jazbat

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  • jazbat 1w

    तुम वो चार शब्द मुझे थमाओ तो सही
    मैं उन्ही के सहारे प्रेम ग्रंथ रच दूँगी !

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 1w

    बदल गया है कुछ अंदर पता नही कैसे
    दिल हो रहा है बेज़ार पता नही कैसे

    सबकुछ है पहले सा ही जाना पहचाना
    रहा नही पहले सा सरोकार पता नही कैसे

    वक़्त की सुईयाँ घिसक रहीं बेदम
    वक़्त से रहा नही वो प्यार पता नही कैसे

    है और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे
    सबसे होता नही वो इक़रार पता नही कैसे

    क़तई नही मुश्किल रहना मुख़्तलिफ़
    बस एक सब्र है कलाकार,’जज़्बात’ पता नही कैसे !

    ©jazbat
    Ranjana B.(16/10/21)

  • jazbat 2w

    रावण

    दस सरों और उनमें भरे दुश्विचारों के लिए
    रावण तुम हुए बदनाम
    तुम्हारा पाण्डित्य तुम्हारे कृत्यों से मेल
    नही बैठा पाया
    तुम्हारा अहंकार तुम्हारी जान का दुश्मन हुआ
    पर तुम मारे नही जले भी नही ख़त्म और भस्म
    भी नही हुए
    तुम आज सरों से ज़्यादा मनों में
    कलुषित आँखों में, अभद्र शब्दों
    नीच कृत्यों और निंदनीय सोच में
    वीभत्स कर्मों के साथ विध्यमान हो …
    हाँ ! ठीक कहा, तुम बलात्कारी नही थे ।

    ©jazbat

  • jazbat 2w

    ना देवी ना दुर्गा ना काली कहो
    बराबरी पे रखो बस हमें नारी कहो

    नही सूर्ख़ाब अलहदा लगे हैं कोई
    मुझे इज़्ज़त बख़्शो नही गाली कहो

    तुम्हारे बीज को देती हूँ मैं ही जमीं
    मोहब्बत से अपने बाग़ की क्यारी कहो

    मकां को घर बनाने में देती हूँ भागीदारी
    ग़ुरूर से घर की उलझनों की चाबी कहो

    ज़िस्म ही नही मैं हूँ एक जान भी
    मुझे ‘जज़्बात’ प्यार का दरिया तूफ़ानी कहो !

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 2w

    तुम आओ तो कभी चाय पे
    कुछ सुनो कुछ सुनाओ चाय पे

    वादे ना क़समें ना शिकवे ना शर्तें
    बस हाल दिल का, बताओ चाय पे

    बदल गयी है अब हमारी कहानी
    नई हो तुम्हारी कोई तो, कह जाओ चाय पे

    कब ज़िंदगी रही एक सी है किसीकी
    अपने तजुर्बों से वाक़िफ़ करवाओ, चाय पे

    यूँ तो ‘जज़्बात’ उम्र गुज़र ही रही है
    चंद लम्हों की फ़ुरसत ले आओ, चाय पे ।

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 2w

    तुम्हें भी आदत है बेवज़ह
    तकलीफ़ देने की
    जब छोड़ दिया है दिल..तो
    ले जाओ ये आँख की नमी भी …

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 3w

    अजब बवाल है
    ज़ुबान को छूट दो तो रिश्ते ख़फ़ा
    दिल की सुनो तो..दिमाग़ नाराज़
    दिमाग़ को तवज्जो दो तो ज़िंदगी नाख़ुश…

    ©jazbat

  • jazbat 4w

    दिल कहता है एक दोस्त तलाशा जाए
    दिमाग़ कहता है रुसवाई ज़बरदस्त होगी ..

    ©jazbat

  • jazbat 4w

    वो अक़सर ही मेरा इम्तहान लेता है
    वो मुझे जान- बूझकर दोराहों पर खड़ा करता है !

    वो मेरा सब्र आज़माता है
    वो मेरे दिल की गहराई को जाँचा करता है !

    वो मुझे देता है दिल खोल के
    बाद उसके वो अपना हाथ तंग कर लिया करता है !

    वो कभी मुझे सुक़ून से नही रहने देता
    वो मेरे दिमाग़ से अजीब खेल खेला करता है !

    मैं भी अब ख़ूब हो गयी आदि
    सोचती हूँ ‘जज़्बात’, ख़ुदा मुझे बहुत प्यार करता है ।

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 6w

    कितना कुछ है,जो बताते नही हैं
    बहुत कुछ है जो, छुपाते सभी हैं

    बड़ी हैं मुश्किल, ज़माने में यारों
    ज़िंदगी के क़िस्से, सुनाते यही हैं

    कभी जो हैं मिलते, बेबाक़ी से हमको
    कभी तो तकल्लुफ़, दिखाते वही हैं

    कहीं जाकर तो, कभी ख़त्म होगी
    तलाश जो दिलवाले, जताते नही हैं

    मेरी मानो ‘जज़्बात’, तुम्हीं तौबा कर लो
    ग़लत होकर भी लोग, सर झुकाते नही हैं ।
    ©jazbat
    Ranjana B.