hindikavi

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@ekhindikavi on Instagram |.. "हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन दुनिया से यारी क्या .. रहे आज़ाद या जग में, हमन से होशियारी क्या"

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  • hindikavi 121w

    बस स्पर्श मात्र के लिए ही नहीं
    आशीष देने को उठी ही नहीं
    अंगूठियों में कैद होने को ही नहीं

    कुछ अंगुलियाँ पूरा कथ्य होती हैं।

    बालों से फिरती हुई कँघियों सी
    मानो जीवन सँवार रही हों

    रौशनी के सामने भंगिमाओं में
    हर बात कह जाती बिना शब्दों के

    रौशनी के पीछे किसी सतह पर
    छाया ही छवि है का भान देती हैं।

    और कभी जब थामती हैं बूंदों को
    बारिश के ज़मींदोज़ हो जाने से पहले
    मानो मिला रही वो आखिरी पोषण

    अंगुलियों को ज्ञात हैं दश दिशाएँ भी
    मगर हर बार प्रेम का रुख करती हैं

    शरीर की सुदूरतम पहुँच हैं अंगुलियाँ।

    ©hindikavi

    @hindikavi @hindiwriters @kavyodaya @hindilekh #hindilekh @readwriteunite @reposter24 @anjana #hindi #hindikavita #hindikavi #urdu #urdushayari #readwriteunite #23Jun2019 #writersnetwork #writersofmirakee #pod

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    और कभी जब थामती हैं बूंदों को
    बारिश के ज़मींदोज़ हो जाने से पहले
    मानो मिला रही वो आखिरी पोषण

    अंगुलियों को ज्ञात हैं दश दिशाएँ भी
    मगर हर बार प्रेम का रुख करती हैं

    अस्तित्व की सुदूरतम पहुँच हैं अंगुलियाँ।

    ©hindikavi

  • hindikavi 123w

    '”ट्यूज़डे त्रिवेणी"
    ---
    Article 370 - Grants special status to J&K.
    Article 35A - Empowers the state assembly to define 'permanent residents' for bestowing special rights and privileged on them.
    ~
    यूँ किया कि अपना समझा, हमने तुम्हें प्यार भी किया
    शर्त पर मगर रही हर चाह, क्या खूब ही आईन तुम्हारा

    वो पैंतीस नखरे तुम्हारे ये तीन सौ सत्तर कोशिशें हमारी

    ©hindikavi
    ---
    @hindikavi @hindiwriters @kavyodaya @hindilekh #hindilekh @readwriteunite @reposter24 @anjana #hindi #hindikavita #hindikavi #urdu #urdushayari #readwriteunite #11Jun2018 #writersnetwork #writersofmirakee #pod
    #ट्यूज़डे_त्रिवेणी #हिंदीकवि #TuesdayTriveni

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    यूँ किया कि अपना समझा, हमने तुम्हें प्यार भी किया
    शर्त पर मगर रही हर चाह, क्या खूब ही आईन तुम्हारा

    वो पैंतीस नखरे तुम्हारे ये तीन सौ सत्तर कोशिशें हमारी

    ©hindikavi

  • hindikavi 126w

    सोने का पीतल पर चढ़ना
    बस आवरण की बात नहीं है
    खुद की आत्मा को बेच
    बन जाना होता है सोना
    महँगा, चमकदार
    बहुतों की पहुँच से दूर
    और शुद्ध, और शुभ, और विशिष्ट
    और जीना पड़ता है सहमा सा जीवन
    रंग उतर जाने के भय में
    ना कोई सोना रह जाता है ना पीतल

    ©hindikavi

  • hindikavi 133w

    चटनी
    ——
    ज़्यादा परिमाण में नहीं
    बस उचित जितना
    स्वाद खिल जाता है
    उसके होने से

    दिनचर्या को शाम की चाय
    मौलवी को इज्तिमा मेला
    धोबी को पानी जाने का वक़्त
    नई माँ को बच्चे का दिन में सोना
    दफ़्तर को नेटवर्क का जाना
    और ना जाने क्या-क्या, किस किस को

