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  • ishan_jajoo 3d

    शिखर

    महक नही पर रूप है, प्रतिष्ठा की राज में।
    लहू से रंगीन है, हर पंखुड़ी पलाश में।
    गर्व न छूटा उनसे, उस फिसलती मिट्टी का।
    तो शिखर निकल पड़े है, सही पर्वत के तलाश में।

    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 32w

    सुनो, नेक ही तो है सब,
    बस धूप-छाव का फेर है।
    आफताब एक है सबका,
    बस वक़्त-वक़्त का खेल है।

    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 56w

    इस कदर गलत पढ़ी, हर किताब हमने
    ऊपरवाला गलतियां करते रहा,
    नीचेवाले खून बहाते रहे।

    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 60w

    दिनभर की थकान के बाद, जब रात घना सन्नाटा छाया।
    रोजीरोटी छोड़के फिर इक, खुशनुमा खयाल आया।

    भुल चुका था अरसे पहले, उस मुझसे मेरी मुलाकात हुई।
    फिकी धुन थी धुंदली यादे,फिर दुनिया भरी बकवाद हुई।

    निगाहों पे सूरज किरण, जब दुर्जन बनकर गिरने लगी।
    फिरसे रोटी की घड़ी, सर पर चढ़कर फिरने लगी।

    उस नादान कल को हमने फिर, अंधेरे में छोड़ दिया।
    नकाब पेहन कल के लिए, एक और दिन जोड़ लिया।

    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 60w

    पहली बारी थी तख़य्युल की गली में,
    अब उस गली का मैं ही आगाज़ हु।
    इतना कमजोर हुआ सौदा मेरे दिल का
    मुझसे ज्यादा मैं , अब उसके पास हु।

    तख़य्युल= Imagination
    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 63w

    सुख़नवर

    सुख़नवर हम बद-अमल
    जहर उगल आते है।
    दर-बदर जुबान से
    कई दिल तोड़ आते है।

    शुक्र है बेकस दिलो का
    जो टूटे है अरसों पहले।
    नजरअंदाज कर लबो को
    वो गले लगा जाते है।
    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 69w

    डूबते वही है लोग,
    जिन्हें तैरना नही आता।
    बदनाम मगर महोब्बत के
    कश्ती को करते है।


    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 70w

    खाली वक़्त,रिश्तो का साथ
    और घर का खाना बेच रहा था।
    ऊपरवाला बुरे वक्त में
    किसीको सुकून बेच रहा था।

    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 77w

    सपनो का एक मकां बना है,
    वक़्त से झुक जानेका नै।
    मैं जी चुका हूं जिंदगियां जिसमें,
    अब किस्मत से चूक जानेका नै।

    और हो बरक़त जमींदार की
    तो रोक दो आखरी मंजिल।
    इक पन्ना ना हो मेरी किताब में
    पर कहानी से रुख जानेका नै।

    ©ishan_jajoo

  • ishan_jajoo 88w

    मुताअला करता रहा
    मैं लकीरो का रोज
    कुछ धुन्दलासा नसीब
    अब नजर आ रहा है।

    जो न मानी लकीरे
    हम मिटा देंगे सब,
    अब तो आशिक तेरे दर
    सहर आ रहा है।

    मुताअला = study
    ©ishan_jajoo