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  • himaanshi 7w

    साहस

    दिखे है जो झरोखे से नभ केवल नहीं उतना।
    माना है जितना हमने भी जग केवल नहीं उतना।।
    विस्तृत है धरा , नापे गये कदमों से भी ज्यादा।
    साहस भीतर हमारे है हमारी सोच से ज्यादा।।
    ©himaanshi

  • himaanshi 7w

    जीवन सार

    मिला है जीतना भी हमको सभी को यूँ नही मिलता
    रखो संतोष क्षणभर का सबर का फल यूहीं फलता
    सूपथ पर चलते तुम जाओ कर्मठ तुम सदा रहना
    नियंत्रण जिह्वा पर हो गर कभी अपयश नहीं मिलता ।।
    ©himaanshi

  • himaanshi 7w

    स्वयं

    स्वाभिमान और श्रिंगार दोनो ही मेरे अपने
    सरलता ही स्वरूप मेरा कभी शत्रु नहीं पनपे
    प्रगतिपथ नहीं छुटे मिले सबका यहीं आशीष
    ना भटकू राह से मेरी करू पूरे सभी सपने।।
    ©himaanshi

  • himaanshi 8w

    साहस

    दिखे है जो झरोखे से नभ नहीं केवल उतना।
    जाना है जितना हमने जग नहीं केवल उतना।।
    विस्तृत है धरा , नापे गये कदमों से कही ज्यादा।
    साहस है भीतर हमारे हमारी सोच से कही ज्यादा।।
    ©himaanshi

  • himaanshi 8w

    बचपन

    रोकना चाहू तो रुकता नही
    ये वक्त कही टिकता नही
    वक्त का पहिया है जो चलता जाता है
    वक्त किसी के साँचे में कब समाता है
    कहते है की ये जो दौर है वो भी गुजर जाएगा
    ये गुजरने का डर केसे निकल पाएगा
    कैसाहो जो वक्त को डीज़ाइन किया जाए
    चलो के बचपन फिर से जिया जाए
    ©himaanshi

  • himaanshi 10w

    पिता

    अनुभावों का अपार खजाना
    बेवक्त डांट का बहाना
    असमंजस में विश्वास दिलाना
    हर दुख में दिल बहलाना
    गलती पर फटकार सुनाना
    तरक्की पर गले लगाना
    अपने बच्चों को जीवन समझाना
    आसान नहीं है पिता हो जाना
    ©himaanshi

  • himaanshi 10w

    शिव

    सुखद हर क्षण में
    तीनो लोक नौ खंड में
    हर क्षमा , हर दंड में
    तु ही मौन में ,तु हर छंद में
    विष भी तु, तु ही मकरंद में
    तु अभ्यंकर तु शंकर
    बसा है सृष्टि के हर कण में
    ©himaanshi

  • himaanshi 10w

    आसमां

    समेट कर साहस सारा
    हौसला बुलंद किया जाए
    कुछ बादल कुछ हवा कुछ धरा
    चलो आज आसमां नाप लिया जाए ।।
    ©himaanshi

  • himaanshi 43w

    अवशेष

    भीड़ से सटा सन्नाटे का कोना मानो
    धुंधली पड़ी दीवारों का सिरा जानों
    बस वही उकेरा है नाम तुम्हारा

    जंगली फूलों सा अल-मस्त मानो
    बिन सिंचा बागान जानो
    बस वैसा यादों का घेरा तुम्हारा

    बंजर जमी का टुकडा मानो
    मंज़र कोई गमगीन जानो
    शेष है बस इतना प्रेम तुम्हारा
    ©himaanshi

  • himaanshi 43w

    आसानी

    मेरी तलाश में तुम बाकी हो
    खो गए हो या साथ हो
    कुछ कहो तो आसानी हो

    हर लफ्ज़ की हद है क्या..!
    यूँ संजीदगी से बैर तो नहीं
    कुछ नादानी हो तो आसानी हो

    घनघोर अन्धेरे सताए और चले गए
    सही गलत की परख से परे
    तुम बाजू थमाओ तो आसानी हो
    ©himaanshi