happy_rupana

Mera har ik alfaaz apne aap mein ik mukamal dastaan hain... Aur phir bhi na jane kyon log iss shayar ko bezubaan keh jaate Hain!

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  • happy_rupana 22h

    Poem : Agar!

    कैसे बदलता है रंग गिरगिट, यह किसी सियासतदान से पूछना,
    अगर पूछना हो जहन्नम के बारे में, तो मेरे देश की आवाम से पूछना!

    यह वो आवाम नहीं है, जो अक्सर समाचारों में दिखती है,
    यह वो आवाम है जिसे देख कर भी अनदेखा कर दिया जाता है,
    हमारे मंत्री साहब की एक छींक से अखबार हिल जाते हैं,
    और एक "बेजुबान" बेजुबान सा मर जाता है,
    रोटी तक ही सीमित रह जाती हैं जिनकी ख्वाहिशें,
    पेट नहीं भरता तो बन जाती है तवायफे़,
    ऐसे ही हर एक घर की कहानी, बेजुबान से पूछना,
    अगर पूछना हो जहन्नम के बारे में, तो मेरे देश की आवाम से पूछना!

    ढेर हैं चारों ओर, लाशों के! सिर्फ लाशों के,
    वो लाशें जिनकी मौत भूखमरी से होती है,
    एक दिन रोटी ना मिले तो पागल से हो जाते हो आप,
    सोचो कितनी खौफनाक होगी वो मौत, जो भूख से होती है,
    और हमारे मंत्री साहब भाषण पर भाषण दिए जाते हैं,
    एक वक्त पर जो 50 हजार का भोजन खाते हैं,
    क्या होती है एक दाने की कीमत,
    किताबों को छोड़ किसी भूखे इंसान से पूछना,
    अगर पूछना हो जहन्नम के बारे में, तो मेरे देश की आवाम से पूछना!

    जो खुद भूखा रहकर आवाम का पेट भरता है,
    देखो ना वही अन्नदाता हमारा आज सड़कों पर मरता है,
    सोने के पलंग पर हाकम सो रहा है,
    और किसान का बच्चा हक मांगते सड़कों पर रो रहा है,
    गलत को सही सही को गलत बताते हैं,
    जमीर तो बेच दिए, ना जाने ये नेता और क्या-क्या बेचना चाहते हैं,
    कैसे बिकते हैं इंसान ये हमारे नेता साहब से पूछना,
    अगर पूछना हो जहन्नम के बारे में, तो मेरे देश की आवाम से पूछना!

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    मेरे देश की मिट्टी बदनसीब, जो हर पल खून में लथपथ रहती है,
    कभी हिंदुस्तान, कभी पाकिस्तान की,नफरत से रंगी जो रहती है,
    सरहद के उस पार भी तो अपने हैं, उनके भी तो सपने हैं,
    उस पार वाले भी तो इंसान हैं, उनके भी तो परिवार हैं,
    लेकिन हर दिल में नफरत भरते हैं, यह जो सियासतदान हैं,
    क्या कीमत है इस मिट्टी की, सरहदों पर बैठे किसी जवान से पूछना,
    अगर पूछना हो जहन्नम के बारे में, तो मेरे देश की आवाम से पूछना!

    थोड़ा सच लिखा हूं, पर यू ना बिका हूँ,
    माना बाजारों में दाम बड़े अच्छे अच्छे हैं,
    एक कानून ही हमारा अंधा, जिसे दिखता नहीं कुछ,
    वरना सच को तो देख लेते नन्हे नन्हे बच्चे हैं,
    अपने ही घर में असुरक्षित हैं बेटियां,
    देखो ना यही तो हमारे संस्कार हैं,
    सच है झूठ झूठ है सच,
    देखो ना साहब क्या खूब ये व्यापार है,
    क्या होती है मौत से बदतर जिंदगी, ये किसी बेजुबान से पूछना,
    अगर पूछना हो जहन्नम के बारे में, तो मेरे देश की आवाम से पूछना!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 4d

    Poem : एक लाश मिली!

