hindiurdu_saahitya

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  • hindiurdu_saahitya 144w

    पिटारा की पाँचवीं किश्त के अंतर्गत किशोर जी रचना से आप सभी पहले ही परिचित हो चुके हैं, तो अब प्रथम स्थान प्राप्त यह दूसरी रचना साझा कर रहे हैं, जिसकी लेखिका है @shashiinderjeet जी, जिन्होंने पहले जुनून के प्रेरणादायी पहलू को चित्रित किया, फिर अंत में उन्हें नसीहत भी दी जो जुनून की हदें पार कर देते हैं, तो आइए पढ़ते हैं इनकी बेमिसाल रचना को...

    बदखूं =बुरी आदत वाला
    तासीर =प्रभाव
    सूरते इद =धुएँ की तरह

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    पिटारा ५

    जुनून है इक सोच जो दिल-ओ-दिमाग में ढल कर
    कर जाती है करिश्मा ख़्वाब हकीक़त में बदल कर
    .................................................

    जुनूँ पालेगा दिल में , जो जिगर भर कर
    जुनूँ के हौसलों के पंख उड़ा देंगे आसमाँ पर
    जुनूँ ही रखता है मादा पहुंचाने का मंज़िल पर
    जुनूँ ही करता है करतब ऊंचाईयों पर ले जा कर
    जुनूँ ने ही बुलंद किया झंडा चाँद मंगल पर
    जुनूँ बढ़ा रहा युवा को नयी बुलंदियों पर
    जुनूँ तो तोड़ता है चट्टानों से राह बना कर
    जुनूँ नयापन भरता है नयी-नयी खोज कर
    जुनूँ ही था जो क़ुर्बान हुये लाखों ही वतन पर
    जुनूँ ही था जो जल गये परवाने कईं इश्क़ पर
    ..................................................

    बदखूं के लिए अच्छी नहीं जुनून की तासीर
    सूरत-ए-इद हवा में गुम हो जाती है ज़िंदगी

    © शशि इंदरजीत

  • hindiurdu_saahitya 144w

    जुनून का जानलेवा पक्ष समाज की अनेक घटनाओं में दिखता है, शायद हमारी विचारधारा ही भ्रष्ट है अथवा हमारे मस्तिष्क में किसी विकृति का प्रभाव दिखता है। ऐसे ही दुःखद, शर्मनाक पहलुओं पर प्रकाश डाला है @kishor634 जी ने, जिनकी भाषा शैली कटाक्ष एवं व्यंग्य से सामाजिक समस्याओं को जगज़ाहिर करने की है, इतनी शक्तिशाली एवं सम्पूर्ण रचना को प्रथम स्थान मिलना बहुत ही स्वाभाविक है, इसलिए हमने पिटारा की पाँचवी किश्त के प्रथम विजेता के रूप में उनकी रचना को चुना है। तो आइए मिलते हैं इनकी ज्वलंत रचना से....

    #Junoon
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    इस परिणाम की घोषणा के साथ हम आपसे निवेदन करते हैं कि हमारी किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अपनी रचना को अनुशीर्षक (कैप्शन) में भी लिखें, अन्यथा या तो हमें परिणाम की घोषणा में विलम्ब होगा, अथवा हमें विवश होकर किसी और प्रविष्टि को विजेता चुनना होगा

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    पिटारा ५

    बंद पड़ी बाइबल-गीता, गुरु-ग्रंथ और क़ुरान है,
    हाय ! हया निज की गई, हैवान हुआ इंसान है।

    कुरुक्षेत्र धरा बनी, सैन्य बनी दुनिया सारी,
    रक्तपात बरसा रहा, प्रलय घटा कारी-कारी।
    काम, क्रोध और लोभ के गुण, पनप रहे हैं संतों में,
    पतझड़ जाकर फिर आ रहा, हरे-भरे वसंतों में।
    पुस्तक के कुछ पन्नों में, सिमट रहा अब ज्ञान है,
    हाय ! हया निज की गई, हैवान हुआ इंसान है।

    देश के रक्षक का धीरज, नौजवान कैसे आज़मा रहा,
    हथियारों से लैस गुटों पर, दिन में पत्थर बरसा रहा।
    पतित हुआ स्वदेश-प्रेम, लगा विरोध में नारा है,
    भारत नहीं अब भाग्य-विधाता, पाकिस्तान हमारा है।
    खाकर रोटी इस माटी की, इसे बेच रहा सरेआम है,
    हाय ! हया निज की गई, हैवान हुआ इंसान है।

