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Reposts
  • jigna_a 8h

    2122 1212 22/112

    कोई सागर वहाँ समाना है,
    आँख से आप को बहाना है।

    दूरियों का अजब फसाना है,
    और तुम को करीब लाना है।

    याद तुमको करें भला कैसे,
    भूलना भी कोई बहाना है।

    चाल टेढ़ी चले सनम तुम तो,
    कौन से जाल में फँसाना है।

    प्यार का था भरम हमें हमदम,
    साथ होना तेरा फसाना है।

    क्यूँ मची है बवाल क्या जानूँ,
    गुम हुआ दिल नहीं ख़ज़ाना है।

    ये उदासी मिली तुझे "जिगना",
    साथ तेरा बड़ा पुराना है।
    ©jigna_a

  • jigna_a 10h

    सबसे बड़ी बेवक़ूफ़ी..

    औरों को बेवक़ूफ़ समझना!!

    ©jigna_a

  • jigna_a 17h

    #fun

    अर्ज़ किया है...

    गर हमें नज़रअंदाज़ कर रहे हो,
    गर हमें नज़रअंदाज़ कर रहे हो,

    चश्मे के नंबर चेक करवा लो।
    ��������������������

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    #justforfun

    If you are taking me for granted,

    I'll not grant you any mercy!!


    ©jigna_a

  • jigna_a 18h

    अपना हक़ नहीं समझते थे तुम पे,
    अपना ज़रूर समझते थे,
    पहले प्रेम बरसाते थे,अब प्रार्थना करेंगे,
    शुभम् भवतु।।
    ©jigna_a

  • jigna_a 20h

    #यूँही


    उसे गलतफ़हमी थी मैं उसे देख रही थी,
    मैं मेरे हृदय में बसा वो,उसे नयनों में दिखा रही थी, छिछला वो गहराई क्या जाने।
    ©jigna_a

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    उसे गलतफ़हमी थी मैं उसे देख रही थी,
    मैं मेरे हृदय में बसा वो,उसे नयनों में दिखा रही थी, छिछला वो गहराई क्या जाने।
    ©jigna_a

  • jigna_a 1d

    22 22 22 2

    तुमसे वादा करते है,
    हम तेरा दम भरते हैं।

    लगता है तू थामेगा,
    बेबाकी से गिरते हैं।

    सपने मेरे झूठे हैं,
    तेरे रुख में ढ़लते हैं।

    मूँदें कैसे पलकें हम,
    ख़्वाबों में वो हँसते हैं।

    रूठेगी कैसे "जिगना"
    उसको आँसू चुभते हैं।
    ©jigna_a

  • jigna_a 1d

    कोई जो हक़ से हक़ जताता है,
    जान लो वो तुम्हारी ख़ैरियत चाहता है,
    पर जब तुम उसे नादानी समझते हो,
    वो बस.................दूर चला जाता है।
    ©jigna_a

  • jigna_a 1d

    घुटता है जो पिंजर में,
    पर खोल, नभ तौल,
    भले ही जाने ना तू उड़ना,
    पर खोल, नभ तौल।

    जीवन हो अन्यमनस्क,
    और अचानक, अनवरत,
    इक पल जो अमृत,
    दूजे पल वो विष,
    मुँह मोड़, मद छोड़,
    भले ही शूल मन में चुभता,
    पर खोल, नभ तौल।

    कोई जो मित्र, शत्रु बन जाता,
    और शत्रु मित्रता निभाता,
    तू कौन जो न्याय कर पाता,
    कछु ना तेरा, तो क्या जाता,
    कर समर्पण, स्वयं हो अर्पण,
    गिरहा को हरि ही सुलझाता,
    पर खोल, नभ तौल।

    घुटता है जो पिंजर में,
    पर खोल, नभ तौल,
    भले ही जाने ना तू उड़ना,
    पर खोल, नभ तौल।
    ©jigna_a

  • jigna_a 1d

    बिन गुरु तो कोई भी नहीं,
    नहीं, नहीं कोई धार्मिक, अध्यात्मिक, दार्शनिक, वैचारिक बात नहीं करनी,
    ये तो बस एक विचार आया है, जो बता रही,
    गुरु तो छोटा बालक भी बन सकता है,
    अगर हम में विशाल दृष्टि हो उसमें छिपे गुरु तत्व को देख पाने की,
    कईयों नास्तिक नहीं मानेंगे तो ना सही,वैसे भी किसीको मनवाने थोड़ी लिख रही,
    जगद्गुरु है श्री कृष्ण, उनका तो जीवन ही अपनेआप में एक विद्यालय है,
    उनकी विशाल चेतना तो आज भी प्रत्येक जीव में निहित है,
    अध्यात्मिक कहना उचित नहीं,अध्यात्म को चुनने वाला भी नहीं, क्योंकि मुझे लगता है अध्यात्म स्वयं व्यक्ति को चुनता है,
    आजकल पाखंड, दंभ, लोभ, लालसा हर जगह प्रवर्तमान है, धर्म और अध्यात्म भी परे नहीं,
    पर सबसे बड़ी बात, ध्यान, योग, समर्पण जो आवश्यक हो वो लाते हैं जीवन में,सही गुरु अर्थात एक प्रेमधारा जो अनवरत बरसती है आप पे,
    और कुछ हठी जो गुरु का स्वीकार नहीं करते, जीवन स्वयं उसका गुरु बन जाता है, क्योंकि जबसे मनुष्य योनि में जन्म लिया, सीखना अनिवार्य है।
    ©jigna_a

  • jigna_a 1d

    नबद-ए-इश्क़:- प्रेम का संघर्ष
    मुज़महिल:- शिथिल #love❤️

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    बेमीटर

    तेरी गली का हर ज़र्रा मेरा यार हो गया है,
    सिवा तेरे मेरे हरकोई...राज़दार हो गया है।

    नबद-ए-इश्क़ में ज़ख्मी दिल दिखता नहीं,
    एक मुलाक़ात में तेरा ये वफ़ादार हो गया है।

    मुज़महिल हो जाता है हिज्र के ज़िक्र से ये,
    ये दिल मेरी वजह से ख़ाकसार हो गया है।

    कहाँ कदम भी गिन के उठाया करते थे हम,
    कहाँ ये इश्क़ में ऐसा धुआँधार हो गया है।

    "जिग्ना" इश्क़ मेरा ग़ुरूर है महबूब पे नाज़,
    कभी ये न समझना दिल शर्मसार हो गया है।

    Jignaa
    ©jigna___