krati_sangeet_mandloi

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  • krati_sangeet_mandloi 17h

    मुस्तैद - किसी कार्य के लिए पूर्ण रूप से तत्पर
    तफ़रीक़ - अंतर, भिन्नता
    क़नाअत - संतोष, संतुष्टि
    _________________________________

    #krati_mandloi #Repost #yourquote
    #19th april_2021 #Hindinama @hindiwriters @hindinama

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    अमीर और गरीब

    दुनिया अमीरी-गरीबी को तराजू में तोल रही है,
    हैसियत के मुताबिक इंसान को मोल रही है।

    ज़माने में इंसानियत भी इसकी पाबंद में कैद है,
    दौलत के आगे चला ईमान होने को मुस्तैद है।

    सभी की रगो में लाल, रंग का लहू बहता है,
    इंसाँ में क्यों फ़िर तफ़रीक़ का नज़रिया रहता है।

    अमीर का हर ऐब भी, ज़माने को हुनर लगता है,
    गरीब का सच तो, लोगो को बेहद अखरता है।

    अमीर भरी झोली में, ज्यादा की चाह रखता है,
    गरीब कम में भी, क़ना'अत का मज़ा चखता है।

    ख़ुदा तो फ़क़त, नीयत और ज़मीर से तोलता है,
    इंसाँ अमीरी-गरीबी के फेर में ताउम्र डोलता है।

    चादर ओढ़ी जो भी, खाँक तो उसको होना है,
    फ़िर दोनों के बीच में, फ़र्क को क्यों बोना है।

    अमीर और गरीब को, मत कर खुद पर संवार,
    नेकी की आली शान में, ए बंदे जात निखार।

    हक़ीक़त में वही अमीर, ज़िंदा जिसका ज़मीर है,
    वही गरीब है, जो अपने किरदार से बे-ज़मीर है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (18-04-2021)✍️ (19-04-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 3w

    होली गीत

    आया होली का त्यौहार,
    छाया हर्ष उल्लास अपार,
    बरसी रंगो की बौछार,
    आओ, आओ रे.....
    सारे मिलजुलकर,
    प्रेम बढ़ाओ रे.....

    आओ बैर, द्वेष मिटाओ,
    आओ समता भाव जगाओ,
    भाई चारे का होगा प्रसार,
    एकता ही संस्कृति का सार,
    रंगो से रंगेगा ये संसार,
    आओ, आओ रे.............बढ़ाओ रे।।१।।

    आओ मंगल गीत गाओ,
    आओ भक्ति में रम जाओ,
    ईश को कर दो सब अर्पण,
    जगेगा तब मन का दर्पण,
    रक्षा में है उसका कर्पण,
    आओ, आओ रे..............बढ़ाओ रे।।२।।

    प्रकृति ने उपहार है पाया,
    पावन शुभ दिन है ये आया,
    हो जग में भारत उल्लेख,
    बदल दे हम भाग्य के लेख,
    ऐसे एक बने हम नेक,
    आओ, आओ रे...............बढ़ाओ रे।।३।।

    आया होली का त्यौहार,
    छाया हर्ष उल्लास अपार,
    बरसी रंगो की बौछार,
    आओ, आओ रे.....
    सारे मिलजुलकर,
    प्रेम बढ़ाओ रे.....

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (29-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 4w

    ना कर

    इंसाँ अपने ग़मो का हिसाब ना कर।
    खुदा की रहमतों को नजरअंदाज ना कर।

    एक नज़र ड़ाल खुद को आईना दिखा,
    किसी की गलतियों को बेनकाब ना कर।

    कोशिशों को मुक़म्मल होता देख आज में,
    मनमुताबिक सही वक़्त का इंतज़ार ना कर।

    काँटे बिछा कर राहों में किसी की,
    अपने लिए गुलों की फ़रियाद ना कर।

    नीयत से परख किरदार की शख़्सियत को,
    फ़क़त खूबसूरती पर तू ऐतबार ना कर।

    जिस्म -ए- खाक़ी की चादर को ओढ़कर,
    ग़रूर में ज़िंदगी को बेकार ना कर।

    खुद के अंदर ही मिलेगा खुदा तुझको,
    उसे मंदिरो, मस्जिदो में तलाश ना कर।

    करने दे असर एहसासों को गहराईयों तक,
    ग़ज़ल में नियमों की बात ना कर।

    ©Krati_sangeet_mandloi
    (23-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 4w

    कविता

    कविता पर मेरी कविता

    प्रकृति ही कविता है,
    वास्तविकता की प्रदर्शक ही कविता है,
    आनंददायिनी ही कविता है,
    विचारों की पराकाष्ठा ही कविता है,
    भावनाओं की अभिव्यक्ति ही कविता है,
    चरित्र का चित्रण ही कविता है,
    शब्दों का सामर्थ्य ही कविता है,
    भाषा की शिष्टता ही कविता है,
    लेखनी की नींव ही कविता है,
    लेखक की अतिशयोक्ति ही कविता है,
    आत्मज्ञान ही कविता है,
    हृदय की पवित्रता ही कविता है,
    सत्य ही कविता है,
    सृजन की आवाज़ ही कविता है,
    सूक्ष्मता की परिचायक ही कविता है,
    परब्रह्म की भक्ति ही कविता है,
    ईश्वर की कृति ही कविता है ।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (8-02-2018)✍️ (22-03-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 4w

    सरा-ए-फ़ानी ~ नश्वर दुनिया
    बेदार ~ जाग्रत

    #krati_mandloi #18thmarch_2021 #Hindinama @hindinama @hindiwriters

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    नजऱ में मिरी तू बहार-ए-करम है,
    करूँ जितना नाज़ उतना ही कम है।

    सफ़र-ए-ज़िंदगी की अंजान राहों में,
    हर कदम पर तू मिरा सनम है।

    दुनिया की अजब सरा-ए-फ़ानी देख,
    तू ही हक़ीक़त, सब कुछ भरम है।

    तिरे होने से फ़क़त वजूद है मिरा,
    तिरे बिना मौला सब कुछ खतम है।

    ना लगेगा दाग कभी मिरी नियत पर,
    दिल-ओ-जाँ को मिरी तिरी कसम है।

    क़ामिल हो जाए इबादत तुझे पाकर,
    बेदार रूह से सज़दा मिरा धरम है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (18-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 5w

    कविता से विश्व परिवर्तन


    निःसंदेह कविता विश्व परिवर्तन नहीं कर सकती, लेकिन....
    मनुष्य के दृष्टिकोण को नई विचारधारा दे सकती है।
    हृदय के दर्पण पर जमी धूल को हटा सकती है।
    हृदय के मार्मिक स्थान को स्पर्श कर,
    हृदय परिवर्तन कर सकती है।
    मनुष्य की चेतना को आलौकिक कर,
    यथार्थ से अवगत करा सकती है।
    प्रत्येक क्षेत्र की निश्चित धारा में,
    कटाक्ष सत्य को प्रमाणित कर सकती है।
    मनुष्य को उसकी मनुष्यता का भान करा सकती है।
    प्रेम, करुणा, सुख, दुःख, क्रोध, घृणा,
    सभी की सरलतापूर्वक अभिव्यक्ति कर,
    उनमें उपयुक्त संबंध स्थिर कर सकती है।
    ईश्वर और भक्ति का सर्वोत्कृष्ट रूप प्रदर्शित कर सकती है।
    व्यक्ति विशेष का चरित्र-चित्रण सुगमता से कर सकती है।
    मनुष्य और प्रकृति के मध्य संतुलन स्थापित कर सकती है।
    समाज में फैली कुरीतियों की जड़ों पर प्रकाश डाल, समाज को एक नया आईना दिखा सकती है।
    कविता का मूलभूत उद्देश्य परिवर्तन है,
    जो विश्व को पारदर्शिता दिखा कर,
    एक सुंदर विश्व निर्माण में सहायक अवश्य हो सकती है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (30-03-2018)✍️ (16-03-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 5w

    अनभिज्ञ - अनजान
    अनपेक्षित - अचानक
    औचित्य - उचित होने की अवस्था या भाव

    #krati_mandloi #10thmarch_2018 #5thfeb_2021

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    जिज्ञासा

    जिज्ञासा मानव प्रकृति की प्राथमिक नींव है,
    जिसके मूलतत्व के हर कोई समक्ष नहीं है।

    विचारों की यात्रा में अनवरत प्रयासों के बाद भी,
    कभी यह अपने लक्ष्य की दिशा में पूर्ण नहीं है।

    जीवन के प्रत्येक पड़ाव में बनती सहभागी है,
    जिसकी नित्य-निरंतरता का कोई छोर नहीं है।

    अंतश्चेतना के किसी कोने में यह अनपेक्षित है,
    जिसका परिप्रेक्ष्य दृष्टा के लिए समान नहीं है।

    कहीं जन्म से मृत्यु तक नाम मात्र में सीमित है,
    कहीं अवधारणाओं में ही यह प्रमाणित नहीं है।

    जो वास्तव में मानव के अंतः अर्थ से जुड़ी है,
    उसकी अपूर्णता में मनुष्य का सुखत्व नहीं है।

    एकमेव ब्रह्मजिज्ञासा से प्राप्त निर्विचारिता में,
    विभिन्न जिज्ञासाओं का कोई औचित्य नहीं है।

    जो यह प्राप्त हो जाए मानव "स्व" के अर्थ को,
    वहाँ किसी भी प्रश्न का होना सम्भव नहीं है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (10-03-2018)✍️ (13-03-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 6w

    नारी

    प्रकृति का अनुपम पर्याय है तू नारी,
    सहनशीलता और उदारता की मूरत है तू न्यारी।

    प्रेम,समर्पण और त्याग की परिभाषा है तू नारी,
    ममत्व का अमृत्व बरसाती, धारा है तू प्यारी।

    शक्ति और साहस का अद्वितीय स्त्रोत है तू नारी,
    अन्याय के विरोध में बनती है तू प्रचंड चिंगारी।

    सुंदरता की सुंदरतम अभिव्यक्ति है तू नारी,
    अभिभूत मन से तेरे खिल-खिल जाए फुलवारी।

    मर्यादा रूपी गहने का गौरव है तू नारी,
    पावनता की सुगंध से वर्णित है तू चित्रकारी।

    सृष्टि की पालनहार और संरक्षक है तू नारी,
    हृदय लगाती सभी को महिमा तेरी है परोपकारी।

    हर युग में मानव की उद्धारक है तू नारी,
    सुदृढ़ और बलिष्ठ समाज की है तू अधिकारी।

    परमात्मा का सर्वोत्कृष्ट सृजन है तू नारी,
    देवता भी शीश झुकाते तेरी दिव्यता है विस्मयकारी।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (8-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 6w

    शरणदायिनी माँ

    हे, शरणदायिनी माँ धरती!!
    नमन तुझको बारम्बार है,
    जीवन दाता,अनुपम माता,
    शरण में तेरे यह संसार है,
    पीड़ा हरती तू सभी की,
    तेरे अनंत उपकार है।।

    हे, जगतजननी भूदेवी!!
    पंच तत्वों में तेरा सार है,
    ममता की न्यारी मूरत तू,
    बहाती प्रेम की धार है,
    सृजनकारी शक्ति में तेरी,
    विशालकाय विस्तार है।।

    हे अन्नदा, माँ अन्नपूर्णा!!
    तू सृष्टि की पालनहार है,
    तेरे आँचल की छांव में,
    शांत क्षुधा का द्वार है,
    कोख में तेरे प्राण बसे,
    जग की खेवनहार है।।

    हे रत्नगर्भा, माँ वसुंधरा!!
    तुझमें रत्नों का भंडार है,
    तेरे तेजस्वी सौंदर्य से,
    फैली चैतन्य बौछार है,
    मनमोहक हरित छटा ने,
    किया दिव्य शृंगार है।।

    हे क्षमात्मिका, माँ धरा!!
    उदारता की तू अवतार है,
    सहती भार सभी का तू,
    क्षमा की शक्ति अपार है,
    "प्रारम्भ" से "अंत" तक,
    किया सर्वस्व उद्धार है।।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (7-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 7w

    इसी मकाँ में

    इसी मकाँ में कभी आशियाना मेरा था,
    यादों की कैद में गुजरा ज़माना मेरा था।

    ख़ुशआमदीद था हर कोना मकीं को देख,
    अपनेपन से लगा रंग मस्ताना मेरा था।

    वो बेफ़िक्र बचपन की हँसी में सिमटा,
    चंद लमहातो का एक अफ़साना मेरा था।

    तज़ुर्बे के सामने तब उम्र बहुत छोटी थी,
    वाकिफ़ हुए दर्द का ठिकाना मेरा था।

    बढ़ चले थे कदम अलविदा कहने को,
    छलकने आया सब्र का पैमाना मेरा था।

    ख़ामोश हो गई दीवारें भरी महफ़िल में,
    वक़्त के सामने ताल्लुक़ बेगाना मेरा था।

    ज़ेहन-ओ-दिल में जो बसा है अब तलक,
    उन्स में जिसके दिल दीवाना मेरा था।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (28-02-2021)✍️