happy_rupana

Kuch de Udhaare Pal Ae Zindgi, Kuch Ehsaan Kar!

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  • happy_rupana 1w

    "मेरे अपने कितने थे आज पता चल ही गया,
    मेरी कबर के आस पास उगी घास देखकर!"
    ~ Happy

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    आंखें नम हाथ खाली, खुद को बर्बाद देखकर,
    कमबख्त! मैं आया हूं अपने ख्वाब बेचकर!

    जिसमें अब बस कुछ खाली दीवारें ही बची है,
    मैं रो पड़ा! घर को बनते मकान देखकर!

    पल पल जलता रहा मैं इस आग की तरह,
    दो वक्त की रोटी पीछे होती भागम भाग देखकर!

    सुना तेरे शहर में है पत्थर पूजने का रिवाज,
    मैं पूज रहा हूं तेरा दिल वह रिवाज देखकर!

    थोड़ी दया मुझ पर भी कर लेती जिंदगी,
    अन्याय करती रही तू मुझे लाचार देखकर!

    मेरी प्यास देख मुझे जहर दे दिया,
    कत्ल कर कातिल बताया मुझे "बेजुबान" देखकर!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 4w

    इन बहरो के शहर में, क्या मैं तुझको पुकार लूं ?
    मैं अंधा बस दो पल! क्या तुझको निहार लूं ?

    तेरी आरती के लिए, अपने घर को जला दूं क्या?
    या नाम लेकर तेरा! अदा कर सुबह की नमाज लूं?

    हर रोज की तरह, दिल में दफन रख लूं जज्बातों को?
    या कुछ को पन्नों पर उतारकर, मैं अपनी गजलें संवार दूं?

    क्या रो दूं तेरी यादों साथ, या किस्मत पर अपनी हंस दूं कहीं,
    जो तुझ पर ना इल्जाम लगे, क्या मैं बन बेजुबान लूं ?

    क्या फिर से देखूं वह खाब? जो तूने तोड़े बार-बार,
    या आज की यह रात, मैं साथ जाम के गुजार लूं?

    थोड़ा थोड़ा जहर! तुम्हारी दिल्लगी भी तो पिलाती है,
    अगर यही ख्वाहिश है तेरी! तो क्या मैं खुद ही खुद को मार लूं?

    मेरे जनाजे की भी खबर सुनकर! तुम ना आओगी मुझे पता है,
    क्या तेरे नाम का एक फुल! मैं अपनी कबर पर खुद ही चाड़ लूं ?

    कहीं मोहब्बत ना बदनाम हो जाए, तेरी बेवफाई सुन ए सनम,
    या अपनी गजलों को, उन पन्नों को, मैं लिखने से पहले ही फाड़ दूं ?
    ..............मैं अंधा बस दो पल! क्या तुझको निहार लूं ?
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 5w

    रोज जाम ए जहर पिलाती है जिंदगी,
    पिलाने से साकी तू इतराता क्यों है?
    इम्तिहान के नाम पर सब कुछ तो मुझसे छीन लिया,
    अभी जिंदा रहने पर दिल तेरा जाता क्या है?
    ~ बेजुबान

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    मारकर भी कमबख्त कहां छोड़ती है जिंदगी,
    यहां पल पल मर कर भी जिंदा रहना पड़ता है!

    रूह कब की मर जाती लेकिन सांसे चलती रहती हैं,
    पेट भरने के लिए यहां बनकर दरिंदा रहना पड़ता है!

    मजबूरी में झुके सिर को और झुकाते हैं लोग यहां,
    "शिकार बनते" को शिकार बनाता परिंदा बनना पड़ता है!

    लड़ना पड़ेगा हर सांस से, लड़ना पड़ेगा अपनेआप से,
    ये लोग तो कहते रहेंगे के बस अहिंसा बनना पड़ता है!