    बच्चों के मन में विभीषिका, अविश्वास खूब फैलाते हैं,
    जब मासूमों के खून से अपने, रूह को रंगकर आते हैं।
    ऐसे वहशी दरिंदों का, बना अभी तक नर्क नहीं,
    ये कैसा 'जूनून' कि अपनी, पत्नी-बच्चों में फ़र्क नहीं।
    अखबार उठाते चहरे से, छीन रहा मुस्कान है,
    हाय ! हया निज की गई, हैवान हुआ इंसान है।

    सरकारी नौकर जनता पर, अपना स्वामित्व जता रहे,
    पहले "दी है" तो "लेंगे नहीं?", खुलेआम ये सूत्र बता रहे।
    चोर-मक्कार-गुनाहगार-भिखारी, सबकुछ बताए जा रहे,
    ये दीन-हीन तो बेमतलब, हर वक़्त सताए जा रहे।
    दौलत के टुकड़ों की खातिर, अब बेच रहा ईमान है,
    हाय ! हया निज की गई, हैवान हुआ इंसान है।

    "इंसान तेरे गुणधर्मों में, ये कैसा जूनून है?
    तुझे देख दूजा इंसान, खो रहा सुकून है।
    रखना ही है ग़र तुझे, तो ऐसा जूनून रख,
    दूसरों की जान बचे, अपने शरीर वो खून रख।
    नोंच दे बाधा-रूपी, दानवों के चेहरे को,
    अपने हाथ, तेज़-तर्रार, पजाए हुए नाखून रख।"

    © किशोर शुक्ल

  • hindiurdu_saahitya 145w

    जुनून... गर इंसान पर चढ़ जाए तो वह अपने क्षेत्र में मील का पत्थर बन सकता है, पर यदि हद से पार हो जाए, तो गर्त का रास्ता मीलों में नहीं, कदमों में तय करता है। ऐसे ही एक जुनून का नमूना हम कल देख चुके हैं, अतः इसपर लिखने में शायद ही कोई असुविधा होगी, इतना प्रासंगिक होने की वजह से हम पिटारा की पाँचवी किश्त का शब्द इसे ही बनाते हैं, बाकी सब आपकी रचनात्मकता पर निर्भर करता है, हमें आपकी प्रविष्टियों का इंतज़ार रहेगा...
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    समय सीमा- शनिवार, 14 जुलाई

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    पिटारा ५
    ‘जुनून’

  • hindiurdu_saahitya 145w

    एक बार फिर से @anamika_ghatak जी का कोटिशः आभार... ������

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    एक सन्देश...

    कितनी शर्म की बात है कि आज भी इस मंच पर शब्दों की चोरी होती है, पर आज हम एक बात साफ कर देना चाहते हैं कि ऐसे लोगों को हम कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते।
    हम आपलोगों से करबद्ध क्षमा चाहेंगे क्योंकि हमने एक ऐसी ही रचना साझा की थी, पर साथ ही हम अनामिका जी का आभार व्यक्त करेंगे हमें सच बताने के लिए, हमें ऐसे ही लोगों की आवश्यकता है जो इस संक्रमण से इस मंच को मुक्त करने का सामर्थ्य रखते हैं, इसलिए आवाह्न करते हैं सभी का इस मुहिम में हमारा साथ देने के लिए।
    साथ ही हम चेतावनी देते हैं ऐसे लोगों को जो अब तक ये समझते हैं कि साहित्य की चोरी से वे स्वयं को श्रेष्ठतर सिद्ध कर सकते हैं, और ऐसे लोगों की इस मरीचिका को तोड़ने के लिए सदैव तत्पर हैं।
    आज घटी घटना एवं इससे उत्पन्न असुविधा के लिए हम पुनः खेद प्रकट करते हैं।

  • hindiurdu_saahitya 145w

    स्मृति जी की लेखिनी के बारे में क्या कहा जा सकता है? इनकी लेखिनी स्वयं इतनी सशक्त और सर्वोत्तम है, कि हमारे शब्द हमेशा फीके पड़ जाते है, इस रचना में उन्होंने एक ऐसी बारिश की कल्पना की है, जिसकी सौंधी सुगंध इस धरती से कभी नहीं जा सकती... बदलाव की बारिश। क्या विषय है! अद्भुत... तो पेश है पिटारा प्रतियोगिता की चौथी किश्त के प्रथम स्थान की दूसरी दावेदार @smriti_mukht_iiha जी की यह रचना...

