groovyangel

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I write with my experiences , what i have learnt and observed from my life. Animallover , Naturelover , FaithInGod , lovetohelp , #Lightworker

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  • groovyangel 1w

    ������

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    SOULS OF VIBGYOR

    Thou the driblet of drizzle
    Originated from Ocean
    I as a beam of torrential sun's dazzle
    With purpose of soul promotion

    By interventions
    Of two psychic conjunctions
    From the confluence of the two
    Ray being me surpassing inside you

    And the process of refraction
    With phenomenon of such action
    Union of souls now united
    By gaining consciousness our , Dollishness Blighted

    You and I as WE
    By abutment of the two supernaturals
    Emergence of seven seperations
    The seven colours of rainbow
    Are the supreme indications

    Both souls with the glorious exploration
    Of the seven chakras within
    And this unity of two individuals to one
    Is the union with the divine to win

    Variegated wavelengths of VIBGYOR
    Manifested through our endeavour
    Conceivable only because we connected
    The whole picturesque enacted

    R , red the root
    Base of the spine
    Near the tailbone
    Get balanced , becomes perfectly fine

    O , orange the sacral chakra
    Two inches below belly button
    On balancing the Swadisthana
    Laziness , insanity , disobedience , ego and doubt
    All flaws moves to destruction

    Y , yellow the solar plexus
    Located between naval and sternum
    Manipura , existing in all of us
    By conquering it's prohibitive sides
    We attain qualities like
    Clarity, confidence, joy, self confidence, knowledge, intelligence and ability to take right decisions.

    G , green the heart chakra
    Fixed between the centre of chest
    Is a lotus with twelve petals
    Gathered with unconditional quest
    Symbol of Ecstasy , peace , surity , love , cognizance , clarity , accuracy , integration , compassion , kindness , apology and orderliness .

    B , blue the throat chakra
    Honoured with fifth place
    Base of the throat to the centre of the eyes
    A Bridge that connects body and mind
    Enemy of unhealthy lies
    If one's expression is not right
    Pronunciation of OM makes it bright

    I , indigo The third eye chakra
    Located at the Center of forehead between eyebrows
    Its Mystical and magical colour
    That represents wisdom that deeply grows
    Connecting us to our intuition , inner vision
    And higher consciousness that keenly flows
    Having only two petal lotus flower
    Representing the last remaining duality
    That of self and God

    V , violet the crown chakra
    Two inches above the top of head
    The Sanskrit word Sahasraara
    Meaning with the thousands of petals
    This final stage of soul to infinity
    Is the King of seventh place
    Divine soul drowned with bliss and solace .


    - Aditi Tripathi
    ©groovyangel

  • groovyangel 3w

    विश्वास

    ⏺️विश्वास एक खाई है

    जो इसकी गहराई को नाप जाते है

    वे इसकी अहमियत को भांप जाते है।


    ⏺️लेकिन जो इसमें झूठे होते है

    वो इस विश्वास की खाई में ही

    सदा के लिए गिर जाते है ।।


    ⏹️⏹️⏹️⏹️⏹️⏹️⏹️⏹️⏹️⏹️

    ||किसी का विश्वास कभी मत तोड़िए

    अगर किसी ने आपको अपने दिल की बाते बताई है

    तो उन बातों को अपने दिल में

    किसी तिजोरी में बंद कीमती हीरों

    की तरह रखिए ||

    -अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 5w

    ♥️

    प्रेम बुरा नहीं होता ,
    प्रेम ही तो सबसे सच्चा होता है ,
    परंतु प्रेम को निभाने वाले अगर सच्चे ना हो ,
    तो अधिकांश लोग कहने लगते है- "प्रेम तो धोका होता है , प्रेम में कुछ नहीं रखा"।
    ऐसा कथन पूर्णतया असत्य है।


    क्योंकि ऐसा कथन वो ही कहते है जो खुद भी प्रेम को समझ नहीं पाए , और जिन्होंने उन्हें धोका दिया है वो भी प्रेम को समझ नहीं पाए ।


    जो धोका देते है उसमें प्रेम की क्या गलती , उसमें तो गलती उसकी है जिसने प्रेम शब्द का दायित्व तो लिया पर उसे निभा नहीं पाया।


    प्रेम कभी किसी को कैद नहीं रखती , वो तो सांसारिक बंधनों से सदा के लिए मुक्त कर देती है और परमात्मा के करीब ले जाती है।


    प्रेम किसी को डिस्ट्रैक्ट नहीं करता , डिस्ट्रैक्ट सिर्फ वे होते है जो इसमें हवस की भावना रखते है।
    और जहां हवस है वहां कभी प्रेम वास नहीं करता ।
    वहां तो सिर्फ भ्रम है।


    जब हम प्रेम करते है , और विवाह के पश्चात शारीरिक संबंध बनाते है तो अगर वो संबंध हम संतान को पाने की इच्छा से करते तो वहां हवस नहीं होती , लेकिन अगर संतान की इच्छा नहीं रख कर सिर्फ अपनी शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति करने हेतु जब आप संबंध बनाते है तो वो काम वासना होती है।


    बिना-शर्त प्रेम ही सच्चा प्रेम कहलाता है।
    और जहां बिना-शर्त प्रेम होता है वह प्रेम आध्यात्मिक प्रेम कहलाता है।