    मैंने देखा वो मंजर इन आंखों से,
    जिस मंजर से......
    इन लोगों को एक तमाशा,
    और मेरी आंखों को बरसात मिली,
    उसने घुंघट क्या उठाया
    .....दुल्हन की जगह एक लाश मिली!

    हां वो लाश,
    जिसके टूटे थे आज सारे ख्वाब,,
    हां वो लाश,
    जिसके लफ्ज़ थे खामोश और नम थी आंख,
    हां वही लाश,
    जिसकी उम्र थी महज़ 14-15 के आस पास,
    हां वो लाश,
    लाल जोड़े में लथपथ पड़ी थी जो आज,
    हां वही लाश,
    हां वही लाश, साहब....हां वही लाश!
    उसके चरित्र पर उठ रहे थे सो तरह के सवाल,
    लेकिन किसी ने ना देखा,
    कि कितनी बेदर्दी से आज,
    ....फिर एक नादान! बाल विवाह की भेंट चढ़ी,
    उसने घुंघट क्या उठाया
    .....दुल्हन की जगह एक लाश मिली!

    कुछ घंटे पहले का माहौल,
    भी तो कितना अजीब था,
    उसने मुझे भी ना बताया,
    जबकि मैं उसके सबसे करीब था,
    झूठी मुस्कुराहट लिए फिरती रही वह सारा दिन,
    पता नहीं कैसे सांस ले रही थी वो इन हवाओं के बिन,
    जला कर आई थी वो,
    किसी बंद कमरे में अपनी किताबें,
    मोन पड़े थे आज,
    जो चेहरे बेवजह थे मुस्कुराते,
    अभी तो उसने पूरे करने थे अपने ख्वाब,
    अभी तो उसने जीना था बेहिसाब,
    पर देखो ना आज,
    कमबख्त एक रात! उसकी जिंदगी का कर व्यापार गई,
    उसने घुंघट क्या उठाया,
    .....दुल्हन की जगह एक लाश मिली!

    "इसके मां-बाप ने पता नहीं,
    क्या क्या संस्कार दिए थे,
    शादी वाले दिन ही आत्महत्या कर ली,
    पता नहीं ऐसे क्या क्या इसने काम किए थे",
    "लगता किसी के साथ चक्कर था इसका,
    सुना है पढ़ने शहर भी जाया करती थी",
    हां हां मैंने भी सुना है और देखा नहीं तूने,
    कितने छोटे कपड़े पाया करती थी",
    ऐसी ही बातें समाज की कुछ औरतें कर रही थी,
    और एक "बेजुबान", बेजुबान सी मर गई थी,
    जिसने पंखों के साथ है अभी उड़ना शुरू किया था,
    आज वही मुझे इस जमीन पर, "हताश" मिली,
    उसने घुंघट क्या उठाया
    .....दुल्हन की जगह एक लाश मिली!

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    Please read from the caption!

