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  • jyotibonge 105w

    रंजिश के साए को ओढ़कर हाँ
    हमें तुमसे यूँ दूर जाना नही था
    मगर हमको तुमपे वफ़ा का कोई हक़
    कभीभी कहींभी जताना नही था ।।धृ।।

    सताया था तुमने मना भी न पाए
    हाँ इस बात को हम बता भी न पाए
    सताए हुए हो ज़माने के तुम भी
    हमें और तुमको सताना नहीं था ।।१।।

    खोकर के बैठे है, चैन और नींदें
    इस बात की तो शिकायत नहीं है
    मगर खोके गैरत और शर्मो हया को
    कभीभी हमें तुमको पाना नहीं था ।।२।।
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 105w

    त्या एकांती पाय सोडुनी पाण्यामध्ये बसलो होतो
    मुखात नव्हता शब्द एकही गालामध्ये हसलो होतो

    त्या एकांती कुठेच नव्हत्या आपल्या त्या वेड्या तक्रारी
    भाळावरच्या आठ्या देखील झाल्या होत्या जणू फरारी

    त्या एकांती वाऱ्यावरती मंद मंदशी गाणी होती
    खळखळणाऱ्या धुंद नदीची झुळझुळ मंजुळ वाणी होती

    त्या एकांती तुझी सखे ती नजर अशी नजरेला भिडली
    क्षणात एका शतजन्मांची प्रीत तुझ्यावर माझी जडली

    त्या एकांती हळूच जुळल्या दोन मनांच्या रेशीमगाठी
    मना उमगले, मला बनवले केवळ केवळ तुझ्याचसाठी
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    मुश्किलें गर सामने है,
    तो समझ अवसर है कोई
    रौनकें तो बस भरम है,
    राह का पत्थर है कोई
    भीतर ही उजियारा जगा के,
    राहों को रोशन बना दे
    लब से ना कह! के करम से,
    दासताँ अपनी सुना दे
    मुमकिन है हर एक चीज,
    गर दिलजान से तू ठान ले

    बात इतनी मान ले,
    क्या ज़िंदगी है जान ले !
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    हम अपनी ही कहने में
    यूँ गुम हुए थे
    के आवाज अपनों कि
    ही सुन न पाए
    जो खोया है उसको यूँ
    गिनते रहे के
    जो पाया है उसको ही
    हम गिन न पाए
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    तेरी कही हुई हर बात मुझे ज़ुबानी याद है
    तेरी लिखी हुई हर एक कहानी याद है

    उस रात की सौंधी सी खूशबू
    तुम्हारे प्यार की हर निशानी याद है

    बातें तो होती रहती है रोज़ नई
    फिर भी ज्यादातर हमें पुरानी याद है

    भेजे है उसने कुछ कदरदान जिंदगी में
    किस्मत की हमपे वो मेहरबानी याद है

    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    मेरे घर के सामने
    पड़ी हुई एक डगर
    जो पहुंचती है तुम्हारे शहर
    अक्सर कहती है,
    चल शुरू कर सफर
    मिलने के लिए उसको
    जिसकी राह तुम
    देख रहे हो इधर

    हम कहतें है हमें
    उन राहों की क्या गरज़
    जो फिर से हमें,
    हमारे घर लौटा दे
    हमने तो मन में ही
    बसाया है उनका नगर
    जो रहेगा संग मेरे पूरी उमर
    जहाँ हमेशा साथ रहेगा
    मेरा कभी वापस
    न लौटनेवाला हमसफ़र
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    किसी की आँखे, पुस्तक है
    किसी की बातें, पुस्तक है
    ये दिन रातें,पुस्तक है
    धूप बरसातें, पुस्तक है

    दुनिया की आँखे, है पुस्तक
    अनुभव की बातें, है पुस्तक
    सुख दुख के साथी, है पुस्तक
    दिव्य ज्ञान देती, है पुस्तक

    पुस्तक और जीवन का
    मेल ये पावन है
    जीवन एक पुस्तक है
    पुस्तक से जीवन है

    - ज्योती बोंगे
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    घर में रहकर, हाँ जंग ये लड़नी है हमको
    दूरी रखकर, पर संग ये लड़नी है हमको
    के वक़्त ही ऐसा आया है सारी दुनियाँ अंधियारे में
    हम तुम मिलकरही ला सकते है इसको अब उजियारे में
    घर में रहकर, हाँ जंग ये लड़नी है हमको...

    बदलाव का इस कुछ कारण है,कोई ना कोई मतलब है
    सोचो इसके पीछे शायद कुदरत का कोई मक़्सद है
    बरसों हमने यूँ सींचा है जर्रे जर्रे को वादी के
    और ले आए आबादी को नजदीक ही हम बरबादी के

    अब वक़्त है ये सब बदलें हम
    अब वक़्त है के जरा सुधरे हम
    घर में रहकर, कितना कुछ हम कर सकते है
    घर में रहकर, एक जंग बड़ी लड़ सकते है

    अब ज्यादा दूर नहीं मंजिल देखो अँधियारे जाएंगे
    फिर से चहकेंगी ये गलियाँ फिर से उजियारे आएँगे
    धीरज का दीप जलाकर हम घर में रहकर ये जंग लड़े
    कुछ दिन के लिए हम औरों से रहे अलग अलग पर संग लड़े

    घर में रहकर, हाँ जंग ये लड़नी है हमको....

    - ज्योती बोंगे

  • jyotibonge 106w

    इस खेल में तुम ना रहे
    पर संग हमारे रहोगे सदा
    लाखों दिलों के अम्बर में तुम
    बनकर सितारे रहोगे सदा
    ©jyotibonge

  • jyotibonge 106w

    लोकराजा

    करवीर नगरीत ऐसा होता एक राजा
    खूप दयाळू,मायाळू,कनवाळू, नेक, राजा!
    मनी समभाव त्याच्या कधी नाही भेदभाव
    एका पारड्यात ठेवी सिंहासन आणि प्रजा

    दोन्ही हाती केलं दान उभा कराया समाज
    गावोगावी शिक्षणाचा त्याने मांडला जागर
    गोरगरिबांचा वाली, बळीराजाचा आधार
    त्याचे ध्येय फक्त एक बहुजनांचा उद्धार

    त्याच्या साधनेचे फळ पिढ्यापिढ्यास मिळाले
    आली समृद्धी अज्ञान दूर दूर ते पळाले
    त्याच्या कालच्या यत्नाने आज सुरक्षित माझा
    थोर भाग्य की मिळाला आम्हा ऐसा 'लोकराजा'

    - ज्योती बोंगे
    ©jyotibonge