kusumsharma

Kahte hain ki jo aap doge usse kahin guna prakrati vapis karti hai. Instagram= kusu.sharma22

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Reposts
  • kusumsharma 115w

    "चुपके से" कान में हवा कुछ कह गई
    चूड़ियाँ भी खनक गईं पायल भी छनक गई
    कजरा भी शरमा गया गजरा भी महक गया
    शायद तेरे आने का संदेश दे गईं

    ©kusumsharma

  • kusumsharma 115w

    ❤ तेरे सिवा न कोई था न है और न होगा ❤
    ��ये तू जाने या मैं ��


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    इस दिल में मेरा साँवरा किसी और को कैसे आने दूँ
    हर धड़कन में वो ही धड़कता हर साँस में उसका नाम
    किसी और का कैसे लूँ
    हर जनम उसी को चाहा इस जनम में कैसे छोड़ दूँ
    ©kusumsharma

  • kusumsharma 115w

    मैं तो एक बूँद बादलों के संग बरसती रही बस यूँ ही
    तूने अपने में जो मिलाया कब मोती बन गई
    पता ही न चला

    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    अगर आईने में साफ नही दिख रहा तो ये आईने की नही उस पर जमी धूल की गल्ती है हम धूल साफ करते नही और आईने कोदोष दे देते हैं

    इसी तरह हमारे मन पर भी न जाने कबसे स्वार्थ ईर्ष्या लोभ लालच मोह आदि विकारों की धूल जमी हुयी है जिसके कारण हम दूसरों को ज्यादा दोष देते हैं अपने अंदर झांककर नही देखते...


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    अर्से बाद आईना जो साफ किया
    कुछ चटके कुछ टूटे कुछ बिखरे
    तो कुछ खिले खिले से ज़ज्बात दिखे

    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    ये हवा में कैसी महक है
    लगता है
    तेरे दिल में भी प्यार का
    कोई फूल खिला है

    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    लगता है तूने दिल ❤ की अदला बदली कर दी
    तभी तो धड़कनों में तेरा ही नाम सुनाई देता है
    क्या तुझे भी ???
    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    ������

    हमारी आँखों में कोई प्रकाश नही है ये तो सिर्फ़ यंत्र हैं, बाहर प्रकाश है तभी हम देख पाते हैं, चाहे वह सूर्य का हो चाँद का हो या किसी अन्य साधन का हो, अगर ये न हों तो अंधकार ही अंधकार है...

    असली प्रकाश तो वह है जो अंधकार में भी देख सकें, जहाँ बाहरी प्रकाश की जरूरत ही न पड़े, जहाँ स्वतः ही प्रकाश है, और वह तुम्हारा खुद का है, "परमात्मा" का है

    कुसुम..✍


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    प्रकाश में तो हर कोई देख लेता है
    जो अंधकार में भी देख ले तब बात बने
    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    तेरी यादों ने अंगड़ाई ली है
    लगता है तूने कहीं मेरा ज़िक्र छेड़ा है

    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    हमे डर क्यूँ लगता है !!!

    क्योंकि हम इस शरीर को ही खुद को समझ बैठे हैं
    जिस दिन इस बात का अहसास हो जायेगा कि हम इससे अलग हैं उस दिन हर दुख चिंता से मुक्त हो जायेंगे

    लेकिन इसका मतलब ये नही कि शरीर महत्वपूर्ण नही है बहुत महत्व है इसका इसी के द्वारा हम परम सत्य की प्राप्ति कर सकते हैं

    इस शरीर में जितने भी कष्ट आते हैं तो उन कष्टों का अनुभव हम ही करते हैं शरीर नही

    जैसे मकान में टूट फूट होने पर मकान को कोई फर्क नही पड़ता उसमें रहने वाले को पड़ता है और वह उसे ठीक करवाता है

    लेकिन एक समय ऐसा भी आता है जब रहने वाले को भी कोई फर्क नही पड़ता बस वह अपना नियत कर्म करता है...

    ©kusumsharma

  • kusumsharma 116w

    अहं के खेल में
    रिश्ते दाँव पर लग जाते हैं
    जीत किसी की भी हो
    घाव दोनों ओर लगते हैं

    ©kusumsharma