#unoriginal

21 posts
  • benhurbedford 20w

    Mimic

    I feel like a weakling.
    Shadowing the past of others.
    Leave my path undiscovered, and unbothered.
    But mere thunder that my heart sings at night.

    I flee but I'm a wee bit awful,
    When I shadow the past of others,
    Leaving my path undiscovered, and it's bothering,
    the tune in my head that lights a fume as the night slumbers.
    ©benhurbedford

  • swagata_kolya 74w



    Tootne mein kuch toh takat hogi,
    Wo tootne ka dard jante hain,
    Warna toote hue taare aise hi
    kisiki khwahish puri nahi karte.
    ❣️❣️❣️
    ©swagata_kolya

  • bright_darkness 78w

    फिर से उड़ चला

    मिट्टी जैसे सपने ये, किताबी पलकों से,
    झाडो फिर आ जाते हैं।

    इतने सारे सपने ये, क्या कहूं किस तरह से,
    मैंने छोड़े हैं तोड़े हैं।

  • bright_darkness 80w

    ख़ुदा

    दिखाई भी ना दे, नज़र भी जो आ रहा है..

    वो ही ख़ुदा है।।

  • bright_darkness 81w

    मुसाफिर

    ढलती रात का इक मुसाफ़िर, सुबह अलविदा कर चला,

    जीते जी तेरा हो सका ना, मर कर हक अदा कर चला ।

  • bright_darkness 81w

    अर्ज़

    कागा रे कागा मोरी इतनी अरज तोसे, चुन चुन खाईओ मास,

    पर खाईओ ना तू नैना मोरे, इनमें पिया मिलन दी अास ।

  • ishan666 135w

    Meat Suits

    Suits for sale, suits for sale,
    One size fits all I swear
    Do you want the one with a smile,
    Or the "meh, I don't care"
    I can customize expressions,
    Don't worry I can make them all,
    Do you want the one you want to share
    With people who don't care at all??
    I can make u buff n make u skinny,
    If that "suits" your need,
    Aha!! Pun intended
    A suit for your story and your feed.
    I see your closet is full,
    But new trends will always come,
    Don't worry I am here
    Why so glum, chum??
    After all, these nice people
    Genuinely care for you
    Your well pressed meat suit
    Will definitely define you.
    You will be the popular one,
    The one who people adore.
    Who cares about what lies
    Deep inside your core.
    Suits for sale, suits for sale.
    I swear I tailor the best.
    Why bother with your own expression
    When you can be just like the rest.

  • iamtheashutosh 136w

    Life!

    Everybody dies, but not everybody lives.
    ~Anonymous

  • iamtheashutosh 141w

    बेटे।

    बेटे डोली में विदा नही होते,
    और बात है मगर,
    उनके नाम का "ज्वाइनिंग लेटर",
    आँगन छूटने का पैगाम लाता है,

    जाने की तारीखों के नज़दीक आते आते,
    मन बेटे का चुपचाप रोता है,
    अपने कमरे की दीवारें देख देख,
    घर की आखिरी रात नही सोता है,

    होश सम्हालते सम्हालते,
    घर की जिम्मेदारियां सम्हालने लगता है,
    विदाई की सोच में बैचेनियों का समंदर हिलोरता है,
    शहर, गलियाँ, घर छूटने का दर्द समेटे,

    सूटकेस में किताबें और कपड़े सहेजता है,
    जिस आँगन में पला बढ़ा, आज उसके छूटने पर,
    सीना चाक चाक फटता है,
    अपनी बाइक, बैट, कमरे के अजीज पोस्टर छोड़,

    आँसू छिपाता मुस्कुराता निकलता है,
    अब नही सजती दरवाजे पर,
    दोस्तों की गुलज़ार महफ़िल,
    ना कोई बाइक का तेज़ हॉर्न बजाता है,

    बेपरवाही का इल्ज़ाम किसी पर नही अब,
    झिड़कियाँ सुनता देर तक कोई नही सोता है,
    वीरान कर गया घर का कोना कोना,
    जाते हुए बेटी सा सीने से नही लगता है,

    ट्रेन के दरवाजे में पनीली आंखों से मुस्कुराता है,
    दोस्तों की टोली को हाथ हिलाता,
    अलगाव का दर्द जब्त करता,
    खुद बोझिल सा लगता है,

    ये बात और है बेटे डोली में विदा नहीं होते मगर,
    फिक्र करता माँ की मगर,
    बताना नही आता है,
    कर देता है "ऑनलाइन" घर के काम दूसरे शहरों से,

    और जताना नही आता है,
    दोस्तों को घर आते जाते रहने की हिदायत देते,
    संजीदगी से ख्याल रख "मान" नही मांगता है,
    बड़ी से बड़ी मुश्किल छिपाना आता है,

    माँ से फोन पर पिता की खबर पूछते,
    और पिता से कुछ पूछना सूझ नही पाता है,
    लापरवाह, बेतरतीब लगते है बेटे,
    मजबूरियों में बंधे,

