lafze_aatish

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नि:शब्द शर्मा झोला-छाप

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  • lafze_aatish 23w

    आज़ादी तो मिली मगर कुरूप मानसिकता से आज़ादी कब मिलेगी,

    राजनीती का हमाम है सब नंगे ही मिलेंगे,

    ध्यान से दर्शन कीजिएगा इनके,

    खेर सब को हार्दिक शुबकामनाएं ������������

    @nishabd @vishu

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    रक्तरंजित

    खंडित  हो रहे  रज  कण  तेरे अंग अंग रक्तरंजित  हो रहे,
    आहत शरीर के चिर निस्पंद प्राण पल पल रूदन कर रहे।

    निज संतानै तेरे नयनों से नीर बहाने लगी है,
    गरिमामय इतिहास की अविरल छाया मिटाने लगी है।
    भ्रष्टाचार तुष्टीकरण अनाचार, चारों दिशा छा रहे,
    आहत शरीर के चिर निस्पंद......!

    भ्रष्ट पथ पर अग्रसर नवीन पीढी हो गई,
    घोर तिमिर के किसी कोने में जा के सो गई,
    पर -संस्कृति सरिता  बह रही निज संस्कृति सरोवर सूख रहे!
    आहत शरीर के चिर निस्पंद......!

    न भगतसिंह जैसे लाल रहे ना सुभाष जैसे बलिदानी
    अस्तित्व तेरा बचाने जिन्होंने लिखी रक्तमयी कहानी,
    ऐसे  सुतों के दर्शन को  तेरे निराश नयन तरस रहे!
    आहत शरीर के चिर निस्पंद......!

    ऐ जननी! चुनौति है तेरी सृजनशक्ति को फिर से ऐसे दिए जला दे,
    तेरे चहूं और फैले अंधियारे को जो फिर  से मिटा दें,
    स्वर्णिम काया बने पुनः तेरी कामना देशभक्त हृदय कर रहे!

    आहत शरीर के चिर निस्पंद प्राण पल पल रुदन कर रहे!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 24w

    उजाले रास अब आते नहीं मेहरबानी के,
    अंधेरा करो दोस्तों मुझे गहरी नींद में सोना है!

    ग़म नहीं मुझे सागर ओ मीना खोने का,
    अपने  ही  ख़ून  से  छपा  इशतिहार  होना है!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 24w

    रुक्सत हो मिरी तेरे शहर से जिस रोज़,
    तुम अपनी यादों को मुझ से छीन लेना!




    ©️नि:शब्द

  • lafze_aatish 25w

    वार

    गुज़रे ज़माने की रंजिशू के नाम एक गुलाब रख देना,
    हो सामना जब भी सलीके से पीठ पर वार कर ही देना!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 26w

    नज़रों की तेरी चर्चे इस क़दर मशहूर हुए,
    वरक पर लिखी ग़ज़ल को अख़बार किया मैंने!

    नि:शब्द


    #nishabd #vishu
    @hindiwriters

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    अहद-ए-वफ़ा

    पैमाने से मय-कदा नाप लिया मैंने,
    पर्दे में  पैक-ए-क़ज़ा साध लिया मैंने!

    क़दमों की आहट हुई दिल ए बेताब में,
    अपनी जान पर खुद अज़ाब खड़ा किया मैंने!

    उदू से खौफ केसा हुस्न ओ जमाल को,
    सीने के तोष-खाने में मेहफ़ूज़ किया मैंने!

    नज़रों की तेरी चर्चे इस क़दर मशहूर हुए,
    वरक पर लिखी ग़ज़ल को अख़बार किया मैंने!

    सुनो अहद-ए-वफ़ा आतिश की ज़बान को,
    निशब्द की सांसो पर सख्त पहरा लगा दिया मैंने!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 26w

    पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो-चार,
    ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है!

    #nishabd #vishu
    @hindiwriters

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    मुसाफ़िर

    किराएदार हूँ तेरे शहर का.....इन मौसम से बे-वाकिफ़ नहीं हूँ,
    मुसाफ़िर हूँ तेरी रहगुज़र का इन बेजान दीवारों का कायल
    नहीं हूँ!