    उसके हाथों में लथपथ एक चिट्ठी मिली,
    जिसमें अल्फाज कम और जज्बात ज्यादा लिखे है,
    पढ़ते-पढ़ते जिन लफ्जों को रो पड़ा मैं,
    न जाने उसने कितनी बेदर्दी से वो लिखे हैं,
    कुछ यूं लिखा था उस चिट्ठी में,
    " कहां से शुरू करूं कहां पर खत्म,
    माफ कर देना पापा जो मैंने किया यह सितम,
    इतनी कमजोर भी नहीं थी जो यह कदम उठाती,
    लेकिन एक 14 बरस की लड़की और कितना कुछ सह पाती,
    पापा अभी तो मैंने पढ़ना था,
    अपने ख्वाबों को पूरा करना था,
    शादी की अभी उमर नहीं थी मेरी,
    मुझे तो अभी और आगे बढ़ना था,
    कह दिया इन किताबों ने आज मुझे अलविदा,
    सांस कैसे आएगी तू ही बता मेरे खुदा,
    बड़ी आवाज उठाई मैंने बड़ा चीखी चिल्लाई मैं,
    पर आपके इस समाज के आगे बेजुबान ही कहलाई मैं,
    पापा कहा था आपको,
    नहीं करनी मुझे यह शादी,
    लेकिन जब आपने कसम ही दे दी,
    तो कुछ ना कर पाई मैं!
    जिस बुड्ढे से आप मेरी शादी कर रहे हो,
    ना जाने वो कितने दिन और जिंदा रह पाएगा,
    अब सुहागन उस बुड्ढे की, फिर भी विधवा भी उसी की ,
    और ऐसे ही मेरा दिल, दिन काटता जाएगा,
    कह दो इस जमाने को कि तमाशा ना बनाएं,
    हर रोज की तरह एक निर्दोष ही तो मरी है,
    कह दो इस जमाने को, झूठे आंसू ना दिखाएं,
    कोई खुदा नहीं मरा, एक बोझ ही तो मरी है!
    .................... हां! एक बोझ ही तो मरी है!"
    उसकी ख़ामोशी कोई ना सुन पाया,
    अभी भी वो उन इल्ज़ामों के साथ मुझे बदनाम मिली,
    उसने घुंघट क्या उठाया,
    .....दुल्हन की जगह एक लाश मिली!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 1w

    Note : Please Read from the caption.

    रात के 12:00 बज गए, लेकिन वो अभी भी मुझे वैसे ही देख रहा है। बेचैनी सी हो रही है। क्या वो भी मुझे अभी तक नहीं भूला। रोज शाम को आकर यहीं मेरी दहलीज पर खड़ा हो जाता है।....और मैं दूर अपने कमरे की खिड़की से उसे देखती रहती हूं और कुछ पल बाद मैं चली जाती हूं। लेकिन पता नहीं वो कब तक यूं ही खड़ा रहता होगा, मेरे इंतजार में। आज भी वो वैसे ही खड़ा है। ठंड भी बहुत है और आज हल्की हल्की बर्फबारी भी हो रही है। लेकिन वो वैसे का वैसे ही खड़ा है।
    तभी रेडियो पर यह गीत चलने लगा,
    "मैं किसी और की हूं फिलहाल के तेरी हो जाऊं!"
    और वो उसे देखती देखती फिर से उन्हीं ख्यालों में खो गई, कुछ साल पहले के ख्याल,
    " कितना अच्छा था ना जब वो मेरा था और मैं सिर्फ उसकी। सारा दिन उससे बातें करना, उसे देखते रहना, साथ में किताबें पढ़ना, एक दूसरे को बस निहारते रहना। आंखों की आंखों से बातें होती थी, कितना अच्छा था। मुझे कभी बोलने की जरूरत ही ना पड़ती, वो अक्सर मेरी खामोशी समझ लेता था।
    मैंने कहा था उस दिन उसे इतनी देर मत रुको कोई आ जाएगा पर वो नहीं माना, बस मुझे देखता रहा और उधर से पापा आ गए। उसे तो पापा ने कुछ ना कहा और वो चला गया। लेकिन मेरा यहां मरना हो गया, जब पापा ने 10 दिन बाद मेरी शादी किसी और से तय कर दी थी। मैंने उसे मैसेज किया और उसने कहा था कि "मैं ऐसा नहीं होने दूंगा, तुम सिर्फ मेरी हो मेरी! मैं आ रहा हूं।"

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    1 दिन बीता, 2 दिन बीते, 3 दिन बीते, ना उसका कोई फोन ना मैसेज और ऐसे ही दिन बीतते बीतते आखिर वो शादी वाला दिन भी आ गया। मैं फेरों तक उसका इंतजार करती रही, पर वो आया ही नहीं! मेरे दिल में मातम और मेरे घर में शहनाई थी। मेरी शादी हो रही थी किसी अजनबी से जिसे मैं जानती भी नहीं। और वो आया कब.... 3 महीने बाद! जब मैं किसी और की हो चुकी थी। और अब हर रोज मेरे घर के बाहर मेरी दहलीज पर खड़के मुझे देखता रहता है। बारिश हो, सर्दी हो या बर्फबारी हो, बस वो वैसे का वैसा ही खड़ा रहता है, उस दिन के बाद उससे कभी बात भी नहीं हुई और ना ही कभी करनी है। तब कहां था वह जब मुझे उसकी जरूरत थी अब आ गया प्यार जिताने को।

    यह कहते कहते हैं उसकी आंखों में आंसू आ गए और वह किसी कोने में बैठ गई रोने को। लेकिन फिर खुद को संभाल कर फिर से उसे देखने लगी उसी खिड़की में से।

    और वह गीत अभी भी चल रहा है,
    "Hun roni aa pastauni aa,
    k chand nii hoyeya chakor da,
    Hun main bhi aa kise hor di,
    te tu bhi ae kise hor da !"

    और वो देखती है कि एक लड़की आती है और उसे संभालती हुई अपने साथ ले जाती है शायद वो उसकी पत्नी है।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 1w

    जिंदा हूं मैं!

    फिरता हूं गली-गली पाने को मौत, ऐसा एक काफिर बाशिंदा हूं मैं,
    माना कि यकीन ना होगा तुम्हें, पर सच यही है कि जिंदा हूं मैं!

    सुबह कहां हो ना जाने शाम कहां हो, जन्म कहां हुआ ना जाने शमशान कहां हो,
    उड़ता फिरता है जो बेवजह सा, ऐसा इक मुसाफिर सा परिंदा हूं मैं!

    रातों को रोता रहता हूं बेवजह, दिन का चैन कहीं खोने लगा है,
    कहते हैं लोग मुझे इश्क हुआ है, लेकिन नफरत से भरा दरिंदा हूँ मैं!

    आया था तेरे शहर दुनिया जीतने, खैर अब... सब हार कर लौट रहा,
    लड़ रहा हूं हर पल इस तन्हाई से, और लोग कहते हैं कि अहिंसा हूं मैं!

    कुछ उधारे पल तो दे जा मुझे, लुटा दूंगा, इस शायर का वादा रहा,
    यूं हर पल इश्क तुझसे ही होता है, यह बात है अलग, के अब शर्मिंदा हूं मैं......,
    ..........पर सच यही है कि जिंदा हूं मैं!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 1w

    लिखने का तो चंद अल्फाज सोचा था,
    गजल या नजम ये नहीं सोचा,
    लिख कर उस पर किताब "हैप्पी",
    सोच रहा हूं कि कितना कुछ लिखना बाकी है,
    लग जा गले फिर एक दफा,
    ..............कि तेरा इश्क अभी मुझमें बाकी है!
    ©हैप्पी

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    लग जा गले!

    लग जा गले फिर एक दफा, कि तेरा इश्क अभी मुझमें बाकी है,
    पिलाता नहीं जो ये जाम_ए_जहर, जालिम बड़ा ये साकी है।
    ..................लग जा गले फिर एक दफा!

    गुजरता हूं रोज गलियों से उनकी, बूहे बंद अक्सर वो रखते हैं,
    हो जाता इश्क दोबारा मुझे, जब-जब खुलती उसकी ताकी है।
    ..................लग जा गले फिर एक दफा!

    भूल जाऊंगा तुम्हें मैं कल से ही, ये कहते हुए जमाने बीत गए,
    हर सुबह मेरी मुस्कान में तू, हर रात को आंसुओं में नजर आती है।
    ..................लग जा गले फिर एक दफा!

    मांगा था खुदा से बस तुझे ही, तू ही ना मिला तो और क्या मांगू?
    सिर्फ एक ही ख्वाब था, वो भी अधूरा रहा, जैसे अधूरी सी ये रात बाकी है।
    ..................लग जा गले फिर एक दफा!

