guftgu

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Hi, I am Viraj Srivastava.My hobbies include writing, singing, travelling and cooking.I hail from Lucknow.Fan of SRK.

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  • guftgu 2d

    दो दिन से मौसम कुछ अलग सा लग रहा है ,
    दस्तक सर्दियों की है ,या तेरे लौट आने की !
    ©guftgu

  • guftgu 4d

    लड़खड़ा के गुजरे जो मैकदे के सामने से ,
    वो पूछते हैं सारा गम पी आए हो क्या !
    ©guftgu

  • guftgu 5d

    कभी ये सूनापन तो कभी ये आवारापन ,
    या तो मैं तन्हा हूं , या भीड़ में है ये मेरा अकेलापन !

    हर रोज की तरह चल रही है जिंदगी ,
    हर रोज ढूंढता हूं बातों में अपनापन !

    कभी साथ वक्त बिताया मैंने कश लगा के ,
    तो कभी हाथ में थी भरी शराब का फीकापन!

    कभी लोगो के ताने सूने ,
    तो कभी उनको महसूस कराया उनका खोखलापन!

    कभी खुद की खुशी को निगल लिया ,
    तो कभी गैरों में खुद को ढूंढ लिया !

    कभी ये सूनापन , तो कभी ये आवारापन !
    या तो मैं तन्हा हूं , या भीड़ में है विराज का अकेलापन!
    ©guftgu

  • guftgu 1w

    बारिश , बादल , चाय और याद,
    क्या कुछ नहीं थी , मेरी फरियाद ....

    फर्क था मेरी उसकी बातों में ,
    मैं भींगता तो वो गुस्सा होती ,बादल गरजते तो वो हैरान होती,
    एक आधा इश्क था उसका और मेरा चाय के साथ ,
    हाथो में होती थी प्याली और दिल में होती थी उसकी याद!

    तेज बारिशों में उसके खुले बाल ,
    गरजते बादलों में उसकी हिरनी जैसे चाल!
    चाय का आधा प्याला इश्क से भरा हुआ,
    याद है मुझे आज भी मेरी उससे मुलाकात !

    था मैं हैरान ,वो थी परेशान,
    लफ्ज कहना चाहते थे दिल की हर बात !
    वो भीग रही थी बारिश में, कपकपाए होंटों की गुजारिश में!
    मैं चुपचाप निहार रहा था उसके यौवन को ,
    मानो जैसे मेरा एक स्वपन हो !

    बारिश , बादल , चाय और याद,
    क्या कुछ नहीं थी , मेरी फरियाद ....
    ©guftgu

  • guftgu 3w

    चलो कुछ वक्त तुम्हारे शहर में गुजार के देखते हैं ,
    वो भूली यादें तुम्हारी रातों में निहारते हैं !
    मैं जब भी मिलता हूं तेरे शहर के लोगों से ,
    वो मुझे मुझसे नहीं ,तेरे नाम से पुकारते हैं !

    चलो कुछ वक्त तुम्हारे शहर में गुजार के देखते हैं .....

    रंजीदगी से लबरेज है तेरे शहर की हवा ,
    चलो सेहर को खूबसूरत बना के देखते हैं !
    तेरे शहर में जो भी मिला गमजदा मिला ,
    चलो भीड़ में हम अपनी पहचान बना के देखते हैं !

    चलो कुछ वक्त तुम्हारे शहर में गुजार के देखते हैं .....

    फूल भी खिलना भूल चुके हैं अब तेरे शहर में ,
    कांटे भी अब अपना हक मुझपर जताना जानते हैं !
    और जब भी मैं याद करता हूं वो रूहानी रात ,
    लोग मुझे सपने में भी तेरा होने से रोकते हैं !

    चलो कुछ वक्त तुम्हारे शहर में गुजार के देखते हैं ..
    ©guftgu

  • guftgu 3w

    Apna likho aur apni soch ko acchi karo . Naa ki dusron ka copy kar ke . Just a reminder next time I will write the name also .

