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  • gyandeep91 12w

    फूलन देवी

    फूलनदेवी आज आपका शहादत दिवस है आप हमेशा महिलाओं को प्रेरित करती रहेंगी । अत्याचार बलात्कार जैसी घटनाओं के खिलाफ हथियार उठाकर आपने जो जाति और लिंग भेद की बेड़ियों को तोड़ते हुए संघर्ष किया वो सदैव प्रेरणा दायीं रहेगा । माना कि हथियार सही रास्ता नहीं हो सकता पर फ़िर भी आपकी कहानी महिलाओं के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगी और आज के वक्त में कुछ और ज्यादा जब बलात्कार की इतनी घटनाएं होती है जब दलितों को शोषित करने की हजारो हजार घटनाएं हो रहीं है । बड़े दुःख की बात है कि अगर सिर्फ बलात्कार और दलित अत्याचार पर एक अख़बार निकाला जाएगा तो उसमें भी सभी घटनाओं को नहीं छाप पाएंगे । कुछ लोग कहतें है कि मानव समाज ने प्रगति किया है, पर कैसी प्रगति ? कैसा बदलाव? हम आज मनुष्य से जानवर बन रहे है । सिर्फ दोहन करना सीख रहे है चाहे वो किसी का भी हो ।

    ©gyandeep91

  • gyandeep91 17w

    हमारे परिधान मंत्री जी के नेतृव में देश विकाशत्व के तरफ निरंतर प्रगतिशील है । और तथाकथित बाबा अजय विष्ट के आ जाने के बाद तो मानो पुर्णरूप से रामराज भी आ गया है । अब राम जी का समंदर में पुल बांधने का काम तो जगजाहिर है ऐसे में सरकार आत्मनिर्भर स्कीम के तहत सभी को अपने अपने घरों के सामने समंदर उपलब्ध करवाने की योजना बना चुकी है जिसका लोकार्पण बनारस में अभी अभी हुआ है । मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि अगले कुछ समय में हर घर में नल-नील, जामवंत होंगे और सभी के घर के सामने रामसेतु । और सीफेसिंग का तो वर्तमान में लोगो की भावनाओं के आधार पर मुफ़्त दिया जा रहा है ।

    कोरोनाकाल में भी हमने देखा कि गंगा जी में कैसे जिंदा लाशे तैर रही है और मरा हुआ प्रशासन उसे झुठला रहा है । कुछ अज्ञानी स्वयं घोषित सोसल मीडिया के नारद (पत्रकार) ने जरूर सरकार की छीछालेदर करने का प्रयास किया परन्तु TRP के भूंखे भेड़िए TV मीडिया ने अथक परिश्रम और बेहतरीन चाटुकारिता का परिचय देते हुए मुद्दे को संभाला । लेकिन अब सुप्रीकोर्ट और होईकोर्ट को कौन समझाए जो भूले बिसरे ही सरकार को खरी खोटी सुना देते है, सरकार जल्द ही इस का भी तोड़ निकालेगी ।


    ज्ञानदीप अग्निहोत्री
    ©gyandeep91

  • gyandeep91 25w

    ऐसे बिकराल समय पर भी राजनीति, मक्कारी, चोरी, बेईमानी करने वाले जीवित व्यक्तियों को भी ह्रदय की असीम गहराइयों से श्रद्धांजलि क्योंकि इनकी आत्मा तो मर ही चुकी है । इनकी आत्मा के मरने पर श्रद्धासुमन ।

    RIP आत्मा बेईमानों की


    ©gyandeep91

  • gyandeep91 25w

    मुझे इश्क़ है उनसे, उन्हें भी होगा ?
    सोचता हूं जैसे मै, क्या वो भी सोचता होगा ?
    वो रुबरूं होंगे मेरे इरादे से एक दिन,
    मुझे मालूम है उस दिन मुझे पछतावा ही होगा !

  • gyandeep91 25w

    लईपर

    लईपर ने अपनी मेहरिया से कहा तुम आज महुआ बिनने क्यों नहीं गई ? लईपराइन नें झुंझलाहट में डपट के बोली, रोटी भी हमही बनाएं और महुआ भी बिने तुम दिन भर हुक्का और सांझ ढले ढर्रा पियोगे । सीधे महुआ बिनने जाओ ज्यादा लमतरानी ना बूंको नहीं तो अभी तुम्हारी माता उतर देबै । लईपर दबें पांव छिटिया बोरी और बढ़नी उठा के महुआ बिनने जाने लगा पर रास्ते में मिसिर ने कहा लईपर पहले तो तुम हमाय महुआ बिनोगे। फ़ौरन हमारी बाग में पहुचों । लईपर को पता था कि यहां तो ना महुआ मिलेगा और ना मजदूरी और तो और महुआ के बग़ैर ख़ाली हाथ घर गया तो आज रोटी भी नसीब नहीं होगी पर करे तो क्या करे ? कर्जा जो ले रखा है मिसिर से........

