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3784 posts
  • _philosopher_head_ 2d

    .

    हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां,

    हर दूसरे चौराहे पर एक भीखारी और हर तीसरा इंसान सरकारी कर्मचारी है,

    जहां डिग्री के साथ बैठा युवा पच्चीस हजार की नौकरी करते-करते जीवन से त्रस्त आ गया है और अंगूठाछाप राजनेता करोड़ों खा रहे हैं,

    जहां किन्नरों को समाज से काट दिया गया है और ढोंगियों को परम शक्ति मान लिया है,

    ये संसार की त्रासदी नहीं तो क्या है?
    मानवता से अधिक प्रिय मजहब और मान है?

    समाज जब मजहबी बनता है और इंसान लोभी, तभी अनन्त से अंत की तरफ धाराप्रवाह हो जाते हैं कर्म योगी।
    ©_philosopher_head_

  • darwesh__ 1w

    Tum bhi meri hi tarah kho chuke ho kya sapne
    Bata aye Chand ! din Bhar ke museebat apne

    ©darwesh__

  • samikshabhusari 1w

    ना कश्ती के होते हैं। ना सफर के होते हैं।
    उतर जायें अगर समंदर में वो तो लहर के होते हैं।।

    ना मिठ़ी बातों के होते हैं। ना कड़वी बातों के होते हैं।
    पि लिया अगर शर्बत-ए-इश्क वो तो जहर के होते हैं।।

    वो ना गाँव के होते हैं। ना शहर के होते हैं।
    हाथों में हो अगर कलम वो शायर तो ग़ज़ल के होते हैं।।
    ©samikshabhusari

  • khalid_writes 2w

    Tu Yaad Kar Yaa Bhool Jaa
    Tu Yaad Hai Ye tu Yaad Rakh…

    ©khalid_writes

  • _philosopher_head_ 3w



    रेत सी लकीरों में चांद जैसे ख्वाब है मेरे,
    अंधेरे की गिरफ्त मे है रोशनी,
    फिर भी साथ आसमान है मेरे।
    और बुनियाद कच्ची रखी थी ख्वाबों की टूटना तो लाजमी था,
    लेकिन अब जो गिर कर उठी हूं,
    तो दोबारा हार से मरासिम होना नामुमकिन है।
    ©_philosopher_head_

  • aqdas_m 7w

    दूर बैठकर यूंही उसे देखते रहना
    कई मोहब्बतें बस इसी में सिमट कर रह गईं



    aqdas

  • aqdas_m 7w

    एक मुद्दत के बाद मिले हो हमसे
    ज़रा पास बैठो, आंख भर कर देख तो लेने दो



    aqdas

  • smartsam 8w

    नेहा!

    एक अदा एक नूर "नेहा"
    क्या खूब उसने कविता में कहा।
    दिखी तो अलफाजों में ही
    देखा मैने जहां जहां।

    अदा खूब जो काबिलियत
    लिखने पर!
    या खुदा वो कभी
    पास आए नजर!

    लब्ज़ जब हो
    कम और शायद हया।
    आरजू तो बस तब
    कविता से हो बयां!

    ©SmartSam

  • miznaqvi 8w

    Kis se karein apni narazgi zahir
    Mehboob toh ab ijazat deta nahi








    ©miznaqvi

  • smartsam 9w

    प्यार सच्चा!

    चेहरा देखा दिल नहीं
    आंखे देखी नजर नहीं!
    मुस्कुराहट भाई
    सच्चाई पता नहीं
    खूबसूरती देखी
    किया कोई सवाल नहीं!

    अदा दिल में बसी,
    अब वो ही सब खुशी!
    चुराले गई पहेली
    उसकी वो हसीं!

    खूबसूरती पे हुए फिदा
    नहीं कुछ सोचा ज्यादा!
    एक नज़र मिली
    फिर किया जो वादा।
    मिल गए दो दिल सदा!

    दिखता है जो
    वो होता नहीं।
    जब प्यार ही हो सब
    तब आता कुछ और समझ नहीं!

    अक्ल का कोई पता नहीं
    कभी प्यार वो नशा है?
    प्यार हो एक बार
    और कुछ फिर भाता नहीं!

    प्यार प्यार होता है
    लगता इसे कोई ईरादा नहीं!
    एक नज़र बस और ज्यादा नहीं।
    डूबता है फिदा होता है जो वहीं।

    प्यार होने से सच होता नहीं
    निभाने से ही प्यार होता सही!
    पहले मिलन में हो प्यार
    आखरी में इकरार वहीं!

    ©SmartSam

  • smartsam 9w

    अलीशिबा!

    दिल भी प्यारा, मन भी प्यारा
    उम्मदा नफ़्स, शकसियत जैसे सबा!
    बस एक आप प्यारी अलीशिबा!
    बस एक आप प्यारी अलीशिबा!