    दूर रहकर भी जिम्मेदारियां निभाना आता है,
    पहुँच कर अजनबी शहर में जरूरतों के पीछे,
    दिल बच्चा बना माँ के आँचल में बाँध जाता है,
    ये बात और है बेटे डोली में विदा नहीं होते मगर।

  • iamtheashutosh 146w

    शौक।

    शौक़ सारे छिन गये,
    दीवानगी जाती रही।

    आयीं ज़िम्मेदारियाँ,
    तो आशिकी जाती रही।

    मांगते थे ये दुआ,
    हासिल हो हमको दौलतें।

    और जब आयी अमीरी,
    शायरी जाती रही।

    मय किताब-ए-पाक़ मेरी,
    और साक़ी है ख़ुदा।

    बोतलों से भर गया दिल,
    मयकशी जाती रही।

    रौशनी थी जब मुकम्मल,
    बंद थीं ऑंखें मेरी।

    खुल गयी आँखें मगर,
    फिर रौशनी जाती रही।

    ये मुनाफ़ा, ये ख़सारा,
    ये मिला, वो खो गया।

    इस फेर में निनयानबे के,
    ज़िन्दगी जाती रही।

    सिर्फ़ दस से पांच तक,
    सिमटी हमारी ज़िन्दगी।

    दफ़्तरी आती रही,
    आवारगी जाती रही।

    मुस्कुरा कर वो सितमग़र,
    फिर से हमको छल गया।

    भर गया हर ज़ख्म,
    तो नाराज़गी जाती रही।

    उम्र बढ़ती जा रही है,
    तुम बड़े होते नहीं।

    ऐसे तानों से हमारी,
    मसख़री जाती रही!

    डॉ● आशुतोष मिश्र

  • abhay_maheshwari 150w

    A lesson half learnt would repeat itself.

  • iamtheashutosh 151w

    देर।

    कहीं छत थी, दीवारो-दर थे कहीं,
    मिला मुझको घर का पता देर से,
    दिया तो बहुत ज़िन्दगी ने मुझे,
    मगर जो भी दिया वो दिया देर से,

    हुआ न कोई काम मामूल से,
    गुज़ारे शबो-रोज़ कुछ इस तरह,
    कभी चांद चमका ग़ज़ल वक़्त पर,
    कभी घर मे सूरज उगा देर से,

    कभी रुक गए राह में बेसबब,
    कभी वक़्त से पहले घिर आयी शब,
    हुए बन्द दरवाजे खुल-खुल के सब,
    जहां भी गया मैं गया देर से,

    ये सब इत्तिफ़ाक़ात का खेल है,
    यहीं से जुदाई, यही मेल है,
    मैं मुड़-मुड़ के देखा किया दूर तक,
    बनी वो खामोशी, सदा देर से,

    सज़ा दिन भी रौशन हुई रात भी,
    भरे जाम लहराई बरसात भी,
    रहे साथ कुछ ऐसे हालात भी,
    जो होना था जल्दी हुआ देर से,

    भटकती रही यूं ही हर बंदगी,
    मिली न कहीं से कोई रौशनी,
    छुपा था कहीं भीड़ में आदमी,
    हुआ मुझमे रौशन ख़ुदा देर से।

    ~निदा फ़ाज़ली

  • iamtheashutosh 153w

    Simple!

    Before you judge my life, my past or my character,
    Walk in my shoes, walk the path I have traveled,
    Live my sorrow, my doubts, my fear,
    My pain and my laughter,
    Remember, everyone has a story,
    When you've lived my life,
    Then you can judge me.

    ~Anonymous

  • iamtheashutosh 157w

    तन्हाई।

    मैं तन्हा था मगर इतना नही था,
    मेरी तन्हाई मुक़्क़मल तेरे आने से हुई।

  • iamtheashutosh 158w

    दिसम्बर।

    तुम्हारे बाद गुज़रेंगे भला कैसे हमारे दिन,

    नवम्बर से बचेंगे तो दिसम्बर मार डालेगा।

  • iamtheashutosh 158w

    हमदर्द।

    हर मोड़ पे मिलता है हमदर्द नया,
    मेरे शहर में हैं फनकार बहुत।

  • iamtheashutosh 158w

    मुलाक़ात।

    "तुझसे मिलने को बेक़रार था दिल,
    तुझसे मिलकर भी बेक़रार रहा।"

  • iamtheashutosh 158w

    क़ुर्ब।

    बस एक तेरे बिछड़ने की देर थी जैसे,
    सिमट के आ गया लम्हों में क़ुर्ब सदियों का।

    क़ुर्ब: नज़दीकी

  • iamtheashutosh 159w

    मिसराः

    जिसका एक मिसराः मैं हूँ और एक तुम,
    बस वही शेर मुक़्क़मल नहीं होने वाला।

  • iamtheashutosh 159w

    क़लाम।

    मैंने देखे हुए हैं वो लम्हे,
    ख़ामोशी जब क़लाम करती है।