    बस एक उँगली ही सही,
    चटखारे लेना किसे पसंद नहीं।
    ~
    ©hindikavi
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    चटनी
    ——
    ज़्यादा परिमाण में नहीं
    बस उचित जितना
    स्वाद खिल जाता है
    उसके होने से

    दिनचर्या को शाम की चाय
    मौलवी को इज्तिमा मेला
    धोबी को पानी जाने का वक़्त
    नई माँ को बच्चे का दिन में सोना
    दफ़्तर को नेटवर्क का जाना
    और ना जाने क्या-क्या, किस किस को

    बस एक उँगली ही सही,
    चटखारे लेना किसे पसंद नहीं।
    ~
    ©hindikavi

  • hindikavi 133w

    देहरी पर देर दोपहर तक उम्मीद में
    दोहरे हो रहे थे हम
    फैलाव में अपने फूल कर ख़ुदगर्ज़ हो
    खुद सो रहे थे हम

    मकान जिनमें माह कम मौसम बहुत थे
    वहीं फिर मूक हो रहे थे हम
    रास्ते जिनकी रब्त मे रहनुमा बने मगर
    सफ़र में रीत हो रहे थे हम

    हमारी हसरतें हासिल हुई क्या कौन जाने
    हँसी आने को थी पर रो रहे थे हम
    कमी थी कौन सी किस को पता था
    जो कामिल भी नहीं वो खो रहे थे हम

    ढोऊँ इसे या ढ़ालूँ तुम्हारी शक्ल में कविता
    असल में ढाई आखर ढो रहे थे हम
    शमा करते जरा रौशन जब शाम थी आयी
    डूबा था वो मगर शब हो रहे थे हम
    ~
    ©hindikavi

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    हमारी हसरतें हासिल हुई क्या कौन जाने
    हँसी आने को थी पर रो रहे थे हम
    कमी थी कौन सी किस को पता था
    जो कामिल भी नहीं वो खो रहे थे हम



    ©hindikavi

  • hindikavi 134w

    गले की घंटियाँ
    ----------------

    तुम इतना हिलते क्यों हो
    और इतनी आवाज़, उफ़्फ़ !
    कभी कंधे हिलाये पैर बहकाये
    कभी थूथनों से बाहर
    निकाल दी उफनती झाग
    हालाँकि खीझ निकालना चाहते थे न तुम।

    जरा सी नकेल ही तो कसी है
    और बेदम हुए जा रहे हो
    यूँ ही नहीं हो पाता
    जो हासिल चाहते हो तुम
    बिना सवाल पूछे यंत्रवत रहो
    सच में आदमी बनना चाहते थे न तुम।

    तुम्हें निवाला चाहिए था
    बस कुछ चक्कर काटते ही
    और मुँह पर बँधे जाले ने
    टपकती लार को कब रोका था
    और कुछ नहीं तो कम से कम
    निवाले की जुगाली बनना चाहते थे न तुम।

    तुम्हारे गले की घंटियाँ सुनाती हैं
    ख़ुद तुम्हारे बंधे होने का राग
    किसी और के हाथों ही सही
    झुक कर ताज़पोशी तुम्हीं ने करायी
    कैलाश भी पहुँच सकते थे मगर
    बिना बल के बैल बनना चाहते थे न तुम।

    ~ हिंदी कवि
    २८ मार्च २०१८

    ©hindikavi

    ~
    @hindikavi @hindiwriters @kavyodaya @hindilekh #hindilekh @readwriteunite @reposter24 @anjana #hindi #hindikavita #hindikavi #urdu #urdushayari #readwriteunite #28Mar2019 #writersnetwork #writersofmirakee #pod

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    जरा सी नकेल ही तो कसी है
    और बेदम हुए जा रहे हो
    यूँ ही नहीं हो पाता
    जो हासिल चाहते हो तुम
    बिना सवाल पूछे यंत्रवत रहो
    सच में आदमी बनना चाहते थे न तुम।

