keshav_00

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  • keshav_00 63w

    कट्टरवाद

    मजहब के नाम पर यहां सर उतारने वाले,
    इंसान ही नहीं हैं, ये खुदा को मानने वाले।

    बचा लेंगे कातिलों को मजहब की आड़ में,
    क्योंकि ख़ामोश है लोग सच्चाई जानने वाले।

    मोहरे बन कर कुर्बान हों रहे हैं कुछ नौजवान,
    असली खिलाड़ी कोई ओर हैं यहां मारने वाले।

    कट्टर बन कर खुदा के करीब होना चाहते हैं ये,
    रब का दिल क्या जीतेंगे, इंसानियत हारने वाले।

    ज़िम्मेदारी हैं जिनकी, सोच में बदलाव लाने की,
    खुद सोने का नाटक कर रहे हैं, लोग जागने वाले।

    कट्टरता की जंजीरें इतनी मोटी हैं मजहब में "केशव",
    कुछ कदम रुक रुक कर चल रहे हैं यहां भागने वाले।

    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 80w

    रिश्ते

    रिश्तो को हैसियत की तराजू पर तोलते हैं।
    कुछ से मुँह फैरते हैं और कुछ से बोलते हैं।
    जमाना अब सिर्फ पैसो का रह गया है यारों,
    कहाँ अब लोग सबके लिए दिल खोलते हैं।
    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 82w

    तेरी मेरी जोड़ी

    तेरी मेरी जोड़ी, शायर और गजल सी हैं।
    कोरा कागज़ हूं मैं ,तू चलती कलम सी हैं ।
    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 82w

    जरूरी हैं

    गिरते गिरते भी चलना जरूरी हैं।
    हर क़दम पर संभलना जरूरी हैं।
    माना एक गहरा दरिया हैं ज़िन्दगी,
    मगर हर हाल में गुजरना जरूरी हैं।

    नम आंखों से भी हंसना जरूरी हैं।
    मुसीबतों में रोज फंसना जरूरी हैं।
    यहां दुनियां में कोई ना देगा खैरात,
    हक़ के लिये तेरा लड़ना जरूरी हैं।

    सिमटते हुए तेरा बिखरना जरूरी हैं।
    हालातो से तेरा यूं उजड़ना जरूरी हैं।
    बंद मिले अगर तुझे मंजिल की डगर,
    तो तेरा फिर राह बदलना जरूरी हैं।

    दर्द को काग़ज़ पर लिखना जरूरी हैं।
    ज़िंदा हो तो ,ज़िंदा दिखना जरूरी हैं।
    बहुत मशगूल सा रहता है तू जमाने में,
    खुद से भी तो कभी मिलना जरूरी हैं।

    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 83w

    देश के गद्दार

    सरहद पर तो हम दुश्मन से निपट ही लेंगे यारो,
    पहले घर के गद्दारों का सफाया हो तो बात बने।

    करते हैं जो चुगली अपने ही देश की बाज़ार में,
    इन्हे बाज़ार से बाहर निकाला जाए तो बात बने।

    खींचते जो मजहबी लकीर लोगों के बीच में यहां,
    इनकी ये मक्कार लकीरें मिटाई जाए तो बात बने।

    आजाद देश से आजादी चाहते है जो सिरफिरे,
    ज़िन्दगी से उन्हें आजाद किया जाए तो बात बने।

    टुकड़े टुकडे करने की चाह हैं जिसे हिन्दुस्तान की,
    बीच में से उनको टुकडों में चीरा जाए तो बात बने।

    करते नहीं जो देश के वीर शहीदों का सम्मान यहां,
    इन्हे मुल्क की सरहद पर लड़ाया जाए तो बात बने।

    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 84w

    काग़ज़ कलम

    तेरी मेरी जोड़ी, शायर और गजल सी हैं।
    कोरा कागज़ हूं मैं ,तू चलती कलम सी हैं ।
    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 88w

    महफ़िल में सवाल

    महफ़िल में इतना कमाल ना कर,
    गूंगे बेहरो से केशव सवाल ना कर।
    इशारों पर चलने वाले है लोग यहां,
    कमजोरियां इनकी सरेआम ना कर ।
    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 88w

    अखबार

    कैसे पलटने दू तुम्हे ,अपनी मोहब्बत के पन्ने
    जनाब ये दिल की बात है,अखबार थोड़े हैं।
    रहे दफन मेरा इश्क़ मेरे अंदर ,तो अच्छा हैं,
    मातम का माहौल हैं भीतर, त्यौहार थोड़े हैं।
    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 89w

    मां

    मां का हाथ पकड़ कर खड़ा हुआ हूं मैं,
    उसके आंचल में लिपटकर बड़ा हुआ हूं मैं।
    बहुत कुछ सिखाया है उसकी ममता ने मुझे,
    किताबो से कहीं ज्यादा मां से पढ़ा हुआ हूं मैं।
    -Keshav
    ©keshav_00

  • keshav_00 90w

    सैनिक

    वतन का फिर नुकसान हुआ हैं।
    सरहद पर कोई कुर्बान हुआ हैं।
    नहीं चुका पाएंगे ये एहसान कभी ,
    सेना का कर्जदार हिंदुस्तान हुआ हैं।
    -Keshav
    ©keshav_00