imgarima

Poet. Well Wisher�� I'm the girl who loves all the cultures and religion�� IG: @her_own_writes

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  • imgarima 21w

    शहर तेरा...!

    तेरे शहर में इतनी भीड़ है,
    कही लापता न हो जाऊ मैं,
    पकडे रखना हाथ मेरा,
    कही इस भीड़ में न खो जाऊ मैं...!!

    न रास्तों का पता मुझे,
    न यहां मेरा कोई ठिकाना है,
    जो फिरि नज़र तुम्हारी हमसे,
    कही पल भर में ओझल न हो जाऊ मैं...!!

    चारो तरफ फ़रेब यहाँ,
    मतलब के रिश्ते से खुद को घेरे है,
    संभाले रखना तुम हमेशा मुझको,
    कही इस तमाशाही शहर में तमाशा न हो जाऊ मैं...!!

    चेहरा एक नक़ाब हज़ार हैं,
    होते कुछ है, बनते कुछ और है,
    शहर में तेरे किरदार बहुत है,
    साथ रहना तुम हर वक्त मेरे,
    कहीं शोर से तेरे इस शहर,
    खामोश न हो जाऊ मैं..!!

    ~गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 21w

    मुझसे मत पूछना कभी मैं किस शहर से हूँ,
    मुझे हर शहर में घुल जाना है,
    मैं तो महज़ एक मुसाफिर हूँ जनाब!
    मुझे तो हर शहर से होकर जाना है...!!

    ~गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 21w

    गुजरे वक्त की हर याद,
    तस्वीरो में समा जाती है,
    देख कर पुरानी तस्वीर को फिर आंख भर आती है,
    यूं तो भूल भी जाए कुछ चेहरे असल जिंदगी में हम,
    मगर तस्वीरे देख कर हर याद गहरी हो जाती है...!!

    गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 21w

    रेलगाड़ी का सफ़र...!!

    एक शहर से दूसरे शहर,
    की और बढ़ना दिल का टुकड़ा,
    छोड़ जाने जैसा होगा,
    ये सफ़र रेलगाड़ी का आखिर तक,
    कितना कठिन रहा होगा...!!

    यादों को समेट कर बस्ते में,
    नमी आँखों से अपने शहर को देखा होगा,
    कितना भरा हुआ होगा मन तब,
    जब रुक कर अपनों को अलविदा कहा होगा...!!

    जब बैठ कर,
    रेलगाड़ी की खिड़की पर,
    पीछे छूटता सब देखा होगा,
    दिल तब कितना बेचैन हुआ होगा,
    घंटे भर का सफ़र शोर से,
    कुछ देर बाद थम गया होगा,
    कितना घबरा रहा होगा मन तब,
    जब पराए शहर की भीड़ में भी,
    शख़्स तनहा हो गया होगा....!!

    ~गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 21w

    कविता लिखने वाला शक़्स दुनिया को एक बदलाव की नज़र से देखता है,
    हम कवितायेँ केवल इसलिये नहीं लिखते क्युकी वो हमारा शौक होता है,
    हम कवितायेँ इसलिए भी लिखते है क्युकी कविताओं के माध्यम से समाज में सुधार लाने की हमेशा से ही इच्छा रहती है,
    कविताएं भले ही कमरे की चार दिवारी में लिखी जाए परंतु चर्चा उसमे हमेशा जमाने की ही की जाती है...!!

    ~गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 22w

    मैं हार कर भी इतना मुस्कुरा रही हूँ,
    तुम पा कर भी सब रो रहे हो,
    पाना खोना तो जिंदगी का एक हिस्सा है जनाब!
    तुम तो बेवजह का ही यूँ उदास हो रहे हो...!!

    ~गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 23w

    बनारस...!!

    बनारस केवल शहर नहीं,
    एक खूबसूरत सा एहसास है,
    भोले का रहता जहाँ हरदम वास है...!

    मन में आस्था,
    दिल में हर कोई प्रेम लिए फिरता है,.
    इस शहर में हैं ऐसी कुछ खास बात तो जो,
    यहाँ हर कोई अपना बना लिया करता है..!

    थका हारा मन भी ,
    सुकून पा लेता है,
    जो इंसान यहाँ गंगा नहा लेता है...!

    गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 23w

    जो चला गया बेहद प्यारा था मुझे,
    इस सफर में एक बार फिरसे उनसे टकराना था मुझे,
    अब हैं यादें साथ तो रुला ही देती है,
    ख्वाहिश थी कि आखिरी बार उन्हें देख कर मुस्कुराना था मुझे...!

    गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 24w

    अपनी परिस्थिति को शब्दों में पिरोकर,
    कागज़ पर उतार देती हूँ,
    लिख कर कविताएं मन का बोझ दबा देती हूँ,
    परेशान करता है भीड़ का हिस्सा बने रहना मुझको,
    इसलिए कलम के साथ जोड़ कर खुद को,
    कुछ देर सुकून का पा लेती हूँ...!!

    ~गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • imgarima 24w

    बेनाम रिश्ता ..!

    एक रिश्ता वो,
    जिसका कोई नाम नहीं,
    ख्वाबों में जरुर है, मगर दुनिया में कोई पहचान नहीं,
    एक रिश्ता है उनसे मेरा जिसका कोई नाम नहीं...!

    यादों में है वो साथ मेरे,
    मगर हकीकत में अब वो बात नहीं,
    मुड़ गये है अलग अपनी राहों में दोनों,
    पर फिर भी आज भी यादें है साथ कई,
    एक रिश्ता है उनसे मेरा जिसका कोई नाम नहीं...!

    गरिमा प्रसाद
    ©imgarima