#upsc_aspirants

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  • ashish_d 44w

    लालबत्ती

    आशायें तोड मरोड़ने वाले शहर...
    घर छोड़ आये हम मुखर्जी नगर...

    हर कमरे की ईंट किताब की हैं...
    लालबत्ती वाले उस ख्वाब की है...

    लक्ष्मीकांत स्पेक्ट्रम सीढ़ीयों में हैं...
    लेक्सीकाॅन बढ़ती दाढ़ियों में हैं...

    दिवारो पर है कई मानचित्र बने...
    मृणाल NCERT हमारे मित्र बने...

    अब बस प्रि का इंतजार बाकी है...
    मई में पसीने की बौछार बाकी हैं...

    सावन से पहले यहां बरसात होगी...
    उजाले में तब्दील हर रात होगी...

    कई उस दौड़ में, पर कहीं के ना रहेंगे...
    तकिया बताएगा वे सपने कहां बहेंगे...

    पूरी रात विश्वास झकझोरा जाएगा...
    नई उम्मीद का फिरसे सवेरा आएगा...

    आंसू पोछ सुबह द हिंदू हाथ में होगा...
    गिरकर उठने का हौसला साथ में होगा...

    बिखराव समेटना हैं टूटना नहीं हैं...
    लालबत्ती बगैर घर लौटना नहीं हैं...
    ©ashish_d