harish_fonia_

engineer mail-fonia.harish@gmail.com

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Reposts
  • harish_fonia_ 48w

    You have a better option every time, it is your principle to stick to one.
    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 78w

    .

  • harish_fonia_ 84w

    12 AM THOUGHTS (2)

    इश्क़ पे क्या तफसारा दूँ,
    उनसे माज़रत मांगू या इश्क़ ज़वाल दूँ,
    बस ये फिर उठा सवाल क्यूँ,
    वफ़ा में फ़कीर,
    और रात के उजाले मे असीर हूँ,
    शायद इश्क़ के आइने का झूठा तकदीर हूँ.....
    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 87w

    हर पन्ने में तेरी इबादत लिखी है,
    मुंह से ना बोला,पर दिल की चाहत यही है,
    किसी रोज़ तेरी याद ना आये,तो में सांस ना लूँ,
    बस तेरी खुशी में,
    मेरे दिल के टुकड़ों की सजावट सजी है....
    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 88w

    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 88w

    12 AM THOUGHTS(1)

    कुछ हसरतें देखी मगर,
    चुप हुआ , उन्हे देखे बिना,
    बस नाराजगी के दो घूंट हुये थे,
    नजरे मिली दुबारा,
    प्यार हुआ फिरसे , तुम्हे जाने बिना,
    ये वक्त चाहुँ तो वापस मोड़ लूँ,
    बस दर्द कम ना हो,
    इसिलिए जरूरी है , गम के दो घूंट पीना,
    मेरे दोस्त....
    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 88w

    12 AM THOUGHTS

    कुछ इरादे भी यूँ परदा हो जाते है,
    जब सामने ना आना हो,
    तब सामने आते है,
    मेरी चोट की खरोच की सोच से,
    जिसे परवाह होती थी,
    वो भी आज हमें जिंदा लाश समझे,
    तोहमतें दे जाते है...

    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 90w

    एकतरफा

    सच्ची मोहब्बतें मुक़द्दर नही होती,
    कौन कहता है,
    एक तरफा प्यार में चाहत नहीं होती,
    हम तो उन्हे पाने के लिए सब से लड़ जायें,
    बस उनकी ना को हां मे बदलने की हिमाकत नही होती,
    कुछ प्यार अधूरे थे , अधूरे हैं , अधूरे रह जायेगें,
    बस,
    उन्हे देखने भर से मोहब्बत पूरी नही होती.....
    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 94w

    शायद

    शायद में खो गया हूँ,
    कुछ करने की चाह में,
    खुद मे बह गया हूँ,
    यूँ अल्फाज़ नही बहते आखों से,
    पर खुद को पाने की राह में,
    अधूरी चाह में सो गया हूँ,
    बस बहते-बहते,
    शायद में खो गया हूँ,
    किस तरफ जाऊँ,
    इस सोच मे थम गया हूँ,
    बस इस सोच में,
    शायद में खो गया हूँ....
    ©harish_fonia_

  • harish_fonia_ 94w

    मुश्किल मोड़

    कुछ वादे चुभ कर मुस्कान दिला जाते है,
    रुह से बचकर हमपे एहसान दिला जाते है,
    एक मोड़ पे पहुचें थे,
    एक रास्ते के सहारे,
    मंजिल धुमिल और चलना मुश्किल,
    तो क्या किया,
    बस मुड़ गया,
    क्यों, पता नहीं?
    .
    .
    .
    रोज तसल्ली देते है खुद को खुद से,
    मुड़ेगें तो शायद जुड़ेगें नही,
    पर कुछ ज़ुबान भी शायद टूटेगें नही,
    शायद फूल को खो देगें सही,
    तो क्या किया,
    बस मुड़ गया,
    क्यों, पता नहीं?
    .
    ©harish_fonia_