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    इक़ स्त्री के
    प्रेम में इतना
    डूब चुका हैं पुरुष

    कि अब पिता
    की थकान भी
    नही दिखती उसे..!

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    सभी पुरुष
    जिस्म नही मांगते ,

    कुछ तुमसे ,
    तुम्हारी पीड़ा
    भी मांगते हैं...!

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    ये 'तन्हाई'
    जो कई वर्षों से
    मिरे साथ हैं ,

    मग़र
    अफ़सोस हैं मुझे
    कि इक़ दिन
    यूँ भी होगा ,

    मैं इसे 'तन्हा'
    छोड़ जाउँगा...!

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    जिंदगी से
    निपट रहा हूं

    मौत क्या हैं ?
    खुदा ही जाने...!


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    कि बिखरे-बिखरे सहमे-सहमे
    रोज-ए-शब्द देखेगा कौन

    लोग तेरा जिस्म देखेंगे
    तेरी सादगी देखेगा कौन..!


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    आप कितने ही अच्छे
    क्यूँ न बन जाओ ,

    मग़र हमेशा किसी के
    ख़ास नही हो सकते...!


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    A ,B का पिता है लेकिन B ,A का पुत्र नही हैं

    बताओ A और B के बीच मे क्या सबंध है..?


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    गरीब आदमी का प्यार भी हवस लगता है

    अमीर करे तो हवस भी प्यार है..!


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    आ मिल मुझे कभी बारिश की बूंदे जैसे ,

    महसूस कर तुझे मैं संग तेरे इश्क़ में भीग जाऊ..!


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    बीमार सिर्फ़ मैं ही नही यहाँ ,
    हालत उनकी भी बहुत ख़राब है...!


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