    ज्ञान
    ©gyandeep91

  • gyandeep91 25w

    एक दिन घटाएं फिर से बदलो के साथ आएंगी, हर तरफ बेइंतहा बारिस होगी देखना तब तुम और तुम्हारी बेरुखी भी हरिया जाएगी । ये सुखी हुई टहनियां पत्तों से भर जाएंगी, इन झुरे पेड़ो पर कोयल कूं कू करेंगे ये छाया हुआ सन्नाटा पानी के बहाव चिड़ियों की कहकहाहट से एक संगीत बनाएगी । ये बंजर फिर से जंगल बनेगा इसमें शेर चीता भालू बंदर लोमड़ी सांप बिच्छू केचुआ सब रहेंगे । पर तब जंगल में वर्चस्व कि लड़ाई होगी शेर और जंगली सुवर में जंग होगी। हांथी, भालू, मगरमच्छ सब अपना अपना बल दिखाएंगे। हिरनी सुंदर तो होगी पर डरी सहमी रहेगी । पेड़ो में फल होंगे पर बंदर बिना पके ही काट के फ़ेक देंगे, झरनों तालाबों झीलों में मीलों तक पानी होगा पर मगरमच्छ दरियाई घोड़ा से डर के ही पानी मिलेगा । लेकिन एक जंगल इससे अलग है कंक्रीट" का जंगल" । इस जंगल को डर उस जंगल से है जो दिल्ली में हैं सुना है वो बहुत ज़ालिम है । अपने शौक़ को जरूरत समझते और जरूरत से बाज़ार बनातें हैं । बाज़ार जरूरत को सिर्फ भरता नहीं उसे पैदा भी करता है । देखना ये शेर जो बहुत दहाड़ता है एक दिन इसकी खाल किसी के घर कि शान बनेगा । हांथी दांत भी बिकेगा । हा ये चूहा छिंगुर, चींटी, कीड़े मकोड़े सब खुद से मरेंगे या किसी का लंच ब्रेकफास्ट होंगे पर यह कभी इस जंगल कि शान नहीं हो सकते और ना ही मरने के बाद दिल्ली की । क्योंकि हर कमज़ोर ग़रीब समझदार की जरूरत तो है पर कीमती नहीं और ना ही शान है ।

    ज्ञान
    ©gyandeep91

  • gyandeep91 26w

    तुम्हारी आंख का मोती ना सही पानी भी ना रहा,
    दरिया भी ना हुआ और सागर भी ना बना ।
    बिछड़ कर तुमसे पछतावा बस यही रहा,
    इश्क से भी गया और दोस्त भी ना रहा ।।

    ©gyandeep91

  • gyandeep91 26w

    #waste #plastic_pollution #कूड़ा_प्रबंधन #प्लास्टिक_कचरा

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    प्लास्टिक कचरा

    प्लास्टिक ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। अमूमन हर चीज़ के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है, वो चाहे दूध हो, तेल, घी, आटा, चावल, दालें, मसालें, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, स्नैक्स, दवायें, कपड़े हों या फिर ज़रूरत की दूसरी चीज़ें सभी में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है। बाज़ार से फल या सब्ज़ियां ख़रीदो, तो वे भी प्लास्टिक की ही थैलियों में ही मिलते हैं। प्लास्टिक के इस्तेमाल की एक बड़ी वजह यह भी है कि टिन के डिब्बों, कपड़े के थैलों और काग़ज़ के लिफ़ाफ़ों के अपेक्षा ये अधिक सस्ता पड़ता है। पहले कभी लोग राशन, फल या सब्जी, या कुछ भी ख़रीदने बाजार जाते थे, तो टोकरियां या कपड़े के थैले लेकर जाते थे। लेकिन अब तो ख़ाली हाथ ही लोग जाते हैं, क्योंकि पता है कि सामान प्लास्टिक की थैलियों मिल जाएगा। पहले शादी विवाह या कोई समारोह को दावत के अवसर पर पत्तल, दोना और कुल्हड़ की तर्ज़ पर प्लास्टिक की प्लेट, गिलास, चम्मच और कप भी चलन में आ गए हैं। लोग इन्हें इस्तेमाल करते हैं और फिर कूड़े में फेंक देते हैं। लेकिन इस आसान सी प्रक्रिया ने कितनी बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है, इसका अंदाज़ा तो है पर उसे सामान्यजन हल्के मे ले रहे हैं ।

    ©gyandeep91

  • gyandeep91 26w

    Do you know?

    The person eats an average of 70,000 microplastics every year

  • gyandeep91 26w

    Plastic Waste

    It is estimated that India generates 9.46 million tonnes of plastic waste annually or about 946,000 truckloads at 10 tonnes a truck. Nearly 40% of this waste remains uncollected, as per the environment ministry

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    Rana Infra Projects Pvt Ltd