    माना कि मैं काफिर बन गया, जब से खुदा उसको मुझसे छीन लिया,
    लेकिन ऐसे भी मैंने क्या किये है गुनाह जिसके लिए छोटी पड़ गई माफी है।
    ..................लग जा गले फिर एक दफा!

    काट दी है आधी तेरे प्यार में, आधी काटनी तेरे इंतजार में बाकी है,
    माना सांस नहीं आ रही, पर मरा तो नहीं, जीने के लिए तेरा एहसास काफी है।
    ..................लग जा गले फिर एक दफा!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 1w

    कब सुबह हुई कब शाम पता ना चला,
    दिल भी ना जाने किन लम्हों में खो गया,
    आज भी बरकरार है इस दिल में वो वैसी की वैसी,
    जिसकी मोहब्बत में पागल हुए मुझे एक जमाना हो गया!

    बहुत गजलें लिखी हैं उस पर, बहुत अल्फाज लिख लिए,
    मशहूर उसे लिख दिया, हम खुद को बदनाम लिख लिए,
    उसे क्या बेवफा लिखते हम,
    इससे अच्छा तो हम खुद को "बेजुबान" लिख लिए!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 2w

    घर ही आना था!

    गांव में उस कच्चे से मकान के अलावा,
    और मेरा क्या आशियाना था,
    चला था दुनिया को जीतने मैं,
    पर भूल गया था कि लौटकर तो घर ही आना था!

    मैंने चारपाई को छोड़ दिया,
    महंगे पत्थरों के शहर में, महंगे बिस्तर खरीद लिए,
    पर भूल गया था कि उस महंगे शहर में,
    उस बिस्तर पर भी, नींद को ही आना था!

    बड़ा नाम शोहरत कमाई मैंने,
    बड़ी महंगी हवेली पाई मैंने,
    पर भूल गया था एक दिन ,
    सब मिट्टी में मिल ही जाना था!

    सारी जिंदगी मैंने पैसा कमाने में ही निकाल दी,
    आज मुझे वक्त मिला तो.. मां की लाश है सामने पड़ी,
    मुझे क्या पता था कि मेरी मां की जिंदगी को खरीदने,
    पैसे ने भी काम ना आना था!

    करता रहा मैं वादे सदा ही हमसफर बनने के ,
    क्या पता था इस जिंदगी ने, बीच में ही छोड़ जाना था!
    चला था दुनिया को जीतने मैं,
    पर भूल गया था कि लौटकर तो घर ही आना था!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 2w



    तुम्हें यह खूबसूरत आंखें तो दिख जाती हैं,
    मगर उनके पीछे छुपे आंसू क्यों ना दिखते हैं,
    मुझे रूह खरीदनी है तुम्हारी,
    जिस्म तो बाजारों में ओर भी बहुत बिकते हैं।

    कभी इन होठों को निहारते हो,
    कभी इनमें आप मदहोश हो जाते हैं,
    तुमने वो मेरे लफ्ज़ सुने ही नहीं कभी,
    जो दिल से जुबान तक आते-आते खामोश हो जाते हैं।

    रुक जाती है तेरी ख्वाहिश है सिर्फ जिस्म तक मेरे,
    ना जाने क्यों तुम मेरी रुह को ना पढ़ पाते हो,
    जो ज़ख्म है मेरे दिल पर कभी वो भी देख लेना,
    जिस्म पर तो जख्म तुम अक्सर दे जाते हैं।

    मुझे रूह का प्यार चाहिए,
    और तू अक्सर करता जिस्मों का व्यापार है,
    अब मत कर नाटक "जानी" मशहूर होने का,
    देख तो ले जरा, तू तो अपने आप में ही "बदनाम" है।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 3w

    Please read from the first part #pyaar_by_happy_rupana

    Story : Pyaar (part :2)

