krishnakatyayan

बहती हवा सा हूं मै

Grid View
List View
  • krishnakatyayan 49w

    तुम रोते हो,
    धन नही मिला,
    सौंदर्य नही मिला,
    विद्या नही मिली,
    पर ये क्यों नही सोचते,
    ये सब नश्वर है,
    तुम्हे तुम नही मिले,
    जो ईश्वर है।


    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 51w

    दुखी सब है,
    तो क्या हम प्रेम का मार्ग ही छोड़ दे?
    धधकते मनो आग मे,
    कोमल हृदय को जलता छोड़ दे?
    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 52w

    Hell Or heaven

    There is a hell, 
    There is a heaven, 
    Both down there in our mind, 
    They are always in there parallel,
    It's hell, 
    Tortures with regrets of all bad deeds, 
    Makes dive into hot hell fire and unrest, 
    And, 
    It's heaven, 
    Makes happy and proud with all of great works have been done, 

    Makes dive into cold peaceful ocean. 



    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 71w

    आपने लिखना बंद कर दिया,
    ये सोचकर की कोई वाह वाही नहीं मिलता,
    कोई ध्यान नहीं देता,
    पर ये क्यों भुल गए,
    क्या पता आपके शब्द किसी को छू गए हो,
    वो अपने जीवन में प्रकाश पा गया हो,
    वो जीने के तरीके पा गया हो।

    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 72w

    If you are not proud of someone,
    If you don't like,
    Don't love someone,
    I say,
    Leave the person alone,
    Let that person live the life,
    Don't feel ashamed of being with,
    Believe,
    That person is the product of same factory,
    You produced in.

    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 72w

    रास्ते में चार ठोकर क्या लगे,
    मंजिल ही बदल दोगे।
    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 72w

    खुद के घर का ईंट लगा नहीं पाता,
    दूसरों के घर में हजार नुख़्श निकालता हूं।

    मै नादान,
    कितना अपने पर इतराता हूं।

    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 73w

    चार क़दम तुम चलो,
    चार क़दम हम,
    चार बातें करेंगे प्यार के,
    भूल जायेंगे सारे गम,
    तेरे हाथो में हाथ क्या दिया,
    निकल पड़े हम,
    प्यार के रास्ते पर,
    भूलकर सारे गम,
    चार क़दम तुम चलो,
    चार क़दम हम।

    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 73w

    तेरा मिलना यू ही नहीं था,
    कुछ तुम्हारी मर्जी थी,
    कुछ हमारी भी,
    जाने अंजाने में,
    बने तो हम एक दूसरे के लिए ही थे।
    ©krishnakatyayan

  • krishnakatyayan 73w

    Over commitments become pain,
    I don't want to tie with them.
    ©krishnakatyayan