groovy_angel

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I write with my experiences , what i have learnt and observed from my life. Animallover , Naturelover , FaithInGod , lovetohelp , #Lightworker

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Reposts
  • groovy_angel 4d

    ईश्वर तो सदा से एक है।

    पर उसके किरदार अनेक है।।



    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 2w

    Universe in Favour...

    The Universe is in your favour only when,
    U DON'T THINK ONLY ABOUT YOURSELF SELFISHLY.....

    The Universe is in your favour only when,
    YOU NEVER FORGET TO THINK ABOUT OTHERS....

    The Universe is in your favour only when,
    THEY ACTUALLY NOTICES YOUR LOVING AND CARING NATURE FOR ALL CREATURES EQUALLY WITHOUT ANY DISCRIMINATION.....

    The Universe is in your favour only when,
    YOU THINK EVERY ONE'S PAIN AND HAPPINESS AS IF YOUR OWN....
    WHETHER ANIMAL, PLANT , HUMAN OR ANY LIFE....

    The Universe is in your favour only when,
    YOU DON'T DEFINE ANY ONE AS POOR OR RICH; SMALL OR BIG; STRONG OR WEAK....

    The Universe is in your favour only when,
    YOU ARE NOT ENVY OF ANY BEING,
    AND FAR FROM COMPARISON AND MAKING THEIR FUN TO SATISFY YOUR EGOISH NATURE....

    The Universe is in your favour only when,
    EVERY SINGLE BEING WHETHER OF YOUR BLOOD RELATIONS OR NOT, YOU SHOW YOUR LOVE AND COMPASSION THE WAY YOU SHOW TO YOUR CLOSE ONES....

    The Universe is in your favour only when,
    SIMPLY WHEN YOU UNCOVER YOUR INNER TRUE QUALITIES OF SOUL....

    Aditi Tripathi
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 4w

    ये लड़ाई एक स्त्री के मान सम्मान को बचाने की थी। आज कलयुग में जितनी भी लड़कियों या स्त्री के साथ दुर्योधन और दुशासन जैसे लोग रेप करने की कोशिश करते है, उस पर समाज ऐसे ही चुप बैठ जाता है।

    ये महाभारत उनके लिए सीख है कि,
    जब जब किसी स्त्री के मान सम्मान पर आंच आयेगी,
    माफी नहीं दी जाएगी।
    महाभारत होगी, और यही महाभारत नाश करेगी उन दरिंदों की नीच हिम्मत को।

    आज लड़कियों के साथ रेप हो जाता है,
    लोग चुप बैठ जाते है,
    और इसी चुप्पी के कारण उन दरिंदों की हिम्मत बढ़ती है।
    तो इसलिए महाभारत होना चाहिए,
    स्त्री के मान सम्मान की रक्षा करने के लिए।

    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 4w

    पहले तो उनको मेरा जवाब जिन्होने श्री कृष्ण को अपशब्द कहे, और ये कहा की भगवान श्री कृष्ण कभी नहीं चाहते थे कि युद्ध रुके।

    मेरा उनसे सवाल है, कभी देखी है महाभारत?
    और महाभारत भी देखना तो सिर्फ B R Chopra जी की।
    हां, तो मुझे एक वजह बता दीजिए युद्ध रुकने के। मुझे नही लगता आपको पता होगा क्योंकि जिसने आधा अधूरा देखा हो वो क्या बतायेगा।
    कहा जाता है ना आधी अधूरी जानकारी
    सबसे खतरनाक होती है, वही हो रहा है।

    सबसे महत्वपूर्ण कारण ये है कि, भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करने का दुस्साहस किया गया। वहां पूरी सभा चुप चुप बैठी देखती रही। द्रौपदी भीख मांगती रही, सबके सामने गई, हाथ जोड़े कि कौरवों को रोका जाए लेकिन सब बैठे रहे।

    दुर्योधन ने दुशासन को आज्ञा दी कि वो द्रौपदी को भरी सभा में निर्वस्त्र कर दे।दुशासन ने जैसे ही द्रौपदी के वस्त्र को हाथ लगाया, द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को मदद के लिए पुकारा। श्रीकृष्ण अपने भक्तों को कभी नाराज नहीं करते। कृष्ण ने जब द्रौपदी की करुण पुकार सुनी, तो उन्होंने द्रौपदी की साड़ी को बढ़ाना शुरू कर दिया। दुशासन, द्रौपदी का चीर खींचता रहा, लेकिन वो जितना खींचता वस्त्र उतना बढ़ता जाता। अंत में दुशासन थक कर हार गया, किन्तु द्रौपदी का वस्त्र हरण नहीं कर सका। ऐसा कहा जाता है महाभारत युद्ध के पीछे सबसे बड़ा कारण द्रौपदी चीरहरण ही था।