    "ए किताबों की दुकान, क्या किताबी डायलॉग मार रहा है? यह बातें ना सिर्फ किताबों में अच्छी लगती है, जिंदगी में ऐसा प्यार ना कभी किसने किया है ना ही कोई करेगा। और तू तो ऐसे कह रहा है जैसे तुझे फिर प्यार होगा ही नहीं?"
    "मैंने यह कब कहा कि मुझे फिर से प्यार नहीं होगा? होगा! जरूर होगा। लेकिन मेरा पहला प्यार वही रहेगी। उसके लिए जगह कम नहीं होगी।"
    "अच्छा! तू बता अपने प्यार के बारे में, सुना है काफी इस कॉलेज में तेरी कहानियों के बारे में"
    "तो उनसे की एक कहानी और सुन लीजिएगा ना! मुझसे क्यों पूछ रहे हो?"
    "क्या तू आज भी उस से प्यार करता है?"
    "पहले भी करता था, आज भी करता हूं और जब तक जिंदा हूं करता रहूंगा, आखिर प्यार है यह मेरा, कोई मौसम थोड़ी है जो बीत जाएगा!"
    "अच्छा यह तो बता दे क्या बात थी उसमें जो मुझ में नहीं?"
    "कुछ भी खास नहीं था, या यूं कह लो कि उसमें सब कुछ खास था! अगर मेरी निगाह से देखो थे तो वो किसी खूबसूरत ग़ज़ल सी लगेगी, लेकिन खैर आप तो अपनी निगाह से देखोगे ना। और हां, वजह तो अक्सर में व्यापार में होती है, प्यार तो अक्सर ही बेवजह होता है।"

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    "तुमने कभी उससे अपने दिल की बतायी नहीं?"
    "बताई थी, लेकिन उसने सुना ही नहीं! शायद वो सुन नहीं पाई।"
    "तेरा कभी मन नहीं किया कि उसे अपनी GF बनाऊं?"
    "नहीं।.... मैं तो उसके साथ जिंदगी बिताना चाहता था। कुछ पल, कुछ घंटे, या कुछ दिन नहीं।"
    "तुमने जब उसको अपने दिल की बात बताई थी, तो उसका जवाब क्या था?"
    "वो कह रही थी कि वो अपने पहले प्यार को धोखा नहीं दे सकती, अगर उसने छोड़ दिया तो वह मुझे अपना लेगी। अगर नहीं छोड़ा तो उसके साथ ही जिंदगी बिता लेगी। लेकिन उसे शक है कि शायद वह भी छोड़ कर चला जाएगा, तो शायद वो मुझे अपना ही लेगी"
    "तुम्हें गुस्सा नहीं आया? जब उसने ऐसा कहा! आखिर तुम उसके लिए क्या क्या सोचते हो और वो तुझे सिर्फ एक चॉइस समझती है?"
    "नहीं!... मैंने कहा कि आ जाना! तुझे अपना लूंगा।"
    "अगर वह सच में आ गई तो क्या सच में तू अपना लेगा?"
    "हां! अपना लूंगा मैं तो आज भी उसके आने का इंतजार करता हूं"
    "तभी कहता हूं कि मुझ पर तुम अपना वक्त जाया ही कर रही हो।"

    ......... बस शायद वो पहली मुलाकात ही आखिरी मुलाकात थी। लेकिन मैं यह देखना भूल गई कि जो उससे प्यार भी नहीं करती, वो उसके लिए कितना कुछ करने को तैयार था। जो उससे प्यार करेगी वो उसके लिए क्या-क्या नहीं कर सकता??
    मुझे आज भी उसके वह आखरी अल्फाज याद है,
    "तो यह सब जानकर भी मुझसे प्यार करेगी क्या?.......नहीं ना? क्योंकि यह सब तो सिर्फ किताबों में अच्छा लगता है, असल जिंदगी में नहीं।"
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 3w

    You can search this full story on #pyaar_by_happy_rupana

    Story : Pyaar (part : 1)

    आज 10 साल हो गए उससे बिछड़े हुए। लेकिन ना जाने क्यों ऐसा लगता है कि जैसे आज भी वह मेरे दिल में वही रहता है। आज भी उसे याद करके मेरी आंखें नम हो जाती हैं, तो कभी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। आखिर था ही वो अजीब सा। हंसता रहता था पागल सा। हां मुझे याद है उससे वह पहली मुलाकात, शायद आखरी भी.......,

