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  • kpardeep 31w

    पापा

    आंख खुली तो अपने आप को आपकी गोद में पाया मैंने, चलते चलते गिरा जमीन पे कई बार तो उठाया आपने, मैं यूहीं बड़ा नहीं हो गया 'पापा' जिन्दगी का हर फलसफा 'प्रदीप' को पढ़ाया आपने..


    ©kpardeep

  • kpardeep 34w

    Saah (सांस)

    हुन जिन्दगी दा रिहा ना कोई बसा, पता नहीं केहड़ी कड़ी मुक जाना साह,ना जाने रब ने केहडा चक्कर चलाता, चंगे पले बंदे नू पढ़ने पाता.

    किने माड़े हालात हो गए, कई बेसहारा ते कई अनाथ हो गए, हे मेरे मालका दे दे सबना नू सुख दा साह, हुन जिन्दगी दा रिहा ना कोई बसा पता नहीं केहड़ी कड़ी मुक जाना साह.

    रिश्ते सी जो खून दे ओह वी अपनिया नू छड़ के पज्ज गए, जीहना ने खवाया सी ओहना नू रज के, गंगा किनारे पैइया लाशा दा ढेर वेख के हो गया मेरा मन स्वाह पता नहीं केहड़ी कड़ी मुक जाना साह.

    दुनियां विच राज कोरोना दा हो गया, जवान पुत्त मावां दा मौत दी नींदे सो गया, पता नहीं 'प्रदीप' बंदे तो केहड़ा हो गया गुनाह समझ ना लगे मैनू केहडी कड़ी मुक जाना साह, हुन जिन्दगी दा रिहा ना कोई बसा.

    Hoon jindgi da riha na koi vasa,
    Pta nhi kehdi kadi muk jana saah,
    Na jane rabb ne kehda chakker chalata
    Change pale bande nu padne paa ta.

    Kine maade halaat ho gaye,kai besahara te kai aanath to gaye, hey mere malka de de sabna nu sukh da saah,hoon jindgi da riha na koi vasa,pta nhi.......

    Rishte si jo khoon de o v apnea nu chhad k paj gaye jihna ne khawaiya c ohna nu rajj k,Ganga kinare paian lashan da ter vekh k ho gaya mera mann sawah pta nhi kehdi kadi.....

    Duniya vich raj corona da ho gaya jawan putt maawa da mout di neende so gaya,pta nhi 'pardeep' bande to kehda ho gaya gunah samjh na lagge mainu kehdi kadi muk jana saah hoon jindgi da riha na koi vasa.


    ©kpardeep

  • kpardeep 37w

    मां

    मां तेरी कमी का आज एहसास हुआ,दिल में दर्द हद से ज्यादा हुआ, आँख से आंसू अपने आप बहने लगे, कितना करता हूं तुझे याद कहने लगे मां तेरी कमी का आज एहसास हुआ...!

    ©kpardeep

  • kpardeep 38w

    मज़दूर

    चाहे गर्मी हो या सर्दी, चाहे बारिश हो या आंधी,
    हर मौसम से मैं दूर हूं, मुझे गर्व है अपने आप पे,
    हां मैं मज़दूर हूं।

    अपना शरीर तोड़ के मिट्टी में मिल जाता हूं
    दिन रात मेहनत करके हक की रोटी खाता हूं,
    रहता हूं बेशक टूटी सी झोंपड़ी मैं,
    पर दूसरों के लिए महल बनाता हूं,। मुझे गर्व है अपने आप पे, हां मैं मज़दूर हूं।

    अपने खून पसीने से सींच कर
    इस धरती की प्यास बुझाता हूं,
    अपनी मेहनत के दम पे इस पर अन्न उगता हूं,
    खुद भूखा रह के,दूसरों की भूख मिटाता हूं,
    मुझे गर्व है अपने आप पे, हां मैं मज़दूर हूं।







    ©kpardeep

  • kpardeep 46w

    Beti

    Meri beti Kabhi papa ki pari,kabhi papa ki rajkumari bann jati hai,nakhre hazzar karke mujhe satati hai karta hoon jab gussa love you papa kehke mere gale se lipat jati hai.

    ©kpardeep

  • kpardeep 47w

    Shikayatain

    Shikayatain to bahut hongi tumhari mujhse, koshish karunga bhool se bhi Dil Na dukhaun tera,Yun toh ajnabi the tum 'pardeep' k liye, shukriya tera mere humsafar sath jindgi bitane k liye.

    ©kpardeep

  • kpardeep 47w

    यादों ने तेरी

    यादों ने तेरी मुझे क्या से क्या बना दिया,एक हाथ में तस्वीर तेरी, दुसरे हाथ में जाम पकड़ा दिया, यूं तो मैं पीने का आदी ना था,कमबख्त सीधे-साधे 'प्रदीप' को तुने शराबी बना दिया.
    ©kpardeep

  • kpardeep 48w

    Thak gaya hu (थक गया हूं)

    आज थक गया हूं मां, तुम्हारी गोद मे सिर रखकर सोने को दिल चाहता है,
    बहुत भूख लगी है मां, तुम्हारे हाथों से रोटी खाने को दिल चाहता है,
    बहुत दिन हुए तुमसे बात किए हुए मां, आज तुमसे बात करने को दिल चाहता है,
    बहुत दिन हुए तुम्हे तंग किए हुए मां, आज फिर तुमसे थपड़ खाने को दिल चाहता है,
    आज 'प्रदीप' बहुत थक गया है मां, तुम्हारी गोद में सिर रखकर सोने को दिल चाहता है।

    Aaj thak gaya hu maa tumhari god main sar rakhke sone ko dil chahta hai,

  • kpardeep 48w

    Thak gaya hu

    Aaj thak gaya hu maa tumhari god main sar rakhke sone ko dil chahta hai,

    bahut bhookh lagi hai maa tumhare hathon se roti khane ko dil chahta hai,

    bahut din ho gaye tumse baat kiye huye maa aaj tumse baat karne ko dil chahta hai,

    bahut din huye hain maa tumhe tang kiye huye aaj fir tumse thapad khane ko dil chahta hai,

    Aaj 'Pardeep'bahut thak gaya hai maa tumhari god main sar rakhke sone ko dil chahta hai.

    …....….............….........................................................

    थक गया हूं

  • kpardeep 48w

    अर्थी

    सो रहे थे तुम अर्थी पे अपनी,
    आख़िरी सफ़र पे जाने के लिए,
    हो रही थी तेयारी तुम्हें ले जाने के लिए

    सबके लिए घड़ी थी दुःख की तुम्हें विदा करने के लिए,
    रो रहे थे सब लेकिन तुम खामोश थे,कई होश में तो कई बेहोश थे,सो रहे थे तुम अर्थी पे अपनी आखिरी सफर पे जाने के लिए….

    सबने तुम्हें बार बार हिलाया नींद से जगाने के लिए, लेकिन तुम ना जगे जगाने से आख़िर छोड़ ही गए हमें रोने के लिए, वक्त आ ही गया सामने लकड़ियों कि चिता सजी थी तुम्हें जलाने के लिए, सो रहे थे तुम अर्थी पे अपनी आखिरी सफर पे जाने के लिए..

    जल रही थी चिता तुम्हारी ' प्रदीप' जलता हुआ तुम्हें देखता रहा, कुछ ना कर सका यह तो कुदरत का खेल था, कुछ पल में तुम राख का ढेर थे, सो रहे थे तुम अर्थी पे अपनी आखिरी सफर पे जाने के लिए।