    ना कबर होगी ना मजार होगा, ना चिट्ठी ना समाचार होगा,
    इक रोज तो दफन होना ही है, तब तक बाशिंदा रहना पड़ता है,
    .............पल पल मर कर भी यहां जिंदा रहना पड़ता है!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 5w

    हंसने से पहले वो रोने का डर, तुझे पाने से पहले खोने का डर,
    कि मरने से पहले मार देगा मुझे, जो हुआ ही नहीं उसके होने का डर!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 5w

    हंसना रोना छोड़ दिया,
    आजकल वो मुझे सताते ही कहां हैं?
    के ग़ज़ल लिखी को बीत गए हैं जमाने,
    वह भूलते ही नहीं! तो याद आते कहां हैं?
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 5w

    तेरे शहर तेरे महल के पत्थर बड़े लगते हैं अजीज,
    लगता इन्हीं में से किसी टुकड़े से तेरा दिल बना होगा!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 5w

    उसके खत उसकी यादें रखी थी संभाल,
    मेरे जनाजे में मेरे साथ दफनाने को मैंने,
    के मोहब्बत तो बस एक पल में हुई थी,
    लेकिन सदियां लगा दी उसे भुलाने को मैंने!
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 7w

    जिंदा हूं मैं, बस! एहसास मरने लगे हैं,
    लफ्ज खामोश! जज्बात शोर करने लगे हैं,

    हम सूखे से पत्ते और जिंदगी भी हमारी,
    लेकिन! हवाओं की मर्जी से झड़ने लगे हैं,

    कुछ पल के लिए झूठे ख्वाब दिखाकर,
    मेरे ख्वाबों के कातिल! वो बनने लगे हैं,

    खुद के आंसुओं का समंदर बना कर,
    हर दफा डूब कर! हम तरने लगे हैं,

    लिखे थे जो खत कभी मैंने तेरे नाम,
    बिन पहुंचे ही वो खत! जलने लगे हैं,

    करके वादे मेरे हमसफ़र बनने के वो,
    खुद अकेले ही सफर में! चलने लगे हैं,

    मुस्कुराए हुए मुझे सदियां हो गई,
    कुछ इस कदर दर्द! वो अदा करने लगे हैं,

    मोहब्बत ने जिनकी बस दर्द दिया है,
    फिर उन्हीं से मोहब्बत! हम करने लगे हैं,

    उनकी आंखें जो नम सी रहने लगी है,
    लगता इस "बेजुबान" की गजलें वो पढ़ने लगे हैं।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 7w

    उबलते पानी के जैसा हूं मैं,
    तू चाय पत्ती सी मुझ में आकर मिल जाए,
    माना कड़वाहट बहुत है रिश्ते में हमारे,
    तू थोड़ी मिठास ले आना कि चाय बन जाए।

    उबलते पानी के जैसा हूं मैं,
    तू चाय पत्ती सी मुझ में आकर मिल जाए,
    मेरी गजलों में जब जब होती है तू ,
    तो वह भी चाय जैसी नशीली बन जाए।

    उबलते पानी के जैसा हूं मैं,
    तू चाय पत्ती सी मुझ में आकर मिल जाए,
    मीठी मीठी आँच पर हम पकाएं ये रिश्ता,
    और देखते देखते ही हमारा जहाँ बन जाए।

    उबलते पानी के जैसा हूं मैं,
    तू चाय पत्ती सी मुझ में आकर मिल जाए,
    मेरी महफ़िल में है जो बिरहा के गीत,
    तू आए तो प्यार का नगमा बन जाए।

    उबलते पानी के जैसा हूं मैं,
    तू चाय पत्ती सी मुझ में आकर मिल जाए,,
    वो तू, वो चाय, या वो खूबसूरत सा पल,
    बस इतनी सी मेरी कहानी बन जाए।
    ©happy_rupana

  • happy_rupana 7w

    चिल्लाती रही कि नहीं करती तुझसे मोहब्बत,
    लेकिन कुछ और बयाँ कर उसकी आंखें नम चुकी थी,
    उठाना उसने भी मुझे बहुत चाहा था,
    लेकिन तब तक मेरी जिंदगी हो कम चुकी थी।
    ~Happy

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    उसके जाने के बाद ये घड़ी भी रोक दी मैंने,
    क्योंकि मेरा वक्त और सांसे दोनों थम चुकी थी।
    ©happy_rupana