    यव्वन भी हो जिसपे फिदा
    यकीनन हो आप अलीशिबा!

    जन्नत सी हो जिसकी अदा
    बस एक हसीन अलीशिबा!

    सब में होकर भी सबसे जुदा
    नहीं कोई आपसा अलीशिबा!

    हसीन हो आप जैसी हो हव्वा
    खूबसूरत सबसे अलीशिबा!

    खुशी कभी आपसे ना ले रझा
    हस्ती मुस्कुराती रहो आप सदा!

    ठंड मेहक जो प्यारी हर सुबह
    बस एक आप वो अलीशिबा!

    आप के लिए हमारी दुआ
    यहोवा आपको बेशुमार दे आशीष सदा!

    फूलो से प्यारी है आपकी अदा
    खुश रहो, खिलती रहो आप सदा
    अलीशिबा सबसे प्यारी अलीशिबा!

    ©SmartSam

  • smartsam 11w

    यहोवा मेरा जीवन!

    वक्त गुजर जाता है,
    लोग बदल जाते है!
    बोहत ही कम है कुछ
    जो रिश्ते, प्यार निभाते है!

    कुछ पैसों के लिए
    कुछ मतलब के खातिर!
    बदलते है लोग
    हवा के तौर!

    वैसे तो ये दुनिया
    लगती है क्या ही हसीन!
    लालच, धोका, घमंड
    देखो तो सच
    है जैसे कब्रस्तान!

    यहोवा परमेश्वर मेरा धृदगड़
    देता सच्चा ज्ञान,
    सुरक्षा, अनंत जीवन!
    खुशियों से अब भर गया मेरा जीवन!!

    ©SmartSam

  • smartsam 11w

    दस्तुर दुनिया का

    दुनिया हुई मलताबी
    शातिर भी खूब!
    समझले मेरे दिल
    दस्तुरे दुनिया का अब!

    'अपना ही बस'
    जमाने की है आज ये फितरत!
    तू रह गया भोला पागल
    हसीं में लिया सब!
    समझले मेरे दिल
    दस्तुर दुनिया का अब!
    दस्तुर दुनिया का अब!

    ©SmartSam

  • smartsam 11w

    मेरी जान!

    सागर हुआ छोटा
    जो आंखे तेरी देखी!
    सूरज की क्या बात
    तेरे प्यार में जो में तपती!

    आवाज़ तेरा हो जैसे
    सुरो का अलंकार मधुर!
    गुस्सा छुपाए हक
    प्यार में तेरे जरूर!

    तेरा यू छूना
    कोई फूल का लगना!
    आये जी तू करीब
    जिस्म का अनजान
    अलग ही मेहकना!

    हसीन तू खूबसूरत जवान
    कुदरत भी तुझपे हुई मेहरबान!
    मुस्कुराहट तेरी महकता सावन!

    तू ही मेरी सब
    तू ही मेरा रब!
    तू ही मेरी जान!
    हो जाए पूरे अरमान
    लग जा गले
    अब मेरी जान!
    लग जा गले
    अब मेरी जान!!
    ❤️

    ©SmartSam

  • smartsam 11w

    मिलन!

    प्यार का सुख
    हवस का मिलन!
    इस मोड़ पर आ
    बैठा मेरा ये यव्वन!

    तेज़ है दिल की धड़कने
    बस तू ही आए नजर!
    मन में चाहे देखू,
    या देखू में दर्पण!

    तेरा वो तपना
    करीब मेरे होना!
    दिल और जिस्म
    चाहे और सब अब होना!

    आंखो से तेरी मधुर
    टपकती हवस!
    हसीं में इशारा
    होंट दबाए दात
    कर दे मुझे बेबस!

    सांसे तेरी तेज़ और
    जिस्म में छुपी
    प्यार की जलन!
    वक्त जाए थम मेरे सनम
    और बरकरार मेरे प्यार
    हो अपना मिलन!

    ©SmartSam

  • smartsam 11w

    इंसान!

    इंसानियत से ही हो मेरी पहचान!
    ना हिन्दू ना मुसलमान।
    ऊपर वाले ने तो बस
    बनाया इंसान!

    सिख हो चाहे
    या फिर ईसाई।
    होती है सबकी
    काली ही परछाई!
    एक दूसरे से क्यों फिर
    हम परेशान!
    ऊपर वाले ने तो बस बनाया इंसान!

    बात तब बने हो जब
    प्यार और अमन!
    दोस्त मेरे सब
    बौद्ध हो या जैन!
    यार दोस्तों से ही
    हो मेरी पहचान!
    ऊपर वाले ने तो बस
    बनाया इंसान!

    आंखो का नूर
    कोमल सी हसीं!
    नहीं बताती कभी
    नियत, कोम, जाती!
    सच्चाई से क्यों फिर
    आज लोग अनजान?
    ऊपर वाले ने तो बस बनाया इंसान!

