Grid View
List View
Reposts
  • kalamsyahi_ 87w

    पैदल घर को जाता हुआ वो बच्चा
    नहीं जानता उसे कितनी दूर और चलना है
    उसे पता है बस की जल्द ही घर पहुंचेंगे
    तपती हुई सड़क की गर्मी
    उसके चप्पल को गरम कर देती है
    पर घर लौटने का हौसला
    उस गर्मी के साथ ही बढ़ता जाता है
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 87w

    मैं कहना चाहता हूं तुमसे
    इस व्यर्थता के परे
    इस शून्य के उस पार भी
    बिखरा पड़ा है सिर्फ खालीपन
    जहां सब कुछ एक प्रश्न है
    आत्मग्लानि के इस सागर को
    लांघकर उस पार उतर भी गए तो
    मिलेगा तुम्हें इक और प्रश्न
    जो तुम्हें अपराधबोध और कुंठा
    की खाई में धकेल देगा
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 88w

    स्वपन !

    पिछली कुछ रातों से मेरे स्वपन में आने वाला
    औरंगाबाद की पटरियों पर बहता खून
    वहां पड़े शरीर के टुकड़े
    और कुछ बिखरी पड़ी रोटियां
    मेरे मस्तिष्क में
    पटरियों से सने खून की तरह जमा हो रही हैं|
    उस स्वपन में मैंने कई बार उन पटरियों को
    वहां पड़े रोटी के टुकड़ों से साफ किया है
    पर हर सपने में खून का रंग और गहरा होता जाता है
    और उसके साथ ही गहरा होता जाता है
    मेरे मस्तिष्क में जमा खून|
    समय हत्यारों का दलाल है,
    और हर बार की तरह ये खून भी
    भूख के बहिखाते में लिख दी गई है
    पर हर स्वपन में मैं उन शरीर के टुकड़ों को
    रोटी में बांधकर किसी अस्पताल ले जाता हुआ दिखता हूं|
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 99w

    तुम्हें मालूम है उन रिश्तों का क्या होता है जो अधूरे रह जाते हैं?वो खत्म नहीं होते वहीँ |ना ही पीछे छूटते हैं |वो रिश्ते हमारे समानांतर चलते रहते हैं, अपनी ही लीक में |
    इस दौरान कभी अपनी लीक से हटकर हमारी लीक में घुस आते हैं |वो रुकते नहीं वहीँ | हमारी रफ्तार कम करके किसी गाड़ी की भाँति चलते रहते हैं, हमारे आगे |
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 100w

    साथ छल है एकांत सच
    साथ विवशता है एकांत विकल्प
    साथ सवाल है एकांत जवाब
    साथ कोलाहल है एकांत मौन
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 101w

    बात बस इतनी है,
    हम सभी ढोंगी हैं!

    प्रेम को तरसते हैं
    पर जब वो हमारे रास्ते आता है
    तो उससे भागकर
    किसी बंद दरवाजे के पीछे छिप जाते हैं
    उस उदासी से लिपट जाते हैं
    जिसकी लालसा लिए
    हम प्रेम की तलाश में निकले थे
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 101w

    सब समाप्त होने के पश्चात भी
    बचा रहेगा इक रहस्यमय व्यक्ति
    जिसके अंदर निहित होगा
    इस संसार का सारा प्रेम
    वो प्रेम जो कभी व्यक्त नहीं हो पाया
    वो प्रेम जो परिपूर्ण करेगा
    इस संसार के अंत को
    वो प्रेम जिससे आविर्भाव होगा
    फिर से इक नए संसार का
    सब समाप्त होने के पश्चात भी
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 105w

    इक ख्वाहिश

    किसी रोज ले जाऊँ तुझे इन सबसे दूर कहीं
    अपनी बाहों में भरकर छिपा लूँ तुझे कहीं
    जैसे छिप जाता है चांद बादलों की ओट में
    कुछ यूँ छुपा लूँ तुझसे तुझको कुछ पल के लिए ही सही
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 107w

    भूत और भविष्य के दरम्यान
    उलझा हुआ वर्तमान
    ©kalamsyahi_

  • kalamsyahi_ 107w

    बेतरतीब सी इस दौड़ के दरम्यान
    मंज़िल की ओर देखना
    आगे शायद रास्ता काफ़ी तय करना हो
    पर कितना सफ़र तय किया अब तक
    वो भी देखना
    शायद अकेले पाओ खुद को
    शायद बिखरा पड़ा हो यूँ ही सब
    खुद ही समेटना
    इक पल को ठहरना वहीँ
    फ़िर आगे बढ़ते रहना
    ©kalamsyahi_