kavirahulseth

poet, blog writer govt teacher

Grid View
List View
  • kavirahulseth 22w

    तुम संग जीना हमने कब चाहा?
    हम को तो बस साथ मरना है ।।

    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 40w

    तुमसे दूर मन लगता नहीं है,
    भरा है मगर छलकता नहीं है।

    ये दुनिया बड़ी बंजर लगती है,
    इश्क़ का बीज पनपता नहीं है।

    वो वक्त ही कुछ और था पर अब,
    वो कंगन मेरे नाम से खनकता नहीं है।


    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 42w

    मंदिर की चौखट पर मांगी हो कोई दुआ जैसे,
    तपती धूप में मिली दरख्तों की छांव हो जैसे,
    अंधेरी रातो में सितारों की जगमगाहट हो जैसे,
    दिल के दरवाजे खटखटाती है तेरी यादें वैसे ।

    :- ✍️राही❤️
    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 47w

    तुम युग से नहीं,
    युग स्वयं तुम से है,
    मत हार मानिये,
    युद्ध हर क्षण से है।।

    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 48w

    कोई छुपा लेता है किसी का छलक जाता है,
    मगर आंखों में पानी तो सबके भरा रहता है।।

    :-✍️राही❤️
    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 48w

    ये काली अंधेरी घनी रात है,
    मेरे दिल मे दबी इक बात है।

    यूँ कातिल नजरों से ना देखो हमें,
    लबों पर आजाएँगे जो जज्बात है।

    तुम रूठोगे तो फिर बचेगा क्या?
    ढाक के फिर वही तीन पात है।।

    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 50w

    "स्कूलें" खुल जाएगी पर,
    वो रौनक कहा से लाएंगे।।

    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 51w

    सोच में शौच भरे बैठे है,
    जिंदा तो है मगर मरे बैठे है।।
    ये किस तरह के लोग है यहाँ
    हर बात में उंगली करे बैठे है।

    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 52w

    हम इस उम्मीद में जिये जाते है,
    हालात है, कभी तो संवर जाते है।

    गम, नमी, मायूसी आम बातें है,
    मुस्करातें चेहरे कमाल कर जाते है।

    पेड़ के सूखे पत्तों जैसे लगते है,
    आदमी इन दिनों यूँ मर जाते है।

    ये वक्त बड़ा बेमुरव्वत है 'राही'
    शहर छोड़ो चलो घर जाते है।


    ©kavirahulseth

  • kavirahulseth 53w

    बिन शायरी शायर का एक दिन कैसे कट सकता है,
    तुम ही बताओ तुमसे दूर जीवन कैसे कट सकता है।


    ©kavirahulseth