kalaame_azhar

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Jaun ❤ Mai thik hu bas duwaye chahiye��

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Reposts
  • kalaame_azhar 5w

    शेर

    बैठते पास हम हमारे कभी
    फिर ग़म-ए-दिल क तस्किरा करते

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 14w

    शेर

    छांव मुमकिन नहीं कि तुमने तो
    फूल चाहा दरख़्त के बदले

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 26w

    शेर

    किसी का कोई अपना गर नहीं तो आ लगे मुझसे
    मुझे तकलीफ़ कब थी यूं ‌कोई दीवार होने में

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 38w

    शेर

    ख़्वाइश-ए-गै़र जो किया कीजे
    दिलजलों से तो मशवरा कीजे

    दाग़ सारे ये कह रहे मुझसे
    अपने ज़ख्मो को फिर हरा कीजे

    उसकी तक़दीर में हो शहज़ादा
    आप भी साथ में दुआ कीजे

    मेरी बातों का सीधा मतलब है
    सोच उल्टी अगर ज़रा कीजे

    वक़्त की चाल से हैं सब आजिज़
    अब घड़ी को भी इत्तिला कीजे

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 42w

    शेर

    रुख़्सती तेरी और कुछ भी नहीं
    और इक ग़म क बस इज़ाफ़ा है

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 42w

    शेर

    और कोई बदल नहीं मुमक़िन
    वक़्त लाज़िम है वक़्त के बदले

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 43w

    शेर

    गुज़ारे बदहवासी में मयस्सर जो भी थे लम्हे
    अभी सब याद आता है अभी सब हाथ मलते हैं

    नहीं है राबता बाक़ी न पहली सी रिवायत है
    जुदा है मंजिले अपनी तो फिर क्यूं साथ चलते हैं

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 43w

    शेर

    बहलते हम थे तुझसे अब तेरी यादों के ज़िम्मे हैं
    है किसका काम आख़िर ये करें है कौन देखो तो

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 51w

    शेर

    यहाँ तो दर्द के चश्में से हर क़तरा भी वाकिफ़ है
    शिफा मिलती रहे मय से ये मयखाने कि कोशिश है

    ©kalaame_azhar

  • kalaame_azhar 52w

    शेर

    आपसे गुफ़्तगू की चाहत थी
    इश्क़ तो बाद का बखेड़ा है

    ©kalaame_azhar