jyoti_

प्रभामीत

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  • jyoti_ 3d

    Part 1

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    Story in my mind

    Every one has a story to tell. Sometime we couldn't utter it and some time there are no listeners. I have also a story in my mind. Now question rises, is it criminal, romantic, thriller, action or bollywoodiya masala type story?? I leave the answer to you to decide.

    It's a story of Radha, a girl In my neighborhood. An average looking girl but modest one. She visits daily in evening for her English classes.

    Sorry, I didn't introduced myself.I am Rajni Chauhan, an English retd. professor and write stories in my liesure time.My many books are published and few are in progress. I live in nature's heaven Himachal Pradesh.
    ©jyoti_

  • jyoti_ 5d

    कभी तो जीने की उमंग रखो,
    क्यों जीवन बेरंग रखो??
    कभी तो ख्वाहिशें संग रखो,
    क्यों जीवन को तंग रखो??
    कभी तो हौसले सतरंग रखो,
    क्यों जीवन भंग रखो??
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    कागज़ और कलम
    जायदाद है शायर की
    पर तुम्हारा खयाल
    रूह है शायरी की...
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    कुछ
    ख्वाहिशों को
    आग लगाते है,
    सर्द रिश्तों को
    पिघलाते है।
    कुछ
    हादसों को
    दोहराते हैं,
    बेबस लबों को
    सुलगाते है।
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    Broken lifeline doesn't breaks you,
    But
    Broken families sometimes does.
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    पिता का कंधा

    आज पापा हमेशा के लिए छोड़ कर चले गए।बचपन से उनके कंधे से अजीब सा नाता था। नींद भी उनके कंधे पर ही आती थी और जब दुखी होती थी तब भी उनके कंधे भिगोती थी।
    याद है मुझे, मेरे 10th में नंबर कम आए थे शायद वजह लापरवाही रही होगी।घर की लाडली होने का फायदा उठाया होगा। पापा ने बड़े प्यार से समझाया था कि मैं हमेशा नहीं रहूंगा तेरे साथ।कोई है भी नहीं जो संभाल ले तुझे, अपने कंधे इतने मजबूत करो कि किसी के कंधे पर सर रख कर रोना ना पड़े। वो बात बांध ली मैने और मजबूत कर लिए अपने कंधे financially।
    याद है मुझे, जब आप बीमार पड़े थे और डॉक्टर से परामर्श लेकर हम वापस आ रहे थे तब भी अप के ही कंधे पर सर रखा था मैने। आज भी आपके कंधे की जरूरत पड़ती है पर मां को देख कर ....अपने कंधे पर ही रख लेती हूं अपना सर।
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    फकीर हुए तेरी दीद के ,
    मन शायराना हो गया,
    कुछ अधूरा सा छोड़ गया तू
    तमाम आलम सूफियाना हो गया।
    लबों पर तेरा नाम मंत्र हो गया,
    ये बैरन जग सुलेमाना हो गया।
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    January precided December
    That's how you and I remember
    February month of Love
    Packets of faith delivered
    March to proceed ahead
    That's how sessions end
    ©jyoti_

  • jyoti_ 1w

    खो गए थे अल्फाज़...
    स्याही पर दर्द सवार था।
    कहना था बहुत कुछ पर
    हर लफ्ज़ तलवार था।

    आदतन मैने कहा ... ठीक हूं
    समय नहीं है, लिख नही पा रही
    कब तलक झूठ कहती खुद से
    सर पर मुसीबतों का पहाड़ था।
    छुपाती रही अपने जख्म...
    पर मर्ज... शह सवार था।

    खो गए थे अल्फाज़...
    स्याही पर दर्द सवार था।
    ©jyoti_

  • jyoti_ 5w

    मन के वेग से गाड़िया चलती
    तो मैं ना जाने कहां कहां होती
    कई बार तो शायद मैं एक साथ
    कई जगह होती...
    ©jyoti_