    कल पर कुछ ना राखियो,
    कल करे बुद्धि नाश।

    वर्तमान का ध्यान कर,
    भविष्य का कर निर्माण,
    तब ही जग मंजिल मिले,
    मिले जगत सम्मान।
    @लवनीत

  • loveneetm 5d

    शरद उत्सव

    ब्रज केवल तीर्थ नहीं,
    ब्रज है गोविंद धाम,
    वृंदावन की कुंज गली,
    मैं गुंजे राधा नाम।

    चरण रज गोविंद के,
    हृदय रही समाए,
    ब्रज की माटी आज भी,
    गोपी गीत सुनाए।

    जिसको सुन आनंद से,
    कियो कृष्ण ने रास,
    शरद चंद्र की पूर्णिमा,
    अद्भुत दिव्य प्रकाश।

    सुंदर छवि सुंदर प्रसंग,
    सुंदर भाव विचार,
    पुरूष उस घड़ी कृष्ण है,
    सब जन उस क्षण नार।

    उस समय उस भाव का,
    करो हृदय मे ध्यान,
    गोविंद सदा सहाए हो,
    सदा करें कल्याण।
    @लवनीत

  • loveneetm 5d

    भोग

    रूखी सूखी रोटी लेकर,
    चली गुजरिया मंदिर को,
    मन ही सोचे क्या बनवारी,
    मुझ पापन की राह तके।

    मंदिर में तो भरा भंडारा,
    बहुत अन्न है खाने को,
    क्या गिरधारी आए सम्मुख,
    सूखी रोटी खाने को।

    लज्जा वश द्वारे से लौटी,
    दुखी हृदय घर जाने को,
    मुझ निर्धन संग क्या ही ऐसा,
    जो रूकू भोग लगाने को।

    तभी मुरारी दर्शन हेतु,
    प्रकट हुए बताने को,
    कि प्रेम भाव भक्ति से अर्पित,
    सब भाए भोग लगाने को।
    @लवनीत

  • loveneetm 1w

    शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ सभी गुणीजनों को ।

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    महारास

    शरद चंद्र पूनम की बेला,
    अद्भुत दिव्य प्रकाश,
    वृंदावन मे रास रचाने,
    आए दीनानाथ।

    यमुना तट बंशीधर बैठे,
    छेड़े बंसी तान,
    गोप ग्वाल सब मोहित होकर,
    भूल गए सुध ध्यान।

    सभी गोपिका प्रेम भाव से,
    अपना रूप सँवारे,
    यमुना तीरे देख कृष्ण को,
    एकटक रही निहारे।

    सबके संग कान्हा बैठे,
    धरकर रूप अनेको,
    असमंजस मे सभी गोपिका,
    बोले संग गोविंद देखो।

    राधा का ही रूप सभी मे,
    इस कारण बनवारी
    रास रचाए नाचे गाए,
    दिव्य छवि बलिहारी।

    थिरक थिरक कर नाचे राधा,
    नाचे गोपीनाथ,
    वृंदावन मे रास रचाने,
    आए दीनानाथ।
    @लवनीत

  • loveneetm 1w

    मुस्कान

    जब से मन भक्ति बसी,
    तब से बढ़ता ज्ञान,
    मेरे गोविंद माधव मेरे,
    जीवन की मुस्कान।

    उनकी लीला उनकी गाथा,
    सत्य का करे बखान,
    अद्भुत उनकी जीवन लीला,
    अद्भुत उनका ज्ञान।

    राधा माधव गोविंद गिरधर,
    जगतपति भगवान,
    जो ना समझे सत्य यह,
    वह बालक है नादान।

    ना छल ना अपवाद हृदय,
    ना ही मन अज्ञान,
    प्रेम भाव भक्ति हृदय मेरे,
    जीवन की मुस्कान।
    @लवनीत

  • loveneetm 1w

    मेरी बातों को मेरे दिल का इशारा समझो,
    यूँ ही कोई बेवक्त शायरी नही करता।
    ©loveneetm