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    #hindiurdu_pitaara
    @hindiurdu_saahitya

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    पिटारा ४

    एक बारिश हो ऐसी भी कि....
    नेह बरसे यहाँ से वहाँ
    सुखद स्मृतियाँ गुदगुदायें
    ग़म सारा हो धुआँ-धुआँ!!

    एक बारिश हो ऐसी भी कि....
    द्वेष कपाट ख़ुल जाये
    कीचड़ में तन सना रहे
    मन-मैल स्वतः धुल जाये!!

    एक बारिश हो ऐसी भी कि....
    लहराये कोमल लतिका
    तीखी बिज़ली न छू पाये
    उजड़े नहीं कोई वाटिका!!

    एक बारिश हो ऐसी भी कि....
    बैल मगन हों नृत्य करें
    खिल जायें सूखे चेहरे
    भंडारक सबको तृप्त करें!!

    एक बारिश हो ऐसी भी कि....
    विरह अग्नि बुझ जाये
    मिलें नैन पिया से और
    मयूर हृदय फिर इठलाये!!

    एक बारिश हो ऐसी भी कि....
    बूंद सी पावन वाणी हो
    सद् भाव की माला में गुंथी
    सत्कर्म ही प्रेरक निशानी हो!!

    ©स्मृति मुक्त ‘ईहा’

  • hindiurdu_saahitya 145w

    बारिश की बूँदें डाकिया ही तो हैं, जो सागर का संदेश लेकर आते हैं और वसुधा के विरह की प्यास बुझाते हैं.... और इसी संबंध को बहुत ही बेहतरीन तरह से दर्शाया है @vishakha_bhartiye जी ने जिन्होंने पिटारा प्रतियोगिता की चौथी किश्त के प्रथम विजेता के स्थान में अपनी दावेदारी सुनिश्चित की है... तो आइए, बिना आपका समय गँवाएँ हम आपको पढ़ाते है विशाखा जी की यह रचना...

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    #hindiurdu_pitaara
    @hindiurdu_saahitya

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    पिटारा ४

    कहते हैं के जब कोई मोहब्बत में होता है,
    तो उसके चेहरे की खूबसूरती बढ़ जाती है,
    आज देख इस निखरी धरा को
    ये बात साबित भी हो जाती है।

    ये बारिश आज यू्ँ ही नहीं आई है,
    ये तो पैगाम अंबर का धरा के लिए लाई हैं।

    प्रेम की बूँदों में आज जो ये धरा नहाई है,
    ना जाने कितने इंतज़ार के बाद
    ये मिलन की घड़ी जीवन में इसके आई है।

    ये बूँदें जब इसके बदन पर गिरती है,
    तब असंख्य अंकुरित पुष्पों के रूप में
    इनकी मोहब्बत खिलती है।

    यूँ तो दरमियाँ इनके मीलों की दूरियाँ समाई हैं,
    पर ये दूरियाँ भी इनकी मोहब्बत को
    कहां कमज़ोर कर पाई है।

    पर इस इंतज़ार के सब्र का बांध जब टूटता है,
    तब आंसुओं का सैलाब बारिश बन फूटता है।

    हाल-ए-दिल अंबर का ये बूँदें धरा को सुनाती है,
    और इस तरह ये बारिश अंबर-धरा के मिलन का
    ज़रिया बन जाती है।

    ©विशाखा भारतीय

  • hindiurdu_saahitya 147w

    बीते कुछ दिनों में व्यस्तता के कारण हम इस मंच पर सक्रिय नहीं थे। लेकिन आज हम फिर से ले आए हैं पिटारा की अगली किश्त! पूरा भारत आज मानसून में भींग रहा है, बारिश जिसे साहित्य में अनेकों तरह से पेश किया गया है, किसी को इसमें किसान की आकांक्षा दिखती है, तो कोई इसे प्रेम का सूत्रधार मानता है, कोई इसे देवताओं की तरफ़ से धरा के लिए भेंट कहता है, तो किसी को इसमें निश्छल से बालपन का प्रतिबिंब दिखता है। नज़रिया चाहे जो हो, पर नतीजा खूबसूरत ही होता आया है, तो आइए कुछ लिखते हैं बारिश पर, आपके नज़रिए में....

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    #baarish
    #hindiurdu_pitaara
    #HUnetwork
    @hindiurdu_saahitya

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    पिटारा- ४
    'बारिश'

  • hindiurdu_saahitya 149w

    सर्वप्रथम तो ‘चित्रात्मा’ के पहले ही भाग के परिणामों की घोषणा में हुए विलम्ब के लिए हम करबद्ध क्षमाप्रार्थी हैं....
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    तो पाठकों! अब समय आ गया है परिणाम का। हालांकि हमें इस बार भी कम ही प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, पर जितनी भी मिली, सभी उच्च कोटि के विचारों और अद्भुत शब्दचित्रण से ओतप्रोत थी। सबसे पहले तो हम सभी प्रतिभागियों का आभार प्रकट करेंगे, हमारे इस नूतन अभियान से जुड़ने के लिए।

    तो ‘चित्रात्मा’ के पहले भाग की विजेता हैं @smriti_mukht_iiha जी, जिन्होंने वाकई दिए गए चित्र की आत्मा तलाश ली! एक बीज के जन्म से उसके भविष्य का ऐसा चित्रण अद्भुत और अद्वितीय है... शब्द चयन बहुत ही उच्च कोटि का एवं विचार तो सर्वोत्कृष्ट! हिन्दी-उर्दू साहित्य की ओर से उन्हें अनेकों बधाइयाँ।

    #chitraatma
    #HUnetwork

    @ayush_tanharaahi @springspeaks @bepanaah_raaj

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    चित्रात्मा १

    एक बूंद टूटी जब आकाश से,
    वसुधा की कोख़ में समा गई।
    बीज- माटी का हाथ थामकर,
    मेघ की छाया तले वह आ गई।

    नवीन जीवन का संचरण,
    उम्मीदों का अवतरण।
    कोमल पल्लवित अंकुरण,
    हरियाली का प्रस्फुटन।

    सींचो नेह से इसे प्रतिदिवस,
    अनुराग जोड़ लेगी।
    हर कली फूटेगी ज्यों तो वह,
    मनराग बोल देगी।

    आपसी देखो यह व्याकरण,
    संतोषी प्रति चरण।
    नव कुंज गली में आगमन,
    सार्थक यहाँ मरण।

    ©स्मृति मुक्त ‘ईहा’

  • hindiurdu_saahitya 150w

    एक सच्चा साहित्यकार वही है जिसे निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन की ज्योति दिखाई दे, तो आइए हम ही इस कार्य में आपकी सहायता किये देते हैं , चित्रों के माध्यम से, तो आज से हम शुरू कर रहे हैं ‘चित्रात्मा’, एक अभियान जिसमें आपको तलाशनी है चित्रों की आत्मा, हाँ! सही पहचाना आपने, चित्रों में भी वही आत्मा है जो हममें और आपमें है, बस ज़रूरी है कि हम तलाशने की कोशिश तो करें।
    इस अभियान के अन्तर्गत हम आपको एक चित्र देंगे, जिसे आप जिस दृष्टिकोण से देखेंगे, उसे बस आपको काग़ज़ पर उतारना है। बस हमें देखना है हमारे पाठकों के विचारों की विविधता को। तो आज इस अभियान का आरम्भ हम इस चित्र से कर रहे हैं, आपकी सुविधा के लिए हम इस चित्र के विषय में कुछ भी नहीं लिखेंगे। तो बस लग जाइए इस अभियान की सार्थकता सिद्ध करने में...

    १. कृपया दिए गए चित्र को save कर के इसका प्रयोग अपनी प्रवृष्टि में करें।
    २. अपनी रचना को केवल अनुशीर्षक (caption) में ही लिखें।

    इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए निम्नलिखित हैशटैग्स और टैग का प्रयोग करें-

    #chitraatma
    #HUnetwork
    @hindiurdu_saahitya

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    चित्रात्मा

  • hindiurdu_saahitya 151w

    पिटारा की तीसरी किश्त में @kaaran जी की विजेता प्रविष्टि हम पहले ही साझा कर चुके हैं, अब हम साझा कर रहे हैं @vandna जी की रचना, जिन्होंने इस रचना में कोशिश शब्द की आवृत्ति से विशेष सौंदर्य उत्पन्न किया है। तो आइए पढ़ते हैं उनकी रचना.....

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    पिटारा
    (भाग ३)


    जितनी बार कोशिशों से वक़्त ने हमें तोड़ा है,
    उतनी बार कोशिशों से हमने खुद को जोड़ा है,
    कोशिशें तो हम ने की कि मिथ्या है संसार याद रहे,
    कोशिशों ने कोशिश की कि हम भूले न कुछ भी,
    सब कुछ हमें याद रहे,

    कोशिश कोशिश खेलते हम,
    कोशिशें करना सीख गए,
    कोशिशों के काफ़िले में,
    कोशिशों के संग हो लिए

    ©वन्दना