Grid View
List View
Reposts
  • kumar_manoj 3d

    Plz consider it on a lighter note

    P.C:Google images

    Read More

    ना चूडियों की खन-खन, ना पायल की झंकार,
    आखिर शायर करे किसपे शायरी,
    मिर्ज़ा ग़ालिब भी बैठें हैं होकर उदास ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 1w

    Collaboration with @radhika_1234569

    Read More

    -

  • kumar_manoj 1w

    कुछ बेवजह सवाल

    कुछ था दरमियाँ , जो शायद अब नही,
    अब नही, तो क्या गम है उस बात का ?
    अगर हाँ, तो वो साथ क्यों नही,
    अगर ना, तो आखिर गम क्यूँ ?

    क्या यूँही रहेगी ज़िन्दगी हमेशा ?
    अगर हाँ, तो क्या ठीक है ?
    अगर ना, तो क्या बदलेगा आखिर ?

    इन सवालों के कुछ जवाब हैं?
    अगर हाँ, तो कौन देगा ?
    अगर ना, तो कैसे मिलेगा ?

    क्या इस पहेली का कोई अंत है ?
    अगर हाँ, तो क्या ?
    अगर ना, तो क्यूँ ?
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 2w

    थोड़ा काम करता है, थोड़ा आराम करता है,
    वो तो आशिक़ है सच्चा,
    छिप-छिप कर, थोड़ा-थोड़ा प्यार करता है ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 2w

    पूरी रात लिखा तुझे, पन्ना अभी भी कोरा है,
    ईश्क़ इतना आसान कहाँ, इसे तो रहना आधा-अधूरा है ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 3w

    हो गई है आदत तुम्हारी, अब कैसे छोड़ दूँ,
    हुई हो मुक्कम्मल, मेरे ख्वाब से,
    आखिर ख्वाब, भला अब कैसे तोड़ दूँ ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 3w

    हर रोज सुबह से शाम होता है,
    तेरी यादों से, पर कहाँ आराम होता है ।
    क्या लिखूँ, किसको लिखूँ, कुछ समझ नही आता,
    ये कुछ ऐसे ज़ख्म है,
    मरहम जिसका, नही आम होता है ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 4w

    कुछ लफ्ज़, क्या बयाँ करेंगे उसके प्यार को,
    जो कर चुका है, अपना हर सुबह-शाम, उसी के नाम को ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 5w

    कितना छिपाओगे, की इश्क़ कहाँ छिपता है,
    इकरार कर नही पाओगे, पर आंखों में सब दिखता है ।
    ©kumar_manoj

  • kumar_manoj 6w

    लोग मोहब्बत में समय ना मिलने पर नाराज़ खड़े हैं,
    खुद किसी का समय बन जाए, क्या ये मोहब्बत से कम है ।
    ©kumar_manoj