    आप मुझे बताईए क्या किसी स्त्री के साथ ऐसा होने के बाद उसे माफ कर देना चाहिए?
    आज अगर आपकी अपनी बेटी, बहन, पत्नी या मां के साथ ऐसा हो रहा होता तो क्या आप यही कहते की युद्ध रुकना चाहिए था।

    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 4w

    Please watch this utube channel - Siksharthkam
    Watch this video's link- ��

    https://youtu.be/vhkAi7iQehQ

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    आज की दुनिया, आज का समाज कहां जा रहा है? क्या तरक्की करेगा ऐसा समाज जहां लोग खुद को सनातन धर्मी तो कहते है लेकिन ईश्वर की बातों का अनुसरण नहीं करते। ईश्वर की बातों को फॉलो नही करते। क्या कभी राम जी और कृष्ण जी सा बनने की कोशिश करी है। क्या कभी सीता जी और राधा जी सा बनने की कोशिश करी है। अरे खुद को सनातनी कहने वाले अपने ही धर्म ग्रंथ नहीं पढ़ते। रामायण, महाभारत कभी देखी हो और उसका सही मतलब समझने की कोशिश करी हो तो बोलना। और अगर नकारात्मक बातें फैलानी है रामायण और महाभारत के बारे में तो पहले खुद को देख लेना। अपनी घटिया मानसिकता को देखो।

    कभी श्रीमद्भागवत गीता का एक पाठ भी किया है?
    कभी गीता का एक पन्ना भी पढ़ा है?
    क्या कभी रामायण पढ़ी है?
    क्या कभी रामायण समझी है?

    जो कृष्ण जी और राम जी को गलत मानते है,
    और कंस और रावण को हीरो मानते है,
    ये प्रमाण है कि उन्होंने कभी गीता नही पढ़ी, ना कभी रामायण छुई।

    और अगर पढ़ी भी है तुमने तो तुमने अपने स्वार्थ से पढ़ी।
    क्योंकि तुम गलत हो इसलिए तुमने राम और कृष्ण को गलत बताया।
    क्योंकि तुम रावण और कंस जैसे हो इसलिए तुमने उन्हें हीरो बताया।


    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 4w

    जिस दिन से आप लोगों से,

    ईर्ष्या करना बंद कर देंगे,

    उस दिन से आपके सफलता,

    के रास्ते खुद ब खुद खुल जायेंगे।


    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 5w

    जब तक इंसान कोई अच्छा काम करके
    अपनी अच्छाइयों को अपने अंदर समेट कर रखता है,
    और लोगों को भनक भी नहीं लगने देता
    तो लोग उसके बारे में कुछ भी बाते बना देते है।

    और अगर इंसान अपने किए नेक काम को कहने लगे,
    बताने लगे तो लोग उसे दिखावा समझ बैठते है।

    जरूरी तो नहीं कि वह इंसान दिखावा ही कर रहा हो,
    ये भी तो हो सकता है कि
    उसका INTENSION सिर्फ लोगों को जागरूक करना हो, प्रेरित करना हो।

    कृपया ये भूल कभी न करें।
    निवेदन

    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 6w

    ऐसे दोस्त को
    दोस्त कहना गुनाह है
    जिनके पास हर चीज़ के लिए वक्त हो
    लेकिन जब आपकी बारी आए
    तो उनका वक्त खत्म हो जाता है।

    वो बात करते है अपने सबसे अच्छे दोस्त से
    लेकिन हमारी बारी आने पर
    वो व्यस्त हो जाते है बहुत।

    उनका आपको बार बार इग्नोर करना
    आपकी वैल्यू को बता देता है
    और ये भी बता देता है कि
    वे आपसे बात नही करना चाहते है
    इसलिए अब से
    उन्हें तंग करना बंद कर दीजिए।

    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 7w

    आज कल विवाह,
    रूप रंग, कद काठी देख कर किया जा रहा है
    मुझे ये समझ नहीं आता लोग शादी के वास्तविक अर्थ को क्यों नहीं समझते।

    जो आपको समझे, आपकी मदद करे, आपका सम्मान करे, दोस्त की तरह रहे,
    और सबसे महत्वपूर्ण जीवन साथी का अर्थ होता है जो आपको आपके मां बाप की तरह प्रेम करे
    क्योंकि मां बाप कभी भी अपने बच्चे का रंग रूप देख कर या उसकी शारीरिक दुर्बलता या सुंदरता देख कर उसे प्रेम नही करते,
    मां बाप का प्रेम तो बिना स्वार्थ प्रेम होता है।
    और ऐसा ही प्रेम एक जीवन साथी में होना बहुत जरूरी है, बिना शर्त प्रेम।
    अंग्रेजी में UNCONDITIONAL LOVE...

