hindikavita

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Reposts
  • hindikavita 14w

    Ye zindagi hai katghara
    Mai katghare me hun khada
    Swaalon se ghira pada
    Jara sa main dara dara

    Ilzaam hain kai lage
    Saboot sab khilaf hain
    Gawah bhi hain bolte
    Ki dosh mera saaf hai

    Sawaal hain kai khade
    Par ek sabka saar hai
    Jawaab jo na sun rhe
    Wo mere saajhedaar hain

    Geeta pe rkha haanth hai
    Par baaton ki kadar nhi
    Maine isse jyada kya karun
    Mujhe bhi khud khabar nhin

    Ab faisle ko aane me
    Na jaane kitni der hai
    Ye bhi nhi main janta
    Ki der hai ya andher hai

    #life #hindi #poetry
    @mirakee @hindiwriters @miraquill

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    Ye zindagi hai katghara
    Mai katghare me hun khada
    Swaalon se ghira pada
    Jara sa main dara dara

    Full piece in caption
    ©hindikavita

  • hindikavita 37w

    Politics

    Modi ne kaha maans chod do
    Yogi ne kaha romance chod do

    Left ne kaha EVM chod do
    Bjp ne kaha CPM chod do

    Bhakton ne kaha desh chod do
    Petrol ne kaha ab race chod do

    Arnab ne kaha aazaadi chod do
    Ravish ne kaha jihaadi chod do

    Nitish ne kaha Vimal chod do
    Tejaswi ne kaha kamal chod do

    Didi ne kaha phool chod do
    Dada ne kaha harbaar ki bhool chod do

    Ek din aayega jab wo kahenge duniya hi chod do.....
    ©hindikavita

  • hindikavita 38w

    .

  • hindikavita 41w

    अश्कों में बिखर जाए उसे शायर नहीं कहते
    जो इश्क में मर जाए उसे कायर नहीं कहते
    करते हैं सितम खुदपे जो उनकी याद में
    क्यूं उनको जहां वाले सितमगर नहीं कहते

    दर्दे बयां है करता हर एक काफिया उनका
    पर अपने महबूब को वो कभी काफ़िर नहीं कहते
    और टूटते है दिल भी उनके कराह कर
    इजहारे मोहब्बत जो खुलकर नहीं कहते

    ©hindikavita

  • hindikavita 43w

    तेरी आँचल के दामन में
    आज खो जाने दे मुझको
    बहुत थक चुका हूँ मैं
    अब सो जाने दे मुझको

    कि शायद वो सुकूँ मिले
    जिसे ढूढ़ता हूँ फिर रहा
    कि शायद वो जुनूँ मिले
    जिसे राह में है खो दिया

    तू हाँथ सर पे फेर दे
    मैं स्वप्न में खो जाऊंगा  
    तू इकबार तो पुकार माँ
    मैं ये जंग छोड़ आऊंगा

    ©hindikavita

  • hindikavita 44w

    बिखरी है राख राहों पर सुबह सुबह
    मानो कोई ख्वाब जला हो अभी अभी
    हिलती है साख पेड़ों पर सुबह सुबह
    मानो कोई दूर उड़ा हो अभी अभी
    कुछ पत्ते गीले दीखते हैं
    मानो अश्क समेटें खुद में हों
    मद्धम मद्धम सी हवा भी है
    बेताब हुई कुछ कहने को
    क्या लौट के फिर वो आएंगे
    इक रात सिरहाने पर मेरे
    या फिर से गुल हो जाएंगे
    जब नींद खुलेगी सुबह सुबह

    क्या कल वो फिर से चहकेंग्गे
    जिसने रात बिताए क्रंदन मे
    बेचारे वो सारे पंछी
    जो लौट ना पाए उपवन में
    क्या कल वो फिर से टर्राकर
    ईश्वर से गुहार लगाएंगे
    आश लगा के बैठे थे जो
    भूतल के वो सारे मेंढक
    क्या ओस की बूंदे कर पाएंगी
    शीतल उनके बीते कल को
    या सूरज की किरणे लायेंगी
    उजियारे में उनके मन को
    कैसे उनको आश मिलेगी
    फिर से मेहनत करने की
    टूटा मन क्या जुड़ पाएगा
    जब नींद खुलेगी सुबह सुबह
    ©hindikavita

  • hindikavita 56w

    कर्मों में कुशलता है
    पर लगती हाथ विफलता है
    चाहे जितने भी यत्न करूं
    परिणाम वहीं निकलता है
    मन में उठती हैं दुविधाएं
    पर कुछ ना मैं कर पाता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं

    हूं कोसता नियति को अक्सर
    हांथों में लकीरें खोजता हूं
    मैं वर्तमान में बैठ के भी
    भूतकाल की सोचता हूं
    अवरुद्ध कंठ की पीड़ा से
    मैं फिर कुछ ना कह पाता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं

    हृदय में हैं उन्माद बहौत
    मस्तिष्क कोप में जलता है
    हैं हस्त बंधे परिणामों से
    और पांव तनिक ना चलता है
    तिरस्कार के दागों से मैं
    फिर ना खुदको धो पाता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं

    संघर्षों के मेले में
    राहों में अकेले में
    अथक मैं चलता जाता हूं
    मैं अपनी बात बताता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं
    मैं बस चुप सा रह जाता हूं।

    @mirakee @hindiwriters @mirakeehindiwriters @writersnetwork

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    ©hindikavita

  • hindikavita 58w

    उम्मीदों की कश्ती को डुबोया नहीं करते
    मंज़िल दूर हो तो थक कर रोया नहीं करते
    रखते हैं जो दिल में उम्मीद कुछ पाने की
    वो लोग जिन्दगी में कुछ खोया नहीं करते
    मंज़िल से आगे बढ़ कर मंज़िल तलाश कर
    मिल जाए तुझको दरिया गर तो समंदर तलाश कर

  • hindikavita 58w

    मैं चंचल तेज कटारी सी
    तुम शान्त नदी का धार प्रिये
    मैं सुलग रही चिंगारी सी
    तुम बुझा हुआ अंगार प्रीये
    मैं नौका के सवारी सी
    जिसके हो तुम पतवार प्रीये
    मैं नन्हीं राजकुमारी सी
    जिसके तुम राजकुमार प्रीये

    मैं रमदान की इफ्तारी सी
    तुम रोज़े का निसार प्रीये
    मैं छोटी नन्हीं क्यारी सी
    तुम उसमे बहता धार प्रीये
    मैं खुली हुई तिज़ोरी सी
    जिसके तुम पहरेदार प्रीये
    मैं भावुक चित्रकारी सी
    जिसमें छुपा तुम सार प्रीये

    ©hindikavita

  • hindikavita 83w

    Baaton pe meri muskurane ka sukriya
    Gaanon pe mere gungunnane ka sukriya
    Kuch pal mere sang bitane ka sukriya
    Khwabon me hi sahi aane ka sukriya

    Kya kal bhi isi tarah aaogi tum
    Mere sapne ko phirse sajaogi tum
    Usi pyaar se mujhko bulaogi tum
    Mujhpe haq apna jataogi tum