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  • innersound 34w

    हर खामोशी कुछ कहती हैं
    हर शांति कुछ बताती हैं
    देख सके तो देख।

    हर पल में एक दुनिया हैं,
    एक दुनिया में कई दुनियाएं हैं
    देख सके तो देख।

    हर बूंद से जिदंगी है,
    हर बूंद में समंदर हैं
    देख सके तो देख।

    हर हैवान आदमी हैं,
    हर आदमी में एक इंसान हैं
    देख सके तो देख।
    ©innersound

  • innersound 34w

    रोशनी के घरों में अंधेरा हैं,
    चलो अंधेरी गलियों में आग ढूंढते हैं।
    ©innersound

  • innersound 53w

    हादसों की नगरी में एक हादसा ऐसा हुआ,
    जीवन सस्ता और ऑक्सीजन महंगा हुआ।

    ऐ हवा जरा धीरे धीरे चल
    कांपता होगा कोई इंसान सोया हुआ।

    हादसों की नगरी में एक हादसा ऐसा हुआ,
    लाशें मिल रही हैं हर मोड़ पर, हत्यारा कौन हुआ।

    सपना था आसमां में उड़ने का
    नसीब ना हुई जमीं, आसमां किसका हुआ।

    हादसों की नगरी में एक हादसा ऐसा हुआ,
    चुना जिसको तूने अपना समझ, वो नेता किसका हुआ।
    ©innersound

  • innersound 65w

    Inspired by Pash.

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    लोहा सबसे भारी नहीं होता
    और न ही पहाड़ का पासाण
    सबसे भारी वो घूघंट होता है
    जिसके नीचे न जाने कितनी कलाएं, योग्यताएं
    जिंदा लाशें बनकर दब जाती हैं।

    आसमां सबसे ऊंचा नहीं होता
    और न ही तारे, चांद, सूरज
    सबसे उंची वो मानसिक दीवारें होती है
    जिसमें नारियों को आजीवन कैदी बनाया जाता हैं।

    जिस्मानी ताकतवर होना खतरनाक नहीं होता
    और न ही जिस्म से प्रेम करना
    सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है
    जिसमें नारी महज जिस्म नजर आती हैं।

    तलवार का घाव सबसे दर्दनाक नहीं होता
    और न ही बंदूक की गोली
    सबसे दर्दनाक किसी अपनों का
    नारी के चरित्र पर उंगली उठाना होता हैं।

    अंधेरी रात सबसे डरावनी नहीं होती
    और न ही सबसे गहरी खाई
    सबसे डरावनी वो चुप्पी होती है,
    जिसमें लोग सच जानने के बाद भी शान्त रहते हैं।
    ©innersound

  • innersound 69w

    जुगनू रातों को चाहने लगे है
    रात की खामोशियों ने
    विरां आसमां को बताया हैं।
    ©innersound

  • innersound 70w

    क्रांति जहां भी हुई होगी,
    पहले खुद से हुई होगी।
    ©innersound

  • innersound 72w

    साल हर साल बदलता रहा
    बहाना हर बार बदलता रहा,

    कुछ ऐसे बीता मेरा पिछला साल
    मैं एक सा रहा मेरा संकल्प बदलता रहा।
    ©innersound

  • innersound 76w

    ये सरकारें नादान हैं,
    करती हमारा अपमान हैं
    फिर भी हम इनकी शान हैं
    हम भारत के किसान हैं।

    यह जो प्रधान हैं
    मचा रहा घमासान हैं
    यह भूल रहा कि ये जो
    खा रहा वो हमारा धान हैं
    हम भारत के किसान हैं।

    ये जो तुम्हारे विधान हैं
    ये हमारा नुकसान हैं
    इसीलिये सडक़ो पर हिंदुस्तान हैं
    हम भारत के किसान हैं।

    तुम पानी डालोगे, हम फसल उगा देंगें
    तुम खाई खोदोगे, हम उसको भर देंगें
    यही तो हमारी पहचान हैं
    हम भारत के किसान हैं।

    तुम जितना मारोगे,
    हम आगे आयेंगे क्योंकि
    हम डोलती अर्थव्यवस्था का समाधान हैं
    हम भारत के किसान हैं।

    काम करना हमारा काम हैं
    कृषि हमारा स्वाभिमान हैं
    मेहनत हमारी पहचान हैं
    हम भारत के किसान हैं।
    ©innersound

  • innersound 78w

    कितने नादान होते हैं
    वो जो हर वक्त मुस्कुराते हैं
    मौत से जूझते हैं
    लेकिन मौत टालते हैं।
    ©innersound

  • innersound 85w

    Shame on u indian media

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    मरता हैं कोई दलित तो मरने दो
    वो सुशांत थोड़ी हैं।
    टूटती हैं हड्डियां तो टूटने दो
    कंगना का मकान थोड़ी हैं।
    ©innersound