kavi_poetry_

बदलता वक़्त,बदलती हवाए/insta.com_kavi_poetry_21

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Reposts
  • kavi_poetry_ 1d

    मेरे प्रेम का ये अभिशाप है
    की मेरा एकांत मुझे कभी न छोड़े
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  • kavi_poetry_ 3d

    कठिन क्या है
    औरत होना
    या
    लेखिका होना ।।
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  • kavi_poetry_ 1w

    प्रेम ढूँढू कहा
    जाने की ज़िद ने
    सब गुमनाम कर दिया
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  • kavi_poetry_ 1w

    मेरे दरमियाँ है वो
    और मैं उसके
    अब कही और हम ना मिलेंगे
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  • kavi_poetry_ 4w

    मैं यहाँ खड़े होकर वक़्त को बुनतीहूँ
    और लोगो की तेज रफ़्तार देखती हूँ

    कही चेहरे आके अटकते है यहाँ
    मैं उनमे गूंज रहे सवाल ढूढ़ती हूँ
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  • kavi_poetry_ 4w

    दर्द मे डूबे चेहरे मूझसे बर्दास्त नहीं होते
    तो,
    वो चेहरे मैंने अपनी कविता मे उतार दिए

    कही वक़्त बाद पता चला
    इस कविता से मिलते कही चेहरे है
    जिनके नाम
    मैंने बिना पूछे उखर दिए
    अपनी कविता मे।
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  • kavi_poetry_ 4w

    एक धुप जो कमरे के भीतर आती है
    शाम की अलसाई हुई धुप,
    मैं उस वक़्त..
    खुद को बटोरती हूँ
    सिर्फ उस गहरी रोशनी को
    इत्मीनान से तकने के लिए
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  • kavi_poetry_ 5w

    क्या खूब लिखते हो हमारी बेवफाई मे
    कभी जिक्र मोहब्बत का भी किया होता
    हर बार तो हम दगा करते नहीं
    कभी तो इज़हार का इतियार दिया होता
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  • kavi_poetry_ 5w

    मोहब्बत तो मरने के बाद भी
    ज़िंदा रही
    सुना है...
    हसरते भी तो ज़वा ही रही
    फिर मोहब्बत मे ये क्या बात आपने कही
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  • kavi_poetry_ 6w

    किसी शायर ने अगर कुछ लिखा है
    तो महज लिखा नहीं उसे
    जिया है
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