    ©hindikavi

  • hindikavi 135w

    मैं झूमता हूँ तार पर सितार के
    मकान झूमते हैं
    मैं झूमता हूँ जब भी तेरे प्यार में
    निशान झूमते हैं

    ये तार भी सितार से बँधा हुआ
    है कह रहा धुन छेड़ ले ओ माहिया
    ये धुन है मन से मन की, ये लगी है
    किस लगन की, सुन मेरे पिया
    मैं मुस्कुरा रहा हूँ मैं अब मैं कहाँ हूँ
    जहान झूमते हैं

    ये प्यार भी कभी तुम्हें पुकारता है
    और चुप, पड़ा कभी निहारता है
    जिसको देख कर मेरी निगाह की
    चमक में तुझको ही सँवारता है
    निशान में जो तू दिख गया तो ये
    नादान झूमते हैं

    अभी तो दौर-ए-इश्क़ सफ़र जारी है
    मिलेंगे हम ज़रूर कौन सी दुश्वारी है
    बरअक्स है भले ज़माना ये, पल भर
    की दूरी अपनी उनकी गमख़्वारी है
    सफ़र ये चाहतों के बादलों के फ़ाहे से
    सामान झूमते हैं

    मैं झूमता हूँ जब भी तेरे प्यार में
    निशान झूमते हैं
    ~
    ©hindikavi

    ~
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    ये तार भी सितार से बँधा हुआ
    है कह रहा धुन छेड़ ले ओ माहिया
    ये धुन है मन से मन की, ये लगी है
    किस लगन की, सुन मेरे पिया
    मैं मुस्कुरा रहा हूँ मैं अब मैं कहाँ हूँ
    जहान झूमते हैं

    मैं झूमता हूँ जब भी तेरे प्यार में
    निशान झूमते हैं

    ©hindikavi

    (पूरा पढ़ें, कैप्शन में)

  • hindikavi 135w

    धोखा हर तरफ़ मौजूद है तुम छोड़ने को आमादा हो
    उसने ये कहा कि यूँ कहा मैनें कहा तुम बेहूदा हो

    मतलब में बहुत आवाज है दैर-ओ-हरम ख़ामोश है
    तुम्हारी फ़िक्र चुप है और खुद बनते निदा हो

    कभी जो राह आये काँटे तो बदल ली तुमने मंज़िल ही
    जेहन मे आदतें बचने की और कहते हो फ़िदा हो

    यही इक बात कि मिल जाये मुझ को मसनद-ए-आलिम
    ज़रा कुछ सो भी लो ‘आशी’ अजल से ख़्वाबिदा हो

    ©hindikavi

  • hindikavi 137w

    '”ट्यूज़डे त्रिवेणी"
    ---
    मिग हो भले मर्ग, है सुखोई का सुख बाक़ी
    सुर्ख़ जान हर बार मगर आदमी की जाती है

    ये रायशुमारी का दौर है फिक्रमंद हैं सब

    ©hindikavi
    ---
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    मिग हो भले मर्ग, है सुखोई का सुख बाक़ी
    सुर्ख़ जान हर बार मगर आदमी की जाती है

    ये रायशुमारी का दौर है फिक्रमंद हैं सब

    ©hindikavi

  • hindikavi 137w

    वक़्त की शुरुआत से फँसता रहा है
    भला आदमी हर दौर में तन्हा रहा है

    रंग रोगन हो तो पत्थर भी जुबांफरोश हैं
    सादे फूलों पर मगर पहरा रहा है

    मुस्कुराने के कई अंदाज हैं जानिब
    आँख से मोती मगर बहता रहा है

    किस मुरब्बत ने यहाँ अच्छा कहा तुमको
    सीरत भर से कौन कब अच्छा रहा है

    बात भर ना कहने की है सच सुनो ‘आशी’
    अच्छी तासीर का स्वाद कड़वा रहा है

    ©hindikavi