in_my_heart

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  • in_my_heart 1w

    ��������राधे राधे ��������

    कान्हा पूनम का हैं चंदा
    फिर उसका तेज क्यूं आधा हैं!
    लट श्यामन घुंघराली सी
    फिर लगती क्यूं वो सादा हैं!
    मुस्कुराहट उसकी जगमग जगमग
    आनंद क्यूं विहीन हैं!
    चलता हैं क्यूं डगमग डगमग
    जो सबको मार्ग दिखाता हैं!
    जो सबके विघ्नहर्ता हैं
    क्या उसकी भी कोई बाधा हैं?
    हां हैं...!
    क्यूंकि हैं तो वो अपूर्ण ही
    जब तक न साथ उसके राधा हैं
    जब तक न साथ उसके राधा हैं!
    पनघट पर हर मटकी तोड़ी
    माखन खाया करके चोरी!
    यमुना तट पर इसकी बंसी का धुन क्यूं सबको भाता हैं
    क्यूंकि इसके तो हर सुर में राधा हैं
    इसके तो कण कण में राधा हैं!
    सागर में बनाई द्वारका तो उंगली पर गोवर्धन साधा
    परंतु जिसके अश्रु कभी सह ना पाया
    वो थी तो केवल राधा वो थी तो केवल राधा!
    एकमात्र राधा हैं जिसने कृष्ण को साधा हैं
    इसलिए तो यदि नौका कृष्ण हैं तो पतवार राधा हैं
    जो पंछी कृष्ण हैं तो बयार राधा हैं
    कृष्ण हैं विस्तार तो सार राधा हैं
    कृष्ण की हर बात का आधार राधा हैं
    यदि शस्त्र कृष्ण हैं तो धार राधा हैं
    यदि सिंह कृष्ण हो तो दहाड़ राधा हैं
    इसलिए तो विरह के बाद कृष्ण पुनः लौट कर आता हैं
    क्यूंकि उसका एकमात्र लक्ष्य हैं
    जिसका नाम राधा हैं...
    यदि पाना हैं कृष्ण को तो राधा के हृदय को ढूंढो
    वो वही है जैसे गौरी के मन में शंकर हो
    जैसे गौरी के मन में शंकर हो...

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    ©in_my_heart

  • in_my_heart 2w

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    तुम ही हो हृदय मेरा...
    हो तुम ही भावना...
    मन में हो तुम्हीं...
    तुम्हीं हो मन की कामना...
    ©in_my_heart

  • in_my_heart 14w

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    रूठों जो तुम तो मनाऊं मैं...
    तुम हंस दो तो मुस्काऊं मैं...
    तुम बिन मुझे कुछ भाए ना...
    जहां देखूं तुमको ही पाऊं मैं...
    ©in_my_heart

  • in_my_heart 16w

    ❤️@r

    खुद से खफा करा कर ही माने...
    तुम हमें तुम बना कर ही माने...
    ©in_my_heart

  • in_my_heart 29w

    #prayasss70


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    ������️महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम्��️����


    अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
    गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।
    भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१॥


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    हे गिरिपुत्री, पृथ्वी को आनंदित करने वाली, संसार का मन मुदित रखने वाली, नंदी द्वारा नमस्कृत,पर्वतप्रवर विंध्याचल के सबसे ऊंचे शिखर पर निवास करने वाली, विष्णु को आनंद देने वाली, इंद्रदेव द्वारा नमस्कृत, नीलकंठ महादेव की गृहिणी, विशाल कुटुंब वाली, विपुल मात्रा में निर्माण करने वाली देवी, शिव की प्रिय, महिषासुर का अंत करने वाली, मां गौरी की जय हो, जय हो।।


    ����������जय मां गौरी ����������


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    ©in_my_heart

  • in_my_heart 30w

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    तू हकीक़त हैं...मैं सिर्फ़ एहसास हूं!
    तू समुंद्र...मैं भटकी हुई प्यास हूं!

    ©in_my_heart

  • in_my_heart 36w

    ❤️@r

    मुझे शोर नहीं,
    खामोशियां पसंद हैं...
    नयी सी लड़की हूं मैं,
    पुराने खयालातों की....

    ©in_my_heart

  • in_my_heart 39w

    जो दौड़ दौड़ कर भी नहीं मिलती
    वो संसार की तृष्णा हैं.....
    जो बिन दौड़े प्रेम से मिल जाता हैं
    वो राधा का कृष्णा हैं.....

    ��☺️��

    ����राधे राधे����

    ��कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं��

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    ©in_my_heart

  • in_my_heart 108w

    @r❤️

    ©in_my_heart