    @writersnetwork @miraquill @hindiwriters

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    Please don't copy the poetry of other's . If you are a writer and you know how to play with words and give them the correct meaning then please write your own content .
    ©guftgu

  • guftgu 3w

    शिकवे और शिकायतें उन्हीं से हैं, जो दिल के करीब हैं,
    वरना हर शक्स यहां अपने आप में मशरूफ रहता है !
    ©guftgu

  • guftgu 3w

    Ek Aadhi Raat , Ek Aadha Ishq , Kuch Jazbaat aur Tumhare paas hone ka Ehsaas . Ye sab hai Aaj Saturday ko . ❤️��❤️

    @hindiwriters @miraquill @writersnetwork @hindinama @writerstolli #pod #love #podcast #poetry #lucknow

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    यूं रात जब भी होती थी मुस्कुराना तुम्हारा याद है ,
    खिड़की के छज्जे पे बैठ के यूं निहारना याद है !
    तुम्हारे लबों का सुनापुन क्या कुछ न कह जाता था ,
    तुम आंखे झपकती थी खिड़की से, प्यार मुझे आता था !

    वो सीढ़ियों से चढ़ते हुए खिड़की तक मेरा चले आना ,
    वो अनकहे जज्बातों को अल्फाजों में बयां कर जाना !
    वो दरवाजे की आहट पर तुम्हारी सांसों का सुनापन,
    एक पल मौन होकर तुम्हारी आंखों में डूब जाना !

    तुम्हारी उंगलियों का मेरी उंगलियों में कैद हो जाना ,
    तुम्हारे खामोश से लबों पे मेरी मुस्कुराहट सजाना!
    तुम्हारी गर्दन के करीब इन होंटो का चले जाना,
    और सुलगती सांसों का तेज हो जाना !

    थम के पीछे से कस के तुम्हे कैद कर लेना ,
    कमर में अपनी बाहों को सजाना ,
    उंगलियों से तुम्हारे बदन पर आकृति बनाना,
    धीरे धीरे माथे से जुल्फों को हटाना !

    एक चादर में मदहोश दो बदन को समेट लेना ,
    तुम्हारी आंहों को अपनी आंखों में छुपा लेना !
    तुम्हारी नाभी में अपनी उंगलियां पिरोना ,
    फिर अपने दांतों से इश्क की चुभन को गर्दन पे देना !

    इस सफर के हर कदम को हमदोनो के जिस्म पे भरी होना ,
    मुझे पकड़ के तुम्हारे मेरे सिरहाने लेट जाना ,
    मेरे करीब आकर मेरे सीने पे अपने निशान दे जाना ,
    मेरे उपर गिर कर वो रात मेरे नाम कर जाना!
    ©guftgu

  • guftgu 3w

    कोई किस्सा या कहानी सुनाऊं,
    वो मुझे मूंह जबानी याद है ,
    चलो उसकी दास्तां सुनाऊं !

    धड़कन भी रुक जाती थी जिसे देखकर ,
    सांसे थम जाती थी जिसका नाम लेकर !

    जो वो रुक जाए तो ,चलता हुआ काफिला ना बढ़े ,
    नजर भर के देख ले तो ,जहां जन्नत सा लगे !

    तमाम बातों में उसकी एक बात निराली थी ,
    वो मुस्कुरा दे तो हवाओं में भी रवानी थी !

    पलके झुका ले तो फूल भी शर्मा उठते थे ,
    वो लबों को दबा ले, तो कांटे भी चुभन छोड़ देते थे !

    हश्र ऐसा था आशिकों का ,जैसे हर अदा उसकी कातिल हो ,
    वो नाजुक हसीना जैसे इश्क की कहानी हो !

    सिर्फ इशारे में करती थी वो बातें बैठ कर ,
    कमबख्त दिल पिघल जाता था उसकी ये अदा देखकर !
    ©guftgu

  • guftgu 4w

    बड़ी बेशर्म हो गई हैं रातें अब ,
    हसरतें लाख छुपाऊं ,पर ये तेरी होना चाहती हैं !
    ©guftgu