    -अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 8w

    परमात्मा

    शाश्वत परम परमात्मा की शाश्वत दिव्य आत्मा,
    निराकार परमात्मा की निराकार आत्मा।
    शरीर नहीं , उस दिव्य स्वरूप का है हम सब अंश,
    खुद को पहचानो , हम सब उसी के है वंश ।।


    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 18w

    मै और मन

    मै हारी मै हारी
    आज खुद से मै हारी
    वैसे तो नहीं हूं हार मानने वाली मै
    लेकिन फिर भी आज खुद से हारी मै
    मै खुद से हताश हूं
    मै खुद से नाराज़ हूं
    मै खुद से दूर हूं
    मै बहुत मजबूर हूं

    शायद नहीं बन पाऊंगी परमात्मा की विधायक
    हा शायद नहीं हूं मै उस लायक
    मै मानती हूं हार
    हा मुझे है स्वीकार
    अब मन अशांत है
    यही तो इसका काम है
    खुद तो हारे बैठा है
    मुझे भी मानने के लिए कहता है

    मै क्यों इसकी बात सुनू
    मै क्यों इसके साथ चलू
    जब ये हराता मुझको है
    जब ये डराता मुझको है
    नाही डरने वाली मै हूं
    नाही हारने वाली मै हूं
    फिर भी आज बहुत हारी हूं
    मै रहस्यों की अलमारी हूं

    मै हूं एक कबूतर बिना पंख के
    मै हूं एक किताब बिना कलम के
    मै हूं एक ख्वाब बिना साकार के
    मै हूं एक इंसान बिना आकार के
    बस यही कहना चाहती हूं
    मै खुद से दूर रहना चाहती हूं
    मै खुद को नाकाम समझती हूं
    मै खुद को बेरोज़गार समझती हूं
    नहीं समझना चाहती खुद को आकार
    क्योंकि मै तो हूं अहम का कारोबार

    मन तो यही कहता है
    पर ये आत्मा को न सेहता है
    आत्मा कही एक बात सुनो
    मेरी कहावत को एक बार गुनो
    कहते है विधाता हताश न हो
    सुख - दुख तो है जीवन का मोह
    डरना नहीं बस सीखती चलना
    करना यही बस चीखती चलना

    ये सब है एक माया का जाल
    आत्मा तो है परमात्मा की डाल
    जब तक जुड़ी , नहीं कोई छलावा
    जब टूटी मुड़ी , नहीं उपाय इसके अलावा
    माया समझे अचल है
    काया समझे अटल है
    दोनों ही नाम मात्र गमन है
    परमात्मा ही आत्मा की अमन है

    जीवात्मा निर्मल वारि है
    परमतत्व आध्यात्म से तारी है
    आत्मा परमात्मा की सबसे प्यारी है
    जगदीश बिना कुवारी है
    ये जीवन चक्र है
    आवा - गमन का मक्र (धोके) है
    ये तो छल की कब्र है
    लोभी चौंधि का टूटा सब्र है
    जो समझ गया माया का काम
    वो पहुंच गया परमेश्वर के परमधाम

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 18w



    कमी का वो सागर सा एहसास
    आज भी ज़हन में दबा हुआ है

    ये कमी नहीं भौतिक सुखो की
    ये वियोग है आध्यात्म की

    जैसे शिव अपनी शक्ति से
    कि कब मिल पाएगी आत्मा परमात्मा से

    ©groovyangel

  • groovyangel 19w

    ��

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    Breaks it yes - "SELFISH BEINGS"

    Breaking , of what ?
    No deepness of thoughts !!!

    No a being ,
    Of peaceful understanding !!!

    Sadness no mean ,
    Every being ,
    Why so mean !!!

    This is so Crook ,
    Nope to hope ,
    Shuts the soul broke !!!

    Nay being nay friend ,
    Don't want , okay the end.
    Let's end , let's end
    Now , I don't be your friend !!!

    - Aditi Tripathi
    ©groovyangel

  • groovyangel 22w



    जब आपके करीबी ,
    आपकी दिक्कतों को झूठा समझने लगे ,
    तो उनसे "उम्मीद की डोर" ,
    पीछे खीच लेनी चाहिए ।

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 31w



    A human who truly understands his / her purpose of being born in this planet , who genuinely appreciates and intellectually knows the god . The soul who knows what is the significance of a human body.
    A human body is a costume of a soul likewise the clothes are the costume of a human body .
    This human body is really important because it has hidden energies which takes us beyond delusion towards the detection of a souls true purpose .
    And food is the main source for this soul's costume to attain salvation.
    So , there should be a wise and satwik choice for the meal .
    I always prefer and encourage people to eat satwik food .

    But , " They live for food and I eat food to live ".

    Most of you really don't believe this quote by Bhagwat Geeta - " जैसा खाएंगे अन्न वैसा बनेगा मन । "

    This actually happens in our body , but sadly a few people only observes and changes .


    - Aditi Tripathi
    ©groovyangel

  • groovyangel 31w



    आध्यात्मिक सोच की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब ,
    हर इंसान एक - दूसरे को एक समान देखना शुरू कर देता है ।
    जब उनके नजरियों में से , उनकी सोच में से नीच मानसिकता का दीमक हट जाता है ,
    और वो एक इंसान को उसके जात - पात से नहीं , रंग - रूप से नहीं , लंबाई - चौढ़ाई से नहीं , कद - काठी से नहीं , धर्म से नहीं , लड़का - लड़की या किन्नर के रूप में नहीं बल्कि एक इंसान और एक आत्मा की तरह देखने लगते है ।

    यहीं से नए आयामों की शुरआत होती है ।


    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel