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  • ishq_allahabadi 1w

    शेर/ شعر

    لہو رگوں کا مرے آنکھ سے اتر آیا،
    نہ پوچھ ہ سے کہ کیا کیا دکھا گئیں آنکھیں ۔

    लहू रगों का मिरे आँख से उतर आया,
    न पूछ हमसे कि क्या क्या दिखा गईं आँखें।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 2w

    शेर/شعر

    اسکو ہر چیز کا تقاضا تھا،
    پاس دل کے سوا تھا کچھ بھی نہیں-

    اس طرح ختم ہو گیا قصہ،
    اس میں باقی رہا تھا کچھ بھی نہیں ۔

    उसको हर चीज़ का तक़ाज़ा था,
    पास दिल के सिवा था कुछ भी नहीं ।

    इस तरह ख़त्म हो गया क़िस्सा,
    उसमें बाक़ी रहा था कुछ भी नहीं ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 2w

    कलमा/کلمہ

    میں پڑھ چکا ہوں ترے نام کا کلمہ پھر بھی،
    تو میری زات میں کیوں کر اتر نہیں جاتا۔

    मैं पढ़ चुका हूँ तिरे नाम का कलमा फिर भी,
    तू मेरी ज़ात में क्यूँकर उतर नहीं जाता।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 2w

    ग़म/غم

    تمہارے غم کی شدت کو مجھے محسوس کرنے دو،
    اگر جینا نہیں ممکن تو مجھ کو ساتھ مرنے دو۔

    तुम्हारे ग़म की शिद्दत को मुझे महसूस करने दो,
    अगर जीना नहीं मुमकिन तो मुझको साथ मरने दो।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 3w

    रदीफ़ = गज़ल में बार बार प्रयोग होने वाला शेर की दूसरी पंक्ति का आख़िरी शब्द ।
    क़ाफिया = गज़ल में प्रयोग होने वाला एक ही स्वर वाले शब्द ।
    मतला= गज़ल का पहला शेर ।
    मक़ता = गज़ल का आख़िरी शेर जिसमें शायर अपना नाम लिखता है।
    मिस्ल = एक जैसा ।
    सिफ़ात = ख़ूबियाँ।
    गौहर = आभूषण


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    मिरी

    मिरी ग़ज़ल के हर एक शेर में मिरी जाना,
    रदीफ़ नाम का तेरे ही मैं लगाऊँगा।

    तिरी सिफ़ात जो बिखरी हैं मिस्ल गौहर सी,
    बना के क़ाफिया उसका ग़ज़ल सजाऊँगा।

    हँसी को तेरी चुराकर लिखुँगा मतले में,
    मैं अपने नाम का मक़ता उसे उढ़ाऊँगा।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 3w

    शब-ए-विस्ल =मिलन की रात
    मिस्ल-ए-माह= चाँद की तरह ।
    कुल= पूरी
    हयात = जीवन
    शब= रात

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    शेर/شعر

    چھا جاۓ ساری شب پہ شب وصل مژل ماہ،
    پھر کل حیات میں اسی شب میں گزار دوں۔

    छा जाए सारी शब पे शब-ए-विस्ल मिस्ल-ए-माह,
    फिर कुल हयात मैं उसी शब में गुज़ार दूँ ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 4w

    ہر پھول سجانے کے لئے ہوتا نہیں ہے،
    ہر زخم دکھانے کے لئے ہوتا نہیں ہے ۔

    کانٹوں سے کیا کرتے ہیں پھولوں کی حفاظت،
    راہوں میں بچھانے کے لئے ہوتا نہیں ہے ۔

    کچھ درد کو سینے میں دباتے ہیں مری جاں،
    ہر درد بتانے کے لئے ہوتا نہیں ہے ۔

    جو شور سے آ جائے بدل تیری خدی میں،
    بس شور مچانے کے لئے ہوتا نہیں ہے ۔

    گر مہ جو اتر جائے لہو میں تو بنے بات،
    بس جام پلانے کے لئے ہوتا نہیں ہے ۔

    ہوتا ہے گماں ان کو جتائنگے کسی روز،
    پر "عشق" جتانے کے لئے ہوتا نہیں ہے ۔

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    नहीं है/ نہیں ہے

    हर फूल सजाने के लिए होता नहीं है,
    हर ज़ख़्म दिखाने के लिए होता नहीं है ।

    काँटों से किया करते हैं फूलों की हिफ़ाज़त,
    राहों में बिछाने के लिए होता नहीं है ।

    कुछ दर्द को सीने में दबाते हैं मिरी जाँ,
    हर दर्द बताने के लिए होता नहीं है ।

    जो शोर से आ जाए बदल तेरी ख़ुदी में,
    बस शोर मचाने के लिए होता नहीं है ।

    गर मय जो उतर जाए लहू में तो बनें बात,
    बस जाम पिलाने के लिए होता नहीं है ।

    होता है गुमां उनको जताएँगे किसी रोज़,
    पर "इश्क़ " जताने के लिए होता नहीं है ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 5w

    दुनिया/دنیا

    بڑی عجیب ہے دنیا ،عجیب دنیا ہے،
    جو خون سچ کرے ،سچا اس ہی مانتی ہے،

    बड़ी अजीब है दुनिया, अजीब दुनिया है,
    जो ख़ून-ए-सच करे सच्चा उसे ही मानती है।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 5w

    अब/اب

    اب عشق میں پہلے سے وہ جذبات نہیں ہے،
    اب درد میں یاروں وہ مگر بات نہیں ہے۔

    अब इश्क़ में पहले से वो जज़्बात नहीं है,
    अब दर्द में यारो वो मगर बात नहीं है ।
    ©ishq_allahabadi

  • ishq_allahabadi 5w

    Roll

    "Want to roll my fingers on her curves"
    ©ishq_allahabadi