    "Excuse me!"
    "yes"
    "hii, I am Tanya!"
    "hlo, I am Rahul..."
    "do you believe in love at first sight?"
    "maybe yes"
    "मुझे भी तुमसे वही हो गया"
    "what....?"
    "अरे इतना embraced feel मत कराओ,
    सुन, मुझे तुमसे कुछ कहना है...... "I love you" तुम को पहली बार देखते ही प्यार हो गया!"
    "तो मैं क्या करूं?"
    "अरे बुद्धू इतना भी नहीं पता, जब कोई लड़की प्रपोज करती है तो क्या करते हैं?"
    "Sorry, but तुम यहां सिर्फ टाइम ही खराब कर रही हो! मैं किसी और से प्यार करता हूं।"
    "जानती हूं, मैं क्या पूरा कॉलेज जानता है! but शायद तुम यह नहीं जानते कि उसका already एक BF है। उसका भी BF है, तो तेरा क्या जाता है मुझे GF बनाने में?"
    "जानता हूं, लेकिन शायद तुम ये नहीं जानती कि उसका वह BF मेरा ही दोस्त है, और हां! तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि मैंने ही उन दोनों को मिलाया था।"

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    "अच्छा रांझा साहब!"
    "चलो आप यह बताओ कि आपको मुझसे प्यार हुआ कैसे?"
    "तुम्हारी बातों से, तुम्हारी रूह से, तुम्हारी आंखों से जिनमें कोई बेजुबान सी कहानी छुपी है, मुझे उनसे प्यार है।"
    "oh very nice, BTW.....तुम्हारी नजर में प्यार क्या है?"
    "प्यार जिसे याद करते ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाए, जिसके बारे में सारा दिन सोचते रहो, सारी रात उसके ख्यालों में ही बीत जाए, वो है प्यार। आप जिसके लिए और जो सिर्फ और सिर्फ आपके लिए बना हो, वो है प्यार!"
    "oh very nice..., sorry to say but मेरी डिक्शनरी में प्यार का यह मतलब नहीं है। मैं आपसे पहले ही कह चुका हूं कि आप सिर्फ और सिर्फ अपना वक्त जाया कर रहे हो।"
    "...होने दो ना वक्त जाया, अच्छा लगता है। BTW तुम्हारी डिक्शनरी में क्या मतलब है प्यार का?"
    " प्यार दो रूहों का मेल, जिस्मों में जितनी भी मर्जी दूरियां हों, लेकिन रूह हर पल एक दूसरे के करीब रहे, वो है प्यार। उस से प्यार करने की कोई वजह ना हो, बस आप उसे बेवजह ही प्यार करो। अरे प्यार ऐसे नहीं कि आज ज्यादा है, अगर कल को कोई और आ गया तो कम हो जाएगा, जो कल भी वैसा था, आज भी वैसा है और कल भी वैसा का वैसा ही रहेगा, वो है प्यार। प्यार बिना सोचे समझे होता है। आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए वो जिस से मर्जी प्यार करें, बस आपकी मोहब्बत पाक होनी चाहिए। आखिर आपका प्यार है, कोई कैद नहीं! जो आप उसे कैद रखो। वो जो दिल में आए वो कर सकती हो, आख़िर उसके पास भी तो दिल है ना। उसे उड़ने दो, बाहें फैलाकर अपनी जिंदगी खुद जीने दो, कैद मत रखो क्योंकि प्यार तो आजादी का नाम है। ऐसा प्यार दो जो उसे जो से मुस्कुराना सिखा दे। आपके चेहरे पर उसे याद करने से मुस्कुराहट आए या ना आए लेकिन उसके चेहरे पर आपकी वजह से हर वक्त मुस्कुराहट आनी चाहिए।"
    To be continue.........