    मां बाप हमें दिल से प्रेम करते है
    और जब हम किसी से दिल से प्रेम करते है तो
    हमें उसकी बाहरी सुंदरता अपने आप मोहित कर लेती है।

    और ऊपर वाले की बनाई हर चीज़ परफेक्ट होती है, चाहे वह इंसान हो या कोई अन्य जीव।
    किसी को रंग रूप, कद काठी देने वाला ऊपर वाला है,
    उसकी बनाई चीज़ में आप सुंदरता देखना भूल जाते है, तो ये आपकी आंखों की दुर्बलता है, मन का मैल है, अहंकार है कि आप सबसे सुंदर है।

    ऊपर वाले ने सभी को बहुत सुंदर बनाया है।
    बस हमें भी वही ईश्वरीय आंखे चाहिए उस सुंदरता को देखने के लिए,
    क्योंकि उन्हीं आंखो से ऊपर वाले ने भी उस इंसान को सूझ बूझ के तैयार किया है।

    और मन का साफ होना, हर किसी के लिए अच्छा सोचना, हर किसी की मदद करना, हर किसी का सम्मान करना ये सभी गुण सच्ची सुंदरता है एक रूह की।

    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel

  • groovy_angel 7w

    प्रेम विवाह अभिशाप नहीं।
    प्रेम करना अभिशाप नहीं।।

    #prem1vivah
    #prem2vivah
    #prem3vivah
    #prem4vivah
    #prem5vivah

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    Part 5

    वो घटना ये है कि - समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से एक दिव्य देवी प्रकट हुई, वह और कोई नही श्री नारायण की अर्धांगिनी देवी लक्ष्मी थी। उन्हें देख कर देवों ने कहां कि ये नारी, दिव्य देवी है जिन्हें हम अपने साथ स्वर्ग में रखेंगे और दानवों ने कहा कि हम इस सुंदरी को अपनी रानी बनायेगे। देवों और दानवों के बीच स्पर्धा शुरू हो गई, दोनों समूह आपस में लड़ने लगे। नारद मुनि ने जब ये दृश्य देखा तो उन्हें बहुत दुख हुआ और वे ब्रह्मा जी के पास गए और उन्हें सारी कथा सुनाई। तब ब्रह्मा जी धरती पर उतरे और देवो और दानवों से कहा कि कल स्वयंवर का आयोजन किया जाएगा, जिसको भी देवी लक्ष्मी अपने योग्य समझेंगी उसके गले में देवी हार पहना देंगी। कोई भी इनके साथ ज़बरदस्ती नही कर सकता क्योंकि एक नारी ही होती है जो अपना सब कुछ त्याग कर अपने ससुराल रहने आती है। और अगर पति ही समझने और प्यार करने वाला नही हुआ तो सोचो उस नारी की क्या दशा होगी इसलिए नारी का ये हक है कि वह अपने वर का चुनाव स्वयं करें। क्योंकि पति और पत्नी को साथ में एक दूसरे के जीवन साथी बन कर रहना होता है इसलिए ये उनका हक है कि वे अपने जीवन साथी स्वयं चुने।

    अगले दिन स्वयंवर हुआ , देवी लक्ष्मी हाथो में हार लिए एक एक के सामने गई लेकिन देवों और दानवों में से उन्हें कोई अपने योग्य नहीं मिला क्योंकि वे तो हमेशा से ही अपने पति श्री नारायण की थी। वो मन ही मन विष्णु भगवान को पुकार रही थी। तभी स्वयंवर में विष्णु जी भी आ जाते है और माता लक्ष्मी उन्हें हार पहना देती है।
    ईश्वर की बात को अगर हमने ध्यान से समझा होता तो आज ये दिन देखने को नहीं मिलता।
    ना जाति पाती होती , ना ऊंच नीच का भेद , ना ही काले गोरे का फर्क।
    और इससे पता चलता है कि लोग अपने स्वार्थ के लिए ईश्वर की बात को अलग ढंग से , गलत तरह से प्रस्तुत करते है।

    लोग भगवान को मानते है लेकिन उनकी बताई हुई बातों को नहीं।

    अदिति त्रिपाठी
    ©groovy_angel