Grid View
List View
Reposts
  • khayal_e_dil 7w

    वज़्न-2212 2212 2212

    Read More

    तेरे लबों पर रख अचानक लब कभी,
    यूँ भी करेंगे चुप तुम्हें इक बार हम !!
    ❤❤

    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 7w

    साथ भी चाहिए उसे ,पर दूर भी रहना है ,
    यानी नदी में रहकर भी उसे प्यासा रहना है !!
    ❤❤
    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 10w

    2122 2122 2122 2122

    Read More

    शांत रहना ही मुझे सबसे सरल लगने लगा है,
    मौन शब्दों से ज़ियादा जो असर करने लगा है !!
    ❤❤
    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 16w

    किया मन हाथ थामा ....ठीक है फिर भी,
    भरा जब मन छुड़ाया ....ठीक है फिर भी !!

    किसी इंसान के बिल्कुल न होने से,
    उसी का साथ होना ....ठीक है फिर भी !!

    कभी मत छोड़ना तुम बोलना हम से,
    झगड़ लेना तुम्हारा ....ठीक है फिर भी !!

    नहीं था कोई सीने से लगाने को,
    गले ख़ुद को लगाया ....ठीक है फिर भी !!

    ज़बाँ इज़हार कर पाए न तब कर दो,
    नज़र से ही इशारा ....ठीक है फिर भी !!

    बड़ा ही शोर करती है ये ख़ामोशी,
    हमारा कहते रहना ....ठीक है फिर भी !!

    मिरे अश्कों की मंज़िल थी तिरा दामन,
    तू ने दामन छुड़ाया ....ठीक है फिर भी !!

    तुम्हीं ने हक़ दिया था हक़ जमाने का,
    तुम्हीं ने हमसे छीना ....ठीक है फिर भी !!

    किताब अपनी थमा दी ज़िंदगी की पर,
    हमें वो पढ़ न पाया ....ठीक है फिर भी !!

    बहुत रिश्ते निभाए हैं ज़बरदस्ती,
    किसी ने क्यूँ भी पूछा ?? ठीक है फिर भी !!

    निगाहों की चमक थे हम कभी जिसकी,
    नज़र है अब चुराता ...ठीक है फिर भी !!
    ❤❤

    वज़्न-1222 1222 1222
    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 30w

    सोचती हूँ भुला दूँगी तुझको,पर....
    तेरी तस्वीर देखकर भूलना भूल जाती हूँ !!

    ❤❤
    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 30w

    Miss u ❤ माँ ❤

    Read More

    ©khayal_e_dil
    ❤❤

  • khayal_e_dil 30w

    [अज़ाब=दुखदाई वस्तु/वेदना]

    Read More

    ये जो ज़िन्दगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है,
    कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब है!

    कहीं छाँव है कहीं धूप है कहीं और ही कोई रूप है,
    कई चेहरे इस में छुपे हुए इक अजीब सी ये नक़ाब है!
     
    कहीं खो दिया कहीं पा लिया कहीं रो लिया कहीं गा लिया,
    कहीं छीन लेती है हर ख़ुशी कहीं मेहरबान बेहिसाब है!
     
    कहीं आँसुओं की है दास्ताँ कहीं मुस्कुराहटों का बयाँ,
    कहीं बर्क़तों की है बारिशें कहीं तिश्नगी बेहिसाब है!

    ~~राजेश रेड्डी

  • khayal_e_dil 31w

    वज़्न-1222 1222 1222 1222

    Read More

    सताती है बहुत जानाँ मुझे ख़ामोशियाँ तेरी ,
    न ही जीने न मरने दे रही ये दूरियाँ तेरी !!

    न तेरे पास आऊँगी न चश्म-ए-नम करूँगी अब,
    मैं पत्थर हो गई हूँ देखकर रुस्वाईयाँ तेरी !!
    ❤❤
    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 31w

    जिस्म की ज़रूरत एहसासों से ज़्यादा हो गई है,
    अब लोग महसूस दिल से नहीं, छू कर करते हैं !!
    ❤❤
    ©khayal_e_dil

  • khayal_e_dil 32w

    उसने जब छोड़ जाने की बात रख दी,
    हमने भी हाथ की पकड़ ढीली कर दी !!

    जब बिछड़ने की घड़ी उससे आई तो,
    प्यारी सी अपने लबों पर हंसी रख दी !

    आँखें नम जो है ये छलक न जाऐ कहीं,
    इन पर उसके नाम की मैंने कसम रख दी !!

    उसे जाते हुए देखना ऐसा लगा मानो,
    ज़िंदगी मुझ से रूठ कर दूर कहीं चल दी !!

    उसका वो पलटकर देखना आख़री बार
    बस वही मैंने अपने जीने की वजह कर दी !!

    उसकी यादों को ऐसे रखा है संजोकर ,
    कि पन्नों पर उसके नाम की ग़ज़लें भर दी !!
    ❤❤
    ©khayal_e_dil