    हसीं, आंसू का कोई मजहब नहीं होता
    जातपात से इंसान अलग नहीं होता!
    प्यारे सब है, सबके एक अरमान
    ऊपर वाले ने तो बस बनाया इंसान!

    डर क्यों तुमसे, तुम भी मेरे भाई
    एक ही तो जिंदगी हम सबने पाई!
    प्यार, मोहब्ब्त दिल में,
    हो ऊंचे अरमान!
    ऊपर वाले ने तो बस बनाया इंसान!

    इंसानियत से ही हो मेरी पहचान!
    ऊपर वाले ने तो बस
    बनाया इंसान!
    ऊपर वाले ने तो बस
    बनाया इंसान!

    ©SmartSam

  • smartsam 12w

    इशारा!

    आओ करीब अब तो
    दिन ढल गया!
    नहीं जो तुम हमसे
    सब फिजूल गया!

    शाम हुई रात
    रात हुई काली!
    चांद भी आ गया अब
    तारे संग उसके
    अब तो ऐ मेहबूब
    हो जाए हमजोली!

    तारे चमक उठे है
    अंधेरे भी है घना!
    जो तुम नहीं तो प्रीतम
    आसमां मेरा सुना!

    हसींन हो जाए ये रात
    मौसम भी कुवारा है!
    मेहक रही है हवा
    शायद कुछ इशारा है!
    मेहक रही है हवा

    आ जाओ प्रियतम
    शायद कुछ इशारा है!!


    ©SmartSam

  • smartsam 12w

    एक चेहरा!

    एक चेहरा मैंने देखा
    खुदा की दस्तखत थी उसपे!
    यकीनन खुदा ने है
    बनाया था उसे!

    आंखो का नूर
    लबो का उसके खिलना!
    ये कम हो तो फिर
    आंखो का आंखो से मिलना!

    आवाज़ में उसके
    थी कोई अलग ही अदा!
    बिखरे जो उसके बाल
    क्यों न हो जाऊ में फिदा!

    कमसिन उसकी कमर
    वो चले तो दिल में मेरे लचक!
    और पास हो कभी तो
    गहरी मीठी महक!

    अदा उसकी झरना बेहता पाणी
    नजर उठे तो उसकी झलक नई सुहानी!
    एक पलक आंखो की उठे
    नक्ष उसकी अपनी सुहानी!

    एक चेहरा मैंने देखा
    खुदा की दस्तखत थी उसपे।
    यकीनन खुदा ने ही
    बनाया था उसे।
    यकीनन खुदा ने ही
    बनाया था उसे!

    ©SmartSam

  • smartsam 12w

    मदहोश!

    पलके तेरी खुली और
    आंखो में तेरी देखा
    सनम देखते ही में डूब गया!
    हसीं जो तेरी खिली प्यारी
    हर फूल मुरझा गया!

    बाल जो तुमने बिखेरे
    घना अंधेरा सा हो गया!
    ना जाने किस ख्वाब में
    मदहोश में हो गया!

    ना कोई दवा, ना दारू
    ना कोई इस मर्ज पर असर!
    बस एक दफा तुमने जानम
    करदी यहां नजर!

    वक्त बदल गया
    दिन हुई यू रात!
    ठहर गई सब महफ़िल
    कायनात भी ए मेहबूब
    जो थामा तुने मेरा हात!

    ©SmartSam

  • smartsam 76w

    मेहक किताबो की !

    गए दिन किताबो के
    अब Tab आ गयी।
    मेहक किताबो के पन्नो की
    इतिहास मे समा गयी !

    खेल मैदानो का
    ना जाने कहा खो गया?
    मोबाईल के pubg मे
    बच्चे से बुढा समा गया!

    फुलो से प्यार नही
    अब emoji ही लेलो !
    मिलते नाही अब लोग
    हर कोई अपने मे ही
    खो गया।
    मेहक किताबो के पन्नो की
    इतिहास मे समा गयी !

    मिल बैठ कर बाते कहा?
    बिस्तर पे ही whatsapp किया ।
    मेलमिलाप ना रहा
    Online सब हो गया !

    देख लिया facebook पे
    Messenger पे दिल मिले ।
    देखा ना भाला जुड गये
    नही बनी जब बात
    तो offline ही हो गये !

    Social Website पर
    मुलाकात
    शादी की site पर इकरार किया।
    तलाक भी दिया तो online
    ये कैसा जमाना आ गया?

    खैर online होना तो गैर नाही
    पर यारो का मिलना अब कहा !
    समझ ना पाया मै ही शायद
    ये जीवन निती ही बदल गायी!

    मेहक किताबो के पन्नो की
    इतिहास मे समा गयी !

    गए दिन किताबो के
    अब Tab आ गयी।
    मेहक किताबो के पन्नो की
    इतिहास मे समा गयी !

    मेहक किताबो के पन्नो की
    इतिहास मे समा गयी !!

    ©SmartSam