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  • hindinama 9h

    @anita_sudhir जी की रचनाएं पढें,

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    रामनवमी के उपलक्ष्य पर इनकी ये एक अद्भुत प्रस्तुति,

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    आपको और आपके पूरे परिवार को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
    ��������

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    श्री राम

    राम राम बस राम मय, हृदय बसे श्री राम।
    बीज मंत्र दे राम का,पतित पावनी धाम।।


    ~~



    चिंतन दर्शन राम का,है जीवन आधार।
    आत्मसात कर राम को,मर्यादा है सार ।।

    मर्यादा है सार ,भक्ति से शीश झुकायें।
    कौशलेय हरि नाम,हृदय को अति हर्षाये।।

    अयन कथा प्रभु राम,भरे उजियारा तन मन।
    मिले मोक्ष का द्वार,करे जो प्रभु का चिंतन।।
    ©anita_sudhir

  • hindinama 1d

    पूर्णत सकारात्मक न सोचना भी,
    नकारात्मकता का एक रूप है!
    ©hindinama

  • hindinama 4d

    ©

  • hindinama 1w

    @_bahetiankita जी की रचनाएं पढ़ें,

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    माँ के लिए जो भाव हर एक व्यक्ति के होते है,
    उनको बहुत ही भाव पूर्ण तरीके से दर्शाया है, अंकिता जी ने,
    बहुत अच्छी रचना) :

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    माँ

    क्या कहूं? क्या लिखूं?
    कहां तू शब्दों में समाएगी?
    कहां किसी पोथी या ग्रंथ में बंध पाएंगी?
    तू ही मुझे इस दुनिया में लाने का स्त्रोत
    तू ममत्व, निश्छल प्रेम, वात्सल्य से ओत प्रोत
    तू चंचला सम सदैव हर लेती हर दुःख को
    पद पड़ते जहां तेरे खुशियां आ जाती उस ओर
    जब भी संशय में घिरे, तू आशा की लौ बनी
    गिरना नहीं बुरा, उठ आगे बढ़ने की तू ने सदैव समझ दी
    स्वाभिमानी तू ने सदैव देना ही जाना
    प्रत्युपकार में कुछ ना मांगा ना चाहा
    कभी शिथिल हो, जब पथभ्रष्ट हो जाते
    तब आज भी तेरे अविरल संघर्ष को देख प्रेरणा पाते
    जीवनदायिनी, तुझे शत शत नमन
    तेरे ऋण को मैं मां कैसे चुकाऊं?
    बस यही मांगू हर जन्म में तुझे ही मातृरूप में पाऊं।
    © Ankita baheti

  • hindinama 2w

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें

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    #Hindinama

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    तुम खुद में, मुक्कमल रहो,
    सुकून गैरों में, तलाशे नहीं मिलते!
    ©hindinama

  • hindinama 2w

    @dipsisri जी की रचनाएं पढ़ें,
    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    बहुत अच्छी रचना की है दीपसी जी ने,

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    वास्तव में तो हम एक दूजे का हाथ कभी थाम ना सके,
    तो आज मैं अपने कविताओं के आसमां में सैर करने जा रही हूं।
    चलोगे मेरे साथ?

    कितना खूबसूरत होगा ना ये सफर जिसकी सीढिय़ां तुम्हारे ख्यालों की बनी होंगी।
    जिन फिज़ाओं में तुम्हारी यादों की खुश्बू होगी।
    जिस आसमां में तुम्हारे चेहरे का तेज़ उज्जवलित सूर्य के समान होगा।

    जहां तुम्हारी वो मनमोहक चमकीली मुस्कान बादलों में झूमते चांद सी होगी।
    और तारों का टिमटिमाना ऐसा होगा जैसे तुम अपनी पलकें झपका रहे हो।
    और चारों ओर तितर-बितर हुई घटायें बिल्कुल ऐसे होंगे
    जैसे तुम्हारे बिखरे बाल।

    वास्तविकता में तुम मेरे ना हो सके,
    तो काल्पनिक रूप से ही सही तुम मेरा 
    हाथ थामों और चलो इस सफ़र में मेरे संग
    जहां मैं अपने मौन के नीचे दबी सारी बातें 
    तुमसे जाहिर कर सकूं"।

    तो बताओ,

    'चलोगे ना'?

    ~दीपसी श्रीवास्तव

  • hindinama 3w

    @himanshibajpai जी की रचनाएं पढ़ें,

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें!

    बहुत ही भाव पूर्ण रचना है ये,):

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    क्या गलत ? क्या सही?

    लड़की का अनजान से बात करना गलत है। 
    तो क्या अनजान के साथ विदा होना जाना सही है? 

    लडकी का खुलकर हँसना गलत है। 
    तो क्या शर्म से मरना सही है? 

    क्यों सही है अपना दर्द छुपाना? 
    क्यो गलत है उसे सबको बताना? 

    क्यों गलत है घर से अकेले निकलना? 
    क्यों सही है घर में दुबकना? 

    अगर बेटियाँ घर की इज्ज़त है ।
    तो गलत है उन्हें पराया धन कहना। 
    तो गलत है उन्हें घर का न जन कहना। 
    तो गलत है कभी न उनका मन लेना। 

    अगर ये सही है कि बेटियाँ सिर्फ़ मेहमान है। 
    तो मिलता क्यों नही है वो मेहमान वाला सम्मान है। 
    तो क्यों करती वो घर का काम है।
    तो क्यों नहीं माना जाता इस मेहमान को भगवान है। 

    क्या गलत है? क्या सही है? 
    मेरा जवाब यही है

    बेटियाँ न पराया धन है न चार दिन की मेहमान 
    भरोसा रखो उन पर एक दिन बन जाएंगी आपका अभिमान।
    ~HIMANSHI

  • hindinama 4w

    @feelingsbywords जी की रचनाएं पढ़ें,

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    निधि जी ने बहुत अच्छा लिखती है) :

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    स्याही की हर बूंद मेरे दर्द की कहानी है,
    जो कभी बेसुद सी तो कभी खिलती जवानी है,
    अश्क ना गिरने दिया मेरी स्याही ने कभी,
    खुद पन्नों पर बह गयी कैसी ये दीवानी है!
    ~feelungsbywords

  • hindinama 4w

    @mamtapoet जी की रचनाएं पढ़ें!

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    बहुत अच्छी रचना) :

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    जब काग़ज़ पर शब्द लिखूँ,
    तुम भाव समझ लेना।
    जब कुछ न लिखूँ
    बस तुम्हें तकूँ
    तब मन के जज्बात समझ लेना।।
    ~mamtapoet

  • hindinama 4w

    @vipin_bahar जी की रचनाएं पढ़ें,

    हिन्दी लेखनी को बढावा दें,

    विपिन जी वाकई बहुत अच्छा लिखते है!

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    ना चाहते हुए भी हाथ मिलाए जाते है!
    कुछ रिश्ते ज़बरदस्ती निभाए जाते है!!
    ~vipin_bahar