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Reposts
  • inklifier 27w

    Shabab-e-mohbbat gujarishe sham hogyi♥️
    Hum tumhare h ye bat sreaam hogyi❣️

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  • inklifier 30w

    When the heart battles with the mind
    Brightly assistance of that mankind.

    Hopeless their cruel fate to guide the mind,
    Dwells in the sublime, the world behind.

    These the stick of a faithful mind,
    We shall now have a grant for its kind.

    Brightly turned the crown in This young heart,
    Gave to thy royal son a healing part.

    Then let thy young life in visions crown
    After its sweetness and its renown.

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  • inklifier 30w

    Darkest nights
    The day enough of light
    Gloom and honor through my mind
    Hold your standards down thy sable wing,
    Leave the weary war to the sunshine.
    Bright is the morning that the heart divine!
    Back by the day, the ready muse shall shine
    Into the glow of morning's rosy glow.
    Next to the heavens, I held it some delight
    To see with me the prospect of the night.
    Across the sunrise, I heard the paradise,
    Under the sun and mine of the sunshine,
    Kept me ever in the glow of yesterday.

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    Darkest Nights

    ©inklifier

  • inklifier 32w

    प्रकृति का नियम और विधि का विधान ना कभी बदला था और ना ही कभी बदलेगा!!

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    वक्त कि बेबसी में हर कोई फस चुका है
    तिनके तिनके सा अब हर कोई उड़ चला है
    आंधी हे या तूफान इस मिट्टी में हर कोई राख सा हो चला है
    इस सन्नाटे की चीखों में हर कोई बेबस हो चला है
    प्रकृति को असहाय किया है अब सहारा लेने चला है।।


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  • inklifier 34w

    मनुष्य रूप धारण कर सुख ना पा सका और अंत समय सुख अनुभव करने के लिए नेत्र तरसते है।।

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    दर्द के मुसाफ़िर दर्द के ही रह जाते है
    टूट चुका हु यूं कहकर बिखर ही जाते है
    हर लम्हा अपनी सोच को दर्द में तब्दील कर देते है
    कुछ बचा नही यूं कह कहकर स्वयं ही सब कुछ खत्म कर देते है
    और अंत मृत्यु निकट देख सिर पिट पिट कर रोते है!


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  • inklifier 44w

    यूं काला टीका लगाकर मुस्करा दिया करती है
    किसी की नज़र ना लगजाए मन ही मन घबराया करती है
    हर ख्वाइशों को पूरा करने में जी जान लगा देती है
    निस्वार्थ प्रेम की परिभाषा का स्पष्टीकरण करती है
    केवल मां हि तो है जो सर्व श्रेष्ठ सम्पूर्ण होने का पद ग्रहण करती है।।

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  • inklifier 45w

    क्यू तू इस मोहि दुनिया मे सुकून की तलाश में घूमता है?
    तेरे पास ही है सब कुछ, तो फिर तु क्यू नजर घुमाकर नहीं ढूंडता हैं?
    इस मायावी दुनिया मे सब कुछ बहकर ही जाना है
    क्यू तू यूं टूट चुका... निष्कर्ष इसका कुछ नहीं निकलना है
    जो काम के लिए तू आया है तुझे बस वो करके जाना है
    तू जाना उनके दर पे जहां खुशिया अपार है
    क्यू भटकता इंसान तू सुकून की तलाश में?
    यहां हर इंसान तुझे समझे ये सम्भव नहीं
    पूरा टूट चुका हूं यूं कहकर इन पाखंडी गलियों मे ना घुमा कर
    हर राह में हर कण कण में तुझे कृष्ण दिखेगा बस सही नजर से देखा कर
    तेरे खुद मे परमेश्वर विराजे फिर भी तू जगह जगह भटकता है
    एक बार उसे सच्चे मन से पुकार बस तेरे पास ही बैठा है
    इस मायावी दुनिया के लोगो का इंतजार तुझे रहता है...
    पर पहले ये तो बता तेरे पुकारने पे कोई एक सेकंड मे आकर खड़ा होता है??
    तेरी पलके ना झपके उसके पहले तू उसे अपने पास पाएगा पर पहले ऐसा भाव तो ला की वो तेरे साथ रहता है।।


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  • inklifier 46w

    Where there is contention, there is hell, where there is devotion & Dedication, there is paradise!!



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  • inklifier 47w

    Viable individuals don't offer significance to their preferences; instead,they prioritize their feeling of purpose and pick appropriately.


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  • inklifier 47w

    We must remain the same in both conditions because the more we are grieving, the more misery will grow. And whatever we receive is derived from Our own deeds.

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    At the point when you are cheerful you appreciate the ride of life yet when you are miserable you need to get freed from everything!!
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