    निःशब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 27w

    नीम-शब :- आधी रात
    इशग़म :-मेरा प्यार
    अज़ीज़म :- प्रिय
    फ़िरदौस :- जन्नत

    #nishabd #vishu @drunken_heart भाई जी
    @hindiwriters

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    इशग़म

    नीम-शब का ख़ाब..... ख़ाब मे सिर्फ़ तुम,
    इशग़म अज़ीज़म मेरी फ़िरदौस हो सिर्फ़ तुम!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 27w

    नसीब की मरम्मत मे कितना वक़्त खर्च हुआ,
    इंतज़ार भी और मज़ीद लम्बा हुआ.
    बड़ी हसरतों से देखा करते थे जिस गली को,
    आज वो भी अनजान रास्ता हुआ.

    यूँ तो  बहुत पहले दर्द ए दिल का दरीच सिल दिया था हमने,
    कमबख्त ये वक़्त की आंधियां हल्की सी खरोंच से अंदर आ ही जाती है.

    खतूत सिवा सीने के कहा  छुपाता मैं और,
    पुरानी यादों का महल कहाँ तामीर करता.
    सिवा राख के न था बाकी कुछ बचा,
    आईने मे खुद को कहा देखता मैं और.

    इल्तजा तुम्हारी याद है मुझे अभी भी, भुला देना मुझे, न रोना न आंसू बहाना.
    अश्क़ संभालू कैसे रोको कैसे, इस बिनाई को रास्ता दिखाओ कैसे, मेहरबानी होती अगर ये इल्म भी दिया होता.

    हादसे तो ज़िन्दगी का साथ बा-खूबी निभाते है,
    मैं हादसों से गर मूँह मोड़ता तो ज़िंदा रहता कैसे.

    तेरे नाम की इक कश्ती है दरया ए ग़म मे,
    अब तू ही बता इस पर सवार हूँ तो हूँ कैसे!

    ख़्यालातों की दौलत से नवाज़ा है तूने मुझे,
    एक चेहरा हजूम का इक तन्हाई का दिया है मुझे!

    लिखूँ तुझे कागज़ पर तो कैसे लिखूं.
    दाद मिले मुझे मेरी गज़लो पर,
    बिन तेरे ये जुल्म सहूं तो  सहूं कैसे.

    सुना है  सदाएं,  हूके, बेचैनी, आहें उस  दुनिया तक जाती है,
    शोक ये दर्द लिखने का यूँ ही नहीं पाला है मैंने.

    बिन तेरे माहौल मे घुटन इस क़दर बड़ी है,
    सोचता हूँ अब आंखे बंद कर  लूं अपनी!
    सोचता हूँ अब आंखे बंद करलू अपनी!

    नि:शब्द

    #nishabd #vishu
    @hindiwriters

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    दर्द ए दिल

    हादसे तो ज़िन्दगी का साथ बा-खूबी निभाते है,
    मैं हादसों से गर मूँह मोड़ता तो ज़िंदा रहता कैसे!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 27w

    लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो,
    ऐसे दरया का कभी रुख नहीं मोड़ा करते!



    #nishabd #vishu
    @hindiwriters

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    केह ही देना

    किताब-ए-आरज़ू जब भी खुले मलाल कह ही देना,
    सवाल गर पूछे कोई तो जवाब दे ही देना!

    तस्लीम गर बेरुखी हो अजीज़-ओ-मदनी की,
    पत्थर से नसीब अपना कत्ल कर ही देना!

    रगों मे दोड़ता लहू जब चश्म से बहे कतरा कतरा,
    सुर्ख़ सियाही से खत रक़ीब को लिख ही देना!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish

  • lafze_aatish 27w

    खालिक/khalik = creator

    Baat sirf itni si hai ki husan ki tarif me kya likhe, agr husan ki tarif kar bhi di tho us khalik ( us husan ko banne wala) us ki tarif me kya likhe.

    #nishabd #vishu
    @hindiwriters

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    तारीफ-ए-खालिक

    लब-ओ-लबाब बस इतना सा हैं कि तारीफ-ए-हुस्न क्या लिखें ,
    गर तारीफ-ए-हुस्न लिख भी दे,तो तारीफ-ए-खालिक क्या लिखें!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish