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  • kumarrrmanoj 3d

    आखिरी शेर अधूरा है इस पोस्ट का
    जो आपको पूरा करना है........

    पता तो चले हमे पड़ता कोन कोन है....

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    उम्मीद

    आसमान के चांद तक,
    निंदो के ख्वाब तक,
    चलना है साथ तुमको,
    मेरी आखरी सांस तक,

    मोहब्बत की राहों से,
    क्यू लौटू अब उदास में,
    चांद की ख्वाहिश में,
    क्यों छोङू अपना चांद मै,

    मेरे कांधे पे तू हाथ रख,
    बस मुझसे ही तू बात कर,
    सिन्हे से लग कर बैठ जा,
    मुझे दर्द से आजाद कर,

    लरजरहाट इन होठहो की,
    कैसे भी बस खामोश हो,
    अर्से से है इनकी आरज़ू,
    तुम्ही से इनकी बात हो,

    ले सकू जो सांस फिर से,
    ऐसा कोई तो काम कर,
    तेरे जिस्म की वो खूसबु,
    थोड़ी हवाओ के नाम कर,

    आंखो के शकुन के लिए,
    पल भर तो मेरे पास ठहर,
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 5d

    सूतपुत्र कर्ण

    छल कपट की राहों पर चलकर के तुमने युद्ध किया,
    बैठकर शाये में माधव के दानवीर कर्ण का वध किया,

    महाभारत के अधर्म युद्ध में भी कर्णने धर्म को अपनाया,
    निश्चित मृत्यु थी जान कर भी साथ कौरवों का निभाया,

    शौर्य विरो की गाथाओं में भी,दानवीर के किस्से आम हुए,
    माधव ने छल कर बतलाया,कहा किसी सुत के राम हुए,

    कोक से जन्म लेकर कुंती की,प्यार से उसी के वंचित रहा,
    आखिर में हाथो अपने ही भ्राता के उस वीर का वध हुआ,

    आने पर उस कुंती मां के, फिर भी उसने सीश झुकाया था,
    मांगने पर फिर वचन ,महान कर्ण ने पुत्र धर्म निभाया था,

    दे कर के प्राण खुद अपने,महान योद्धा ने फ़र्ज़ निभाया था ,
    छोड़कर अर्जुन को,कहा किसी भ्राता पर तीर चलाया था??

    अर्जुन ने फिर अनर्थ दोहराकर ,भ्राता पर बाण चलाया था,
    लगते ही फिर बाण कर्ण को,भीम भ्राता भ्राता चिलाया था,

    देकर के आखिर फिर प्राण अपने ही,पुत्र धर्म को बचाया,
    इस तरह उस सूर्यपुत्र ने,कुंती माता का वचन निभाया था।
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 1w

    दिल से लिखा है
    दिल से पढ़िएगा.....

    आप इसे सच में पसंद करेंगे.....
    जो लोग अपने घर से दूर है
    उनके दिल के करीब से होकर गुरेगी हर एक लाइन।

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    बचपन का घर

    जिन्दगी में मेरी वैसे तूफान बहोत हैं,
    जरूरत मुझे बस एक ठहराव की है,
    तेरे शहर में मेरा दिल भी नहीं लगता,
    तमन्ना मुझे बस अब मेरे गांव की है,

    गोदी में सर रखकर शकुन से सोना है,
    फिर से एक रोज सामने मां के रोना हैं,
    खामोशियों को भी समझ लेता था जो,
    आज उसी सख्स से फिर रुबरु होना है,

    गलत करता हूं, मैं कुछ आज भी जब,
    तो याद पिता की मुझे वो डॉट आती हैं,
    होती अगर नहीं है मां वहां सच में मगर,
    मगर सपने में आके मां मुझे गले लगाती हैं

    थककर उस नीम की छाव में सो जाना,
    रोज दोपहर घर के आंगन का हो जाना,
    आते हैं याद बहुत वो पल आज भी मुझे,
    होता था जब घर दोस्तो के आना जाना,

    तोफे में मिलना मीठी संतरे की टॉफियां,
    देकर टॉफियां दोस्तो का खास हो जाना,
    किसी दोस्त के ना मिलने पर वो टाफिया,
    मुंह फुलाकर दोस्तो से नाराज़ हो जाना,

    छोड़ आया था एक रोज जिस घर को,
    उस घर पे फिर से कभी मैं लौटूंगा क्या?
    चूरा लेता था मै जिस बाघ से अमरूद,
    दोस्तो के साथ फिर अमरूद तोड़ूंगा क्या?
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 1w

    शियासात

    कभी मंदिर,कभी मस्जिद,कभी मजारों की बाते,
    क्यों करते हो तुम सियासत में मजहबो की बाते?

    शियास्त में तुमने तो ये आसमान भी बाट रखा है,
    चांद को मुस्लिम, अफताब को हिंदू मान रखा है,

    गंगा जल तो कहीं,आबे ए जम जम का ये पानी
    शियास्तदारो प्यास को भी मजहबी मान रखा है,

    आजादी के लिए जो लड़ गए वो लोग ओर थे,
    ना हिंदू थे ना मुस्लिम थे ना मजहबो की डोर थे,

    आते ही हर चुनाव तुम राम मंदिर बनवा देते हो,
    देखा है मैंने कैसे मजहब में झगड़े करवा देते हो,

    देखा है मैंने तुमने तो,रंगो में अंतर डाल रखा है,
    हरे को मुस्लिम ,संतरी को भगवा मान रखा है।
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 1w

    दिल से लिखा है....
    एक टूटा हुआ आशिक़ जो सोचता है
    वहीं लिखने की कोशिश की है।।।

    मुरझा गया फूल तोड लेे माली,
    भंवरे का इंतजार भी कब तक।

    इसमें फूल आशिक़ है,माली भगवान है,
    और भंवरा बिछडी हुई मोहब्बत।।

    खुद को अफताब मतलब खुद को जलाना

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    मोहब्बत या दर्द.....

    सोचता हूं,
    ख़त्म हो सफ़र जिंदगी का,
    तो शायद शकुन आए मुझे,
    नींद तो आए मुझे अब मगर,
    किसिका ख्वाब न आए मुझे।।

    चांद से यू बाते भी कब तक,
    जागना रातों में भी कब तक,
    दर्द की इंतिहा और कितनी,
    कुरेदना जख्म भी कब तक,

    बाते दरिया की भी कब तक,
    कड़वाहट आसू की कब तक,
    ओर कितना नशा किया जाए,
    बोतले शराब की भी कब तक,

    मोहब्बत के खिलाफ कब तक,
    खुद को अफताब भी कब तक,
    मुरझा गया फूल तोड लेे माली,
    भंवरे का इंतजार भी कब तक,

    सियाह काली रात भी कब तक,
    चांद से अब मुलाक़ात कब तक,
    रोशनी ठीक है चरागो की मगर,
    उगते सूरज का ख्वाब कब तक,

    उजड़ी सी स्याही,बिखरे हुए घर,
    ख़त्म जिंदगी से बिछड़ने का डर,
    मिलन हो आत्मा का परमात्मा से,
    अब तो खत्म हो जिंदगी का सफर,

  • kumarrrmanoj 2w

    इस तरह से भी कोई जगह वीरान हो सकती हैं,
    तेरे जाने के बाद आज गली मैं तेरी जाकर जाना।।
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 2w

    पहली बार राजनीति पे कुछ लिखने की कोशिश की है
    आप समझने की कोशिश कीजिए.....

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    राजनीति....

    आप तो सिर्फ जुर्म कीजिए साहब,
    सहने का काम हम पे छोड़ दीजिए,
    हिस्सा शरीर का कोई बच ना पाए,
    लेकिन जरा ये भी ध्यान रहे साहब,
    पहली उंगली पे खरोच भी ना आए,
    चुनावों का दौर अगर कभी आएगा,
    निशान उंगली का ही देखा जाएगा,


    मिटा के हस्ती हमारी,
    जला के बस्ती हमारी,
    आने पर चुनाव तुम ही,
    फिर बहुत मासूम बनो,
    गर पूछे जो सवाल कोई,
    फिर उसको क्तल करो,

    सोचता हूं...
    धीर जब इंसान का टूटेगा तो,
    फिर क्या होगा?
    सवाल कोई मासूम पूछेगा तो,
    फिर क्या होगा?
    अक्सर बदलते रहते हो,
    रंग जैसे तुम,
    आम इंसान भी बदलेगा रंग तो,
    फिर क्या होगा?
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 2w

    मोहब्बत

    सख्स जो मोहब्बत का मारा है,
    वो दरिया का ही तो किनारा है,
    मिलता है जो लहरों से हर रोज,
    मगर जानता है बिछड़ जाना है।।।
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 3w

    हर रोज रुबरु तुम्हारा मिलना जरूरी भी नहीं,
    ख्वाब की मुलाक़ात भी तो मुलाक़ात होती हैं
    ©kumarrrmanoj

  • kumarrrmanoj 3w

    शामिल कोई तो मेरी तन्हाइयों में है,
    मुस्कुराहटे ये मेरी बेनाम तो नहीं।।